होर्मुज की जंग में अमेरिका पड़ा अकेला? ट्रंप की अपील पर सहयोगियों ने फेरा मुंह, अब कैसे बचेगा दुनिया का 20% तेल?
punjabkesari.in Monday, Mar 16, 2026 - 10:31 AM (IST)
वॉशिंगटन/तेहरान: ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण युद्ध अब अपने तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है। इस जंग के बीच दुनिया की तेल लाइफलाइन कहे जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Hormuz Strait) की सुरक्षा को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आर-पार की रणनीति अपना ली है। ट्रंप ने दुनिया के शक्तिशाली देशों से अपील की है कि वे इस समुद्री रास्ते की सुरक्षा के लिए अपने युद्धपोत भेजें, हालांकि उनके इस अनुरोध पर सहयोगियों ने ठंडे तेवर दिखाए हैं।
'मदद करें तो अच्छा, न करें तो और भी अच्छा'
एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि वह होर्मुज की निगरानी के लिए 7 देशों से बातचीत कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन से देश हमारे अनुरोध को ठुकराते हैं। अगर वे मदद करते हैं तो बहुत अच्छा, और अगर नहीं करते, तो भी बहुत अच्छा। ट्रंप का इशारा साफ था कि जो देश इस रास्ते से तेल लेते हैं, सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उन्हीं की होनी चाहिए।
दुनिया का सबसे बड़ा चोक पॉइंट है होर्मुज
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है क्योंकि दुनिया का 20% तेल यहीं से होकर गुजरता है। रोजाना करीब 20 मिलियन बैरल तेल की आवाजाही होती है। दुनिया की 20% एलएनजी (LNG) सप्लाई इसी रास्ते पर निर्भर है। भारत और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की ऊर्जा सुरक्षा के लिए यह रास्ता लाइफलाइन है।
सहयोगी देशों ने फेरा मुंह, किसने क्या कहा?
ट्रंप की अपील के बावजूद, एक-एक कर कई बड़े देशों ने युद्धपोत भेजने से इनकार कर दिया है या दूरी बना ली है। जापान के प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें अभी तक आधिकारिक अनुरोध नहीं मिला है और वे फिलहाल सैन्य शिप भेजने पर विचार नहीं कर रहे हैं। फ्रांस के रक्षा मंत्री कैथरीन वॉट्रिन ने दो टूक कहा कि जब तक युद्ध जारी है, फ्रांस अपने जंगी जहाज नहीं भेजेगा।ऑस्ट्रेलिया और तुर्की दोनों ने ही इस मिशन में शामिल होने से लगभग इनकार कर दिया है। जर्मन नेतृत्व ने इस मिशन की प्रभावशीलता पर शक जताया है। दक्षिण कोरिया ने फिलहाल इस मामले पर ध्यान से विचार करने की बात कह रहा है।
'ईरान की मिसाइलें खत्म होने की कगार पर'
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी हमलों ने ईरान की उत्पादन क्षमता को लगभग नष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान अब पहले की तुलना में मात्र 20% ड्रोन और बेहद कम मिसाइलें दाग पा रहा है। ट्रंप के अनुसार, अब होर्मुज की निगरानी करना एक छोटा सा प्रयास है क्योंकि ईरान की शक्ति अब लगभग खत्म हो चुकी है।
