शबद का मतलब गहरा, पूरी जिंदगी की सीख इसमें छिपी है: सुविंदर विक्की

punjabkesari.in Thursday, Feb 05, 2026 - 11:51 AM (IST)

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। 6 फरवरी को जी5 पर रिलीज होने जा रही नई वेब सीरीज़ ‘शबद’ इन दिनों चर्चा में है। यह सीरीज़ रीत और रिवाज, परंपरा और आधुनिक सोच के बीच चल रहे उस संघर्ष को दिखाती है जिसे आज की पीढ़ी रोज़ महसूस करती है।इस सीरीज में सुविंदर विक्की, मिहिर आहूजा मुख्य किरदार में नजर आने वाले हैं। इस सीरीज के बारे में सुविंदर विक्की और मिहिर आहूजा ने  पंजाब केसरीनवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...

सुविंदर विक्की

सवाल:  सीरीज का नाम कैसे तय हुआ? क्या शुरुआत से यही टाइटल था?
जवाब:
नहीं, शुरुआत में इसका नाम कुछ और था। स्क्रिप्ट और शूटिंग के बाद जब नाम बदला गया और ‘शबद’ सामने आया, तो मैं बहुत खुश हुआ। ‘शबद’ सिर्फ छह अक्षरों का नाम है, लेकिन इसका मतलब बहुत गहरा है। हम रोज़ घरों में, गुरुद्वारों में शब्द सुनते हैं और उसी शब्द में पूरी ज़िंदगी की सीख छुपी होती है। इस कहानी में गुरबाणी, रीत और आस्था खुद-ब-खुद बहती हुई महसूस होती है। ऐसा लगा जैसे यह नाम ऊपवाले ने खुद चुना हो। जब ‘शबद’ आया तो बिल्कुल सटीक लगा जैसे कहानी खुद अपना नाम बता रही हो।

सवाल: इतने शानदार प्रोजेक्ट्स के बाद आपने ‘शब्द’ क्यों चुना?
जवाब:
एक एक्टर के तौर पर मेरे सामने कई स्क्रिप्ट्स आती हैं और हर स्क्रिप्ट के साथ जिम्मेदारी भी आती है। मैं वही काम करना चाहता हूं, जिसके साथ न्याय कर सकूं। मेरी भी लिमिटेशंस हैं मैं ऐसा किरदार नहीं लेना चाहता, जिसे पूरी ईमानदारी से निभा न पाऊं। ‘शबद’ पढ़ते वक्त लगा कि यह सिर्फ एक्टिंग नहीं, बल्कि आत्मा से जुड़ा किरदार है। आंखों, आवाज़ और भाव से इसे निभाया जा सकता है। यही वजह थी कि मैं इस किरदार से जुड़ गया।

सवाल: रागी का किरदार निभाना और गुरबाणी से जुड़ना। आपके लिए कैसा अनुभव रहा?
जवाब:
यह मेरे लिए सिर्फ किरदार नहीं था। गुरबाणी को निभाते वक्त बहुत जिम्मेदारी महसूस हुई। शब्द बोलना आसान नहीं होता मन, आत्मा और नीयत तीनों साफ होने चाहिए। मैंने परमात्मा से अरदास की कि अगर कहीं कोई गलती हो जाए, तो माफ करना। यह किरदार मेरे अंदर तक उतर गया और शायद इसी वजह से इसने मुझे अंदर से बदल दिया।

सवाल: इस किरदार को करने के बाद आपके अंदर क्या बदलाव आया?
जवाब:
अगर मैं बदलाव की बात करूं तो काफी सारे बदलाव आए हैं। इस शो के बाद परिवार के साथ मेरा जुड़ाव और गहरा हो गया। आजकल हम इतने बिजी हो जाते हैं कि अपनों के लिए वक्त निकालना भूल जाते हैं। इस किरदार ने मुझे सिखाया कि परिवार, रिश्ते और साथ बैठकर बिताया गया वक्त सबसे जरूरी है। मनमुटाव होते हैं लेकिन रिश्ते नहीं टूटने चाहिए। तो मुझे लगता है कि अब मैं एक फैमिली मैन बनकर रहूंगा। अपने परिवार और रिश्तेदारों के प्रति उतना प्रेम रखूंगा। 

सवाल: आज की जनरेशन पर यह सीरीज़ क्या संदेश देती है?
जवाब:
हर जनरेशन अपने वक्त में सवाल करती है। हम भी अपने मां-बाप से सवाल करते थे। फर्क बस इतना है कि आज वक्त तेज है। ज़रूरी है कि बच्चे अपनी सीमाओं में रहें, पर साथ ही उन्हें समझा जाए। बहुत ज्यादा सख्ती रिश्तों में दूरी पैदा कर देती है।

मिहिर आहूजा 

सवाल: आपका किरदार ‘गुप्पी’ एक फुटबॉलर बनना चाहता है, लेकिन घर की परंपरा कुछ और है। आपने इसे कैसे तैयार किया?
जवाब:
गुप्पी का सपना फुटबॉलर बनने का है। फुटबॉल फील्ड में वह खुद को सबसे ज्यादा कॉन्फिडेंट महसूस करता है वह अपनी टीम का कैप्टन है, वहीं उसे लगता है कि वह खुद है। लेकिन घर में उसके पिता चाहते हैं कि वह रागी बने, क्योंकि दादा जी भी रागी थे और पिता भी। यह रीत है परंपरा है। गुप्पी अपने पिता के खिलाफ नहीं है वह उनका दिल भी नहीं दुखाना चाहता, लेकिन वह वो बन नहीं पा रहा जो उससे उम्मीद की जा रही है। यही इस कहानी का संघर्ष है अंदर का और बाहर का। पिता का मान भी रखना है उनकी रीत भी निभानी है और खुद की पहचान भी नहीं खोनी है। यही शबद की आत्मा है।

सवाल: इस प्रोजेक्ट के लिए आपका सिलेक्शन कैसे हुआ?
जवाब:
मैंने जब पहली बार डायरेक्टर अमित गुप्ता और शो रनर जयती पांड्या से मुलाकात की  तो उन्होंने पूरी कहानी सुनाई। कोई बड़ा ऑडिशन नहीं था बल्कि एक लुक टेस्ट था पगड़ी पहनकर, उस फील में। उन्होंने मुझ पर भरोसा किया और मैंने भी वादा किया कि मैं खुद को पूरी तरह बदल लूंगा वजन कम करना 17 साल का दिखना, सब किया। मुझे लगा इतनी अच्छी कहानी का हिस्सा बनना ही है।

सवाल: माही राज जैन के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
जवाब:
माही बेहद टैलेंटेड एक्ट्रेस है। इतनी कम उम्र में उसकी आंखों में जो vulnerability और सच्चाई दिखती है, वो कमाल की है। हर कलाकार से कुछ न कुछ सीखने को मिला सुविंदर सर से डिसिप्लिन और स्विच ऑन-ऑफ करना और माही से सादगी और भावनाएं।

सवाल: इस शो को करने के बाद क्या आपके अंदर कोई बदलाव आया है?
जवाब:
जी हां, मैं हमेशा से ही स्पिरिचुअल रहा हूं और मेरा मानना है कि जीवन में हमें हर अनुभव से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। इस शो और खासकर इस किरदार से मुझे यह सिखने को मिला कि हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए। जीवन में चाहे जितनी भी रुकावटें आएं, हर समस्या का हल निकाला जा सकता है। अगर आप कुछ ठान लें, तो उसे हासिल करने की राह जरूर निकलती है। लेकिन एक महत्वपूर्ण बात जो मैंने सीखी, वह यह है कि जहां से आप शुरू करते हैं वह बहुत मायने रखता है। अपने जड़ों को कभी न भूलें। आपके माता-पिता ने आपको जो कुछ भी सिखाया है, वह आपके जीवन का असली आधार है। जब आप कहीं पहुंचने की कोशिश करते हैं, तो यह याद रखें कि आपके लिए असली सफलता वही है जो आपके जड़ों से जुड़ी हो। अगर आप अपने इस मार्गदर्शन को याद रखते हुए जीवन में आगे बढ़ेंगे, तो यह आपको हमेशा सही दिशा देगा।

सवाल- आप किन एक्टर्स और डायरेक्टर्स  के साथ काम करना चाहते हो?
जवाब-
मेरा सपना हमेशा से रहा है कि मैं संजय लीला भंसाली के साथ काम करूं। उनकी फिल्में मुझे बहुत पसंद है। एक मुझे मीरा नायर के साथ काम करने का सपना है क्योंकि उनकी स्टोरी टेलिंग मुझे बहुत पसंद है। अगर मैं एक्टर्स की बात करूं तो शाहरुख खान सर से मिलने का सौभाग्य जरूर मिला है पर अभी तक उनके साथ काम करने को नहीं मिला। मैं चाहता हूं कि एक बार जरूर उनके साथ काम करने का मौका मिले। इनके अलावा सुविंदर सर के साथ काम करना चाहता था और अब मैंने उनके साथ काम किया है। 

सवाल: आखिर में आज  की जनरेशन के लिए आपका एक मैसेज?
जवाब:
जो भी करना है, पूरी शिद्दत से करो। मेहनत इतनी करो कि पूरी कायनात तुम्हारे सपने को पूरा करने में लग जाए।
लेकिन अपने माता-पिता की इज्जत करना मत भूलो। जब उनका फोन आए, तुरंत उठाओ क्योंकि उन्हें सिर्फ आपकी आवाज़ सुननी होती है। वो आपसे प्यार करते हैं।

 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Manisha

Related News