''हर रंग-रूप की अपनी एक कीमत होती है..'' सतरंगी: बदले का खेल का ट्रेलर रिलीज
punjabkesari.in Tuesday, May 12, 2026 - 05:44 PM (IST)
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। ZEE5 ने अपनी नई हिंदी मूल ड्रामा श्रृंखला सतरंगी - बदले का खेल का ट्रेलर जारी कर दिया है, यह कहानी ग्रामीण उत्तर प्रदेश के सामंती माहौल पर आधारित है। इस श्रृंखला में अंशुमान पुष्कर, कुमुद मिश्रा और महवश मुख्य भूमिकाओं में दिखाई देंगे। श्रृंखला का निर्देशन जय बसंतू सिंह ने किया है और इसका निर्माण आरएनडी फिल्म एलएलपी ने किया है। यह श्रृंखला 22 मई 2026 को प्रदर्शित होगी।
'सतरंगी - बदले का खेल' किस बारे में है?
'सतरंगी - बदले का खेल' की कहानी बबलू महतो (अंशुमान पुष्कर) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक लौंडा नाच कलाकार के बेटे के रूप में अपमान और चुप्पी के माहौल में बड़ा होता है। जाति और ताकत से बंटी सामंती व्यवस्था में पले-बढ़े बबलू को जल्दी समझ आ जाता है कि सिर्फ ताकत से नहीं, बल्कि सत्ता के खेल को समझकर ही जिया जा सकता है। बबलू और लल्ली के रूप में दोहरी ज़िंदगी जीते हुए, वह दो बिल्कुल अलग दुनियाओं के बीच अपना रास्ता बनाना शुरू करता है, एक सत्ता की दुनिया, और दूसरी मंच की दुनिया। इसी दौरान वह सिंह और पांडे जैसे दो प्रभावशाली परिवारों के बीच बेहद खतरनाक खेल की नींव रखता है। जो कहानी शुरुआत में बदले की भावना से शुरू होती है, वह धीरे-धीरे सम्मान, अधिकार, बराबरी और सत्ता पर कब्जे की बड़ी लड़ाई में बदल जाती है।
सतरंगी - बदले का खेल को खास बनाने वाली बातें:
ग्रामीण उत्तर प्रदेश की सामंती राजनीति की पृष्ठभूमि पर आधारित एक बहुआयामी और दमदार सत्ता की कहानी
लौंडा नाच को सिर्फ सांस्कृतिक कला नहीं, बल्कि सामाजिक संघर्ष और जीविका के माध्यम के रूप में दिखाया गया है
कहानी का केंद्र एक ऐसा किरदार है, जो बबलू और लल्ली दो अलग पहचान के साथ दोहरी जिंदगी जीता है यह सिर्फ बदले की कहानी नहीं है, बल्कि सम्मान, जाति, नियंत्रण और भावनात्मक संघर्ष जैसे मुद्दों को भी गहराई से दिखाती है।
सतरंगी - बदले का खेल में लौंडा नाच के बारे में
इस कहानी के केंद्र में लौंडा नाच की दुनिया है। यह उत्तर भारत की एक पारंपरिक लोक कला है, जिसमें पुरुष महिलाओं के वेश में सामुदायिक समारोहों और उत्सवों में प्रस्तुति देते हैं। ये कलाकार किसी अलग लैंगिक पहचान को नहीं दर्शाते, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही एक सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाते हैं। श्रृंखला में लौंडा नाच को केवल सांस्कृतिक कला के रूप में नहीं दिखाया गया है, बल्कि इसे पहचान, सम्मान, पुरुषत्व और संघर्ष जैसे विषयों को समझने के माध्यम के रूप में पेश किया गया है। यह कहानी एक ऐसे समाज की झलक दिखाती है, जहां असमानता गहराई से मौजूद है। संवेदनशीलता, मानवीय भावनाओं और गहराई के साथ यह श्रृंखला एक ऐसी दुनिया को सामने लाती है, जिसे बहुत कम दिखाया गया है।
निर्देशक जय बसंतू सिंह ने कहा- मूल रूप से सतरंगी - बदले का खेल एक ऐसे आदमी की कहानी है जो समझता है कि किसी भी व्यवस्था को सिर्फ ताकत से नहीं तोड़ा जा सकता, बल्कि उन्हें तोड़ने के लिए यह सीखना पड़ता है कि उनके अंदर रहकर कैसे काम किया जाए। बबलू की दो पहचानें उसे ऐसी दुनिया तक पहुँच देती हैं, जहाँ वह सामान्य रूप से कभी नहीं पहुँच सकता था, और यही उसके खेल की नींव बन जाती है। यह सीरीज़ बदले की कहानी तो है ही, लेकिन उससे ज्यादा यह सत्ता की कहानी है सत्ता किसके पास है, कौन उसके लिए काम करता है, और कौन उसे नए तरीके से बदलने की हिम्मत करता है।”
बबलू महतो का किरदार निभाने वाले अंशुमान पुष्कर ने कहा- बबलू ऐसा इंसान है जिसे पूरी जिंदगी न देखा गया, न सुना गया और न ही सही तरीके से समझा गया, लेकिन उसकी इस चुप्पी के पीछे दुनिया को समझने की बहुत गहरी समझ छिपी है। उसकी बबलू और लल्ली की दोहरी पहचान उसकी सबसे बड़ी ताकत बन जाती है, क्योंकि वह शक्ति और प्रदर्शन, दोनों तरह की दुनिया में आसानी से रास्ता बनाना सीख लेता है। सतरंगी - बदले का खेल सिर्फ भावनात्मक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक और मनोवैज्ञानिक रूप से भी बहुत गहरी कहानी है, और मैं चाहता हूँ कि दर्शक इसे ZEE5 पर देखें और इस यात्रा को महसूस करें।”
कुमुद मिश्रा ने कहा- “मुझे सतरंगी - बदले का खेल की सबसे खास बात इसकी जटिल दुनिया लगी एक ऐसी दुनिया जहाँ सत्ता कभी सीधी-सादी नहीं होती, रिश्ते अक्सर डर और अहंकार से संचालित होते हैं, और हर खामोशी अपने भीतर एक अर्थ छिपाए रहती है। यह सीरीज़ गहराई से अपनी जड़ों से जुड़ी हुई है, लेकिन इसकी भावनात्मक और राजनीतिक उलझनें हर किसी को को अपने से लगते हैं। यही बहुआयामी अनिश्चितता इस कहानी को वास्तव में बहुत आकर्षक बनाती है।”
महवश ने कहा- “एक ऐसे समाज में रहते हुए, जहाँ कुछ लोगों को अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, यह सीरीज़ सिर्फ बदले की कहानी नहीं है, बल्कि एक ऐसे इंसान की भूख और उस अधिकार की बात करती है जिसके तहत हर व्यक्ति को समाज में बराबर सम्मान मिलना चाहिए। यह मेरे लिए सचमुच बहुत खास है, क्योंकि मुझे न सिर्फ़ एक मज़बूत कहानी का हिस्सा बनने का मौका मिला है, बल्कि आखिरकार उस सिनेमा का भी, जिसके हम हकदार हैं! ऐसा सिनेमा जो भावनात्मक संवेदनशीलता को मज़बूत सामाजिक संदेशों के साथ खूबसूरती से जोड़ता है। दर्शक अक्सर कहते हैं कि इंडस्ट्री में और अच्छे शो होने चाहिए, और मुझे पूरा भरोसा है कि यह शो उन्हें निराश नहीं करेगा। आप ZEE5 के माध्यम से बदले, ड्रामा और मनोरंजन से भरी इस वास्तविक दुनिया में प्रवेश कर सकते हैं।”
