छोटी और मीडियम फिल्मों को लेकर अभी भी ओटीटी प्लेटफॉर्म थोड़ा हिचकिचाते हैं - रणवीर शौरी

punjabkesari.in Monday, Apr 13, 2026 - 02:44 PM (IST)

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। जब हर चेहरा मासूम लगे और हर किरदार पर शक हो, वहीं से शुरू होती है असली मर्डर मिस्ट्री। जी5 पर 10 अप्रैल को रिलीज हुई फिल्म 'एव्रीबॉडी लव्स सोहराब हांडा'  इसी रोमांच को अपने अंदाज़ में पेश करती है। फिल्म में रणवीर शौरी एक अहम भूमिका में नजर आएंगे। फिल्म से जुड़े कई किस्सों को लेकर एक्टर ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...

सवाल: फिल्म रिलीज़ हो चुकी है तो रिस्पांस कैसा  है?
बहुत अच्छा रिस्पांस मिल रहा है अभी तक।  मुझे लगता है कि एक फ्रेशनेस के साथ ये फिल्म आई है क्यूंकि इस वक्त जो माहौल बड़ी एक्शन फिल्मों का चल रहा है एक ऐसी रिलैक्स करने वाली फिल्म आई है जिसमें थोड़ा थ्रिल भी है और थोड़ी हंसी भी है जिसे लोग काफी एन्जॉय भी कर रहे हैं और ये फीलिंग हमारे लिए बहुत अच्छी है क्यूंकि ये फिल्म भी ऐसी है जिसमें दोस्तों ने एक साथ मिलकर काम किया सबने मिलकर ये फिल्म बनाई है।  और रजत कपूर की फ़िल्में  हमेशा ही ख़ास होती हैं।  मैं चाहता हूँ कि ज़्यादा से ज़्यादा लोग देखें इसे।  

सवाल: ओवरआल शूटिंग एक्सपीरियंस कैसा रहा आपका?
बहुत अच्छा रहा क्यूंकि ज़्यादातर कास्ट और क्रू मेमंबर्स मेरे दोस्त थे और सबसे बड़ी बात स्क्रिप्ट बहुत अच्छी थी तो शूटिंग करने में बहुत मज़ा आया। एक - डेढ़ महीने हम सब लोनावला के पास एक लोकेशन पर इक्क्ठे रहे थे।  एक ही लोकेशन पर पूरी फिल्म की शूटिंग थी। और जब हार्डवर्क के साथ ये चीज़ें भी हो तो काम करने में मज़ा आता है।  

सवाल: जिस तरह का कंटेंट आजकल चल रहा है तो  मन में ये शक आया कि क्या ये सही टाइम है फिल्म को रिलीज़ करने का?
नहीं , हम तो बहुत बड़े तालाब में बहुत छोटी मछली हैं।  हमारी फिल्म रिलीज़ हो जाए वही हम सब गनीमत समझते हैंहम बहुत शुक्रगुज़ार हैं कि ऐसी छोटी फिल्म को बनने और रिलीज़ होने का मौका मिला।  

सवाल: आपने फिल्मों और ओटीटी दोनों में काम किया है, तो क्या ओटीटी ने एक्टर्स को ज्यादा क्रिएटिव फ्रीडम दी है?
ओटीटी के आने से बहुत सारी चीज़ें बदली हैं इसे बहुत सारे लोगों को काम का थोड़ा और मौका मिला है और साथ में इंटरनेट के साथ कॉम्पिटिशन भी बढ़ता जाता है।  लेकिन एक चीज़ है कि छोटी और मीडियम फिल्मों को लेकर अभी भी ओटीटी प्लेटफॉर्म थोड़ा हिचकिचाते हैं।  तो ज़ी 5 ने जो हमारी फिल्म को टाइम दिया वही बहुत बड़ी बात है वर्ण छोटी और मीडियम फिल्मों के लिए ये कोई बहुत अच्छा टाइम नहीं है। 

सवाल: फिल्म के किरदार से आपका असली किरदार मेल खाता है या नहीं?
फिल्म में जिस तरह का मेरे किरदार दिखाया गया है वो बहुत अलग है मैं वैसा बिलकुल भी नहीं हूँ।  ये जो किरदार है वो बहुत इंटेलेक्चुअल है , हर चीज़ जो इंटेलेक्चुअल लेंस से ही देखते हैं और मैं वैसा हूँ नहीं मैं ज़्यादा इंट्यूशन इंटिनस वाला आदमी हूँ।  ये किरदार रियेक्ट नहीं करता , कण्ट्रोल में रहते हैं लेकिन मैं रिएक्टिव इंसान हूँ मैं थोड़ा मुंहफट हूँ।  मगर हाँ कुछ कुछ चीज़ें हैं ऐसी जो हमारी मेल खाती है जैसे कि जिस तरह के ख्याल उनके है ज़िंदगी के बारे में वैसे ही मेरे भी हैं। 
 
सवाल: एक एक्टर के तौर पर आपका सबसे चैलेंजिंग फेस कौन सा रहा?
सबसे ज़याद चैलेंजिंग फेस तो वही था मेरी ज़िंदगी का जब मैं 'बिहाइंड द कैमरा' से 'इन फ्रंट ऑफ़ द कैमरा' आया ' ये बात है 1997-98 की।  पहले मैं कैमरा के पीछे काम करता था फिर मैं कैमरा के आगे आया , थिएटर शुरू किया और फिर मैं एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा।  वो जो टाइम था जब मैं कैमरे के पीछे से कैमरे के आगे आया क्यूंकि मैं एक्टर नहीं फिल्म मेकर बनना चाहता था तो वो जो ज़िंदगी ने मोड़ लिया वो थोड़ा मुश्किल था।  अब भी उतार चढ़ाव तो आते ही रहते हैं ज़िंदगी में लेकिन सबसे बढ़ा फेस मेरी ज़िंदगी का वो वही था। 

सवाल: आप फेलियर को कैसे हैंडल करते हैं?
फेलियर और काम ना होना , दोनों को मैं एक ही तरीके से देखता हूँ। जब मेरे पास काम नहीं भी होता तब भी मैं कोशिश करता हूँ कि मैं कैसे अपने काम को इम्प्रूव करूं।   और फेलियर में भी मैं वही देखता हूँ की आगे कुछ और कैसे अच्छा करूँ ।

 


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Content Editor

Mansi

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