द एलायंस में हर हफ्ते दोस्त दुश्मन बन सकता है, हर हफ्ते एलायंस बदलते हैं : कुणाल खेमू
punjabkesari.in Saturday, Jul 04, 2026 - 12:17 PM (IST)
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। अभिनेता, लेखक और निर्देशक कुणाल खेमू अब एक नए अवतार में दर्शकों के सामने हैं। वह पहली बार एक रियलिटी शो को होस्ट करते नजर आ रहे हैं। अमेज़न प्राइम वीडियो का नया रियलिटी शो ‘द एलायंस’ 26 जून से शुरू हो चुका है। इस शो में होस्ट बने कुणाल खेमू ने अपने होस्ट बनने के अनुभव, शो के अनोखे फॉर्मेट, रियलिटी शोज को लेकर अपनी सोच समेत कई पहलुओं को लेकर पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश.
सवाल: कैसा लग रहा है पहली बार किसी रियलिटी शो को होस्ट करके?
कुणाल खेमू: अभी तो सीख रहा हूं। मैंने अभी बस एक-दो एपिसोड ही होस्ट किए हैं लेकिन मजा बहुत आ रहा है। हालांकि यह मेरे लिए बिल्कुल अलग दुनिया है। अगर क्रिकेट की भाषा में कहूं तो जैसे टेस्ट, वनडे और टी-20 एक ही खेल के अलग-अलग फॉर्मेट होते हैं, लेकिन यहां तो मुझे ऐसा लग रहा है कि खेल ही बदल गया है। इसकी ट्रेनिंग अलग है काम करने का तरीका अलग है और पूरी सोच भी अलग है। लेकिन जो एक्साइटमेंट है वो वैसी ही है क्योंकि मैंने पहले कभी ऐसा नहीं किया। मैं भी सीख रहा हूं कि कैमरे के पीछे किस तरह एक रियलिटी शो बनता है। पहली बार कंटेस्टेंट्स के बिल्कुल सामने खड़े होकर उनकी भावनाओं को महसूस करना, उनकी प्रतिक्रियाएं देखना यह सब अपने आप में नया अनुभव है।
मुझे हमेशा से होस्टिंग में दिलचस्पी थी और अब उसे खुद अनुभव करने का मौका मिला है। जब पूरा शो खत्म होगा तब शायद मैं बेहतर तरीके से बता पाऊंगा कि यह सफर कैसा रहा, लेकिन फिलहाल मैं इसे पूरी तरह एंजॉय कर रहा हूं।
सवाल: यह मौका आपको कैसे मिला? आपने तो कभी होस्टिंग करने की बात भी नहीं की थी।
कुणाल खेमू: सच कहूं तो मुझे नहीं लगता कि मैं कभी किसी रियलिटी शो का कंटेस्टेंट भी बन सकता हूं। मैं बहुत ज्यादा देर तक एक जगह बंद रह ही नहीं सकता। मुझे घूमना-फिरना पसंद है। अगर कोई मुझसे कहे कि यहीं बैठे रहो या कहीं मत जाओ, तो मेरे लिए बहुत मुश्किल हो जाएगा।
जब अमेज़न प्राइम वीडियो और बनिजय एशिया मेरे पास यह शो लेकर आए तो मैंने उनसे यही पूछा कि आखिर उन्होंने मुझमें ऐसा क्या देखा कि मैं इस शो को होस्ट कर सकता हूं। तब उन्होंने बहुत अच्छी बात कही। उन्होंने कहा कि आजकल रियलिटी शोज़ बहुत हैं लेकिन वे इस स्पेस में कुछ नया करना चाहते थे। चूंकि यह फॉर्मेट भारत में पहली बार आ रहा है इसलिए उन्हें एक अलग तरह की एनर्जी वाला होस्ट चाहिए था।
मैंने उनसे कहा कि अगर आपको लगता है कि मैं यह कर सकता हूं तो हम सब मिलकर सीखते हैं। वैसे भी यह प्राइम वीडियो का पहला बड़ा नॉन-फिक्शन रियलिटी शो है और इस फॉर्मेट में बनिजय भी पहली बार काम कर रहा है। या तो हम बहुत अच्छा करेंगे या फिर बहुत कुछ सीखेंगे।
सवाल: ‘द एलायंस’ में ऐसा क्या खास है जो इसे दूसरे रियलिटी शोज से अलग बनाता है?
कुणाल खेमू: सबसे पहले मैं इस पर से थोड़ा प्रेशर हटाना चाहूंगा क्योंकि अगर हम कहते हैं कि यह अलग है तो लोग तुरंत पूछते हैं कि इसमें नया क्या है। आखिर यह भी तो एक रियलिटी शो ही है। हां, यह लोगों की भावनाओं, दोस्ती और रिश्तों का शो है, लेकिन इसका पूरा फॉर्मेट अलग है। यहां आप अकेले नहीं आते बल्कि जोड़ी बनाकर आते हैं। यह जोड़ी आपकी दोस्ती की हो सकती है या असली जिंदगी के किसी रिश्ते की। लेकिन घर में प्रवेश करते ही सबसे पहले वही जोड़ियां टूट जाती हैं। इसके बाद आपको नई एलायंस बनानी होती है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि ये एलायंस हर हफ्ते बदलती रहती हैं। यानी जिन लोगों के साथ आज आप खेल रहे हैं, अगले हफ्ते वही आपके विरोधी भी हो सकते हैं। इसके अलावा यहां अलग-अलग तरह के चैलेंज होंगे। इन्हीं चैलेंज के आधार पर आपकी टीम की रैंकिंग तय होगी। जो टीम पहले नंबर पर आएगी, सिर्फ वही सुरक्षित रहेगी। बाकी सभी को सर्वाइव करने के लिए फिर मुकाबला करना पड़ेगा।
एक और खास बात यह है कि यहां एलिमिनेशन दर्शक या होस्ट तय नहीं करेंगे। यह पूरी तरह गेम, एलायंस और खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। सबसे दिलचस्प नियम यह है कि पूरे सीजन में घर के अंदर हमेशा 16 कंटेस्टेंट रहेंगे। अगर कोई बाहर जाता है तो उसी समय उसकी जगह नया कंटेस्टेंट आ जाएगा। यानी प्रतियोगिता कभी आसान नहीं होगी। हर हफ्ते सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वालों में से कुछ लोगों को ‘Ace’ बनने का मौका मिलेगा और आखिर में जो आखिरी Ace होगा वही पूरे शो का विजेता बनेगा।
सवाल: आपको खुद इस पूरे फॉर्मेट को समझने में कितना समय लगा?
कुणाल खेमू: पहली बार जब मुझे पूरा फॉर्मेट बताया गया तो मैं भी थोड़ा कन्फ्यूज हो गया था। स्कूल में कहते थे ना कि लिखोगे तो याद होगा। बिल्कुल वैसा ही हुआ। जब मैंने दो-तीन बार इसे सुना, फिर कंटेस्टेंट्स को समझाया, तब जाकर मुझे खुद भी पूरी तरह समझ आया। कई बार दूसरों को समझाते-समझाते खुद भी चीजें ज्यादा अच्छे से समझ में आती हैं।
सवाल: इस शो में किस तरह के टास्क देखने को मिलेंगे?
कुणाल खेमू: यहां सिर्फ बातचीत या ड्रामा नहीं होगा। यहां फिजिकल चैलेंज भी होंगे, मेंटल चैलेंज भी होंगे और इमोशनल चैलेंज भी। कई टास्क ऐसे होंगे जिनमें आपको अपनी टीम के साथ रणनीति बनानी होगी। आपको तय करना होगा कि किस सदस्य को कौन-सी जिम्मेदारी दी जाए। हर खिलाड़ी की ताकत और कमजोरी का सही इस्तेमाल करना होगा। इसके अलावा बड़े-बड़े स्टंट और फिजिकल टेस्ट भी होंगे, जिनके लिए खास टीम काम कर रही है।
सवाल: यहां सबसे बड़ा खतरा दुश्मन से होगा या दोस्त से?
कुणाल खेमू: दोनों से हो सकता है। क्योंकि यहां रिश्ते हर हफ्ते बदलते हैं। आज जो आपका दोस्त है, कल वह दूसरी एलायंस में जाकर आपका मुकाबला करेगा। कभी आपकी अपनी पसंद की वजह से तो कभी गेम की वजह से आपको उन्हीं लोगों के खिलाफ खेलना पड़ेगा जिनके साथ आप पहले थे।
सवाल: अगर आपको कभी किसी रियलिटी शो में कंटेस्टेंट बनना पड़े तो किसे अपने साथ ले जाना चाहेंगे?
कुणाल खेमू: मैं तो जाऊंगा ही नहीं। मुझे बहुत डर लगता है ऐसे शोज़ से। वह वैसा ही है जैसे कोई कहे कि सोचो तुम्हारी 10 हजार करोड़ की लॉटरी लग गई। मैं ऐसे सपने नहीं देखता। मुझे किसी रियलिटी शो में कंटेस्टेंट बनना ही नहीं है। वहां हर समय कोई न कोई आपको बता रहा होता है कि कब उठना है, क्या करना है, कहां जाना है। मैं ऐसा इंसान नहीं हूं। मुझे आजादी पसंद है।
इसके अलावा 24 घंटे कैमरे आपको रिकॉर्ड कर रहे होते हैं। हर वक्त लोग आपको जज कर रहे होते हैं। जब आप शो से बाहर निकलते हैं तब पता चलता है कि दुनिया ने आपके बारे में क्या-क्या सोचा। यह आसान नहीं है। इसलिए मैं उन लोगों की बहुत इज्जत करता हूं जो ऐसे शो में हिस्सा लेते हैं।
सवाल: होस्ट बनने के बाद रियलिटी शोज को लेकर आपकी कौन-सी गलतफहमी दूर हुई?
कुणाल खेमू: मेरी कोई खास गलतफहमी नहीं थी, लेकिन अब मैं इतना जरूर कह सकता हूं कि इस शो में जो चीजें होती हैं, वे स्क्रिप्टेड नहीं लगतीं। इंसानी स्वभाव बहुत अलग होता है। एक ही परिस्थिति में हर इंसान अलग तरह से प्रतिक्रिया देता है। यही इस शो की सबसे दिलचस्प बात है। कई बार लोगों की सोच, उनकी कमजोरियां, उनकी ताकत और उनका असली व्यक्तित्व सामने आता है। कुछ लोग आपको सरप्राइज करते हैं और कुछ खुद भी अपने बारे में नई चीजें खोज लेते हैं।
सवाल: आपकी आने वाली फिल्म के बारे में भी बताइए।
कुणाल खेमू: मेरी अगली फिल्म ‘वाइब’ है, जिसे मैंने लिखा और डायरेक्ट किया है। इसे हमारी प्रोडक्शन कंपनी ने को-प्रोड्यूस किया है और एमजी के साथ मिलकर अमेज़न इसे प्रस्तुत कर रहा है। फिल्म 18 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इसमें प्रीति जिंटा हैं जिनका मैं बहुत बड़ा फैन हूं। यह एक एक्शन-कॉमेडी फिल्म है और मुझे उम्मीद है कि लोगों को यह काफी पसंद आएगी।
सवाल: एक साथ लेखक, निर्देशक और अभिनेता होना कितना मुश्किल होता है?
कुणाल खेमू: अगर आप हर चीज को प्रेशर मानने लगेंगे तो जरूर मुश्किल लगेगा। लेकिन मैं ऐसा नहीं सोचता। डायरेक्शन अपने आप में एक बड़ा दबाव था। लोग सोचते हैं कि पहली फिल्म कैसी होगी। लेकिन मैंने उसे दबाव की तरह नहीं लिया बल्कि मजे के साथ किया। राइटर, डायरेक्टर और एक्टर की जिम्मेदारियां निभाना मुझे अच्छा लगता है। हां, फिजिकली थकान जरूर होती है क्योंकि एक साथ कई काम करने पड़ते हैं।
सवाल: जब आप खुद अपनी फिल्म डायरेक्ट कर रहे थे और उसमें एक्टिंग भी कर रहे थे, तब कैसे मैनेज करते थे?
कुणाल खेमू: उसका पूरा राज तैयारी में है। हमारी प्री-प्रोडक्शन इतनी मजबूत थी कि शूटिंग शुरू होने से पहले ही हर टेक्नीशियन को पता होता था कि कौन-सा सीन कैसे शूट होगा, ब्लॉकिंग क्या होगी और कैमरा एंगल क्या रहेगा। सेट पर जाकर सिर्फ उसी प्लान को लागू करना होता था। एक्टर होने का फायदा यह भी मिलता है कि सामने वाले कलाकार की परफॉर्मेंस को आप और बेहतर तरीके से महसूस कर पाते हैं।
सवाल: कंटेस्टेंट्स को लेकर आपका कोई पूर्वाग्रह था, जो शो के दौरान बदला?
कुणाल खेमू: नहीं। मैं किसी के बारे में पहले से राय बनाकर नहीं गया था। मैं सभी से बिल्कुल नई सोच के साथ मिला। कुछ लोगों को पहले से जानता था लेकिन इस शो में हर इंसान तनाव, चैलेंज और लगातार बदलते रिश्तों के बीच रहता है। ऐसे माहौल में इंसान की असली ताकत और कमजोरी दोनों सामने आती हैं। मुझे लगता है कि कई बार ऐसे अनुभव आपको खुद अपने बारे में भी बहुत कुछ सिखा देते हैं।
