मेरी वापसी के पीछे बेटी का हाथ, उसकी बातें मुझे मोटिवेट करती हैं: ईशा कोप्पिकर
punjabkesari.in Friday, Aug 29, 2025 - 11:39 AM (IST)

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। 90 के दशक की जानी मानी अदाकारा ईशा कोप्पिकर लंबे समय बाद एक बार फिर अभिनय की दुनिया में कदम रखने जा रही हैं। एक्ट्रेस शॉर्ट फिल्म रॉकेटशिप में मां के किरदार में नजर आएंगी। ये सुभाष घई के प्रतिष्ठित 'व्हिसलिंग वुड्स इंटरनेशनल अकादमी' के फिल्ममेकिंग छात्रों का प्रोजेक्ट है। अपने इस प्रोजेक्ट के बारे में ईशा कोप्पिकर ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश
सवाल: आपने हर जोनर में काम किया है आपके लिए सबसे यादगार पल कौन-सा रहा और ऐसा क्या है जिसे आप बदलना चाहेंगी?
जवाब: मेरी जर्नी बहुत खूबसूरत रही है। मैंने हर अच्छे और बुरे अनुभव से सीखा है। कोई एक यादगार पल नहीं है बहुत सारे हैं कृष्णा कॉटेज, क्या कूल है हम, डॉन, शबरी – हर फिल्म मेरे लिए खास है क्योंकि लोग आज भी उन किरदारों को याद करते हैं। यही मेरे लिए सबसे बड़ा तोहफा है। जहां तक मिस्टेक्स की बात है, मैं उन्हें गलतियां नहीं मानती। भगवान हमें ग्रोथ के लिए मौके देते हैं। गलत फैसले भी मुझे कुछ सिखाते हैं, इसलिए मैं उन्हें मोमेंट ऑफ ग्रोथ कहती हूं।
सवाल: आप अपनी नई शॉर्ट फिल्म Rocketship के बारे में बताइए?
जवाब: Rocketship एक प्यारी सी शॉर्ट फिल्म है, करीब 22-25 मिनट की। इसमें मां और बेटी की खूबसूरत कहानी दिखाई गई है। बेटी अपने पापा को खो चुकी है और मानती है कि वह आसमान का तारा बन गए हैं। वह सोचती है कि उनसे मिलने के लिए उसे एक रॉकेटशिप बनाना होगा। यह कहानी बहुत सच्ची, मासूम और दिल छू लेने वाली है। मैं दिल की सुनकर काम करती हूं और यह कहानी मेरे दिल को छू गई। जब मैंने इस इंडस्ट्री में कदम रखा, तब मेरा कोई गॉडफादर नहीं था। मैं एक बहुत ही साधारण मिडिल क्लास साउथ इंडियन, मंगलोरियन परिवार से आती हूं। हमारे पूरे परिवार में ज़्यादातर लोग डॉक्टर, सीए या इंजीनियर हैं। ऐसे में मैंने जब एक्टिंग को करियर के तौर पर चुना, तो हमारे पास कोई दिशा नहीं थी कि क्या करना है, किससे क्या बात करनी है। मैं बस फ्लो के साथ चलती गई और काम करती रही। लेकिन आज जब पीछे मुड़कर देखती हूं, तो लगता है कि अगर उस वक़्त किसी का थोड़ा सा भी साथ या मार्गदर्शन मिल जाता कोई कहता कि 'यह सही है, यह नहीं करना चाहिए' तो शायद कुछ ऐसे प्रोजेक्ट्स, जो मैं करना चाहती थी या जिनके लिए आज अफसोस होता है कि काश वो कर पाती, वो सब आसान हो जाता।
सवाल: आपने इंडस्ट्री में बहुत बदलाव देखे हैं। आज और उस दौर में क्या फर्क है?
जवाब: तकनीकी तौर पर बहुत बदलाव आया है, लेकिन इमोशन के स्तर पर नहीं। पहले कलाकार हर पहलू में गहराई से जुड़े रहते थे। डायरेक्टर और एक्टर एक परिवार की तरह काम करते थे। गानों की रिकॉर्डिंग से लेकर एक्टिंग तक – सब कुछ ऑर्गेनिक था। आज सब कुछ थोड़ा मैकेनिकल और बिज़नेस-ओरिएंटेड हो गया है। मुझे लगता है वह सोल कहीं खो गई है।
सवाल: आपन 16 साल की उम्र में काम शुरू किया था। फिर फैमिली और बेटी के लिए ब्रेक लिया। उस दौरान प्रोफेशनल लाइफ को मिस किया?
जवाब: मेरी पहली मोहब्बत फिल्में हैं, लेकिन मेरी बेटी रिहाना मेरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। जब वह आई तो सब कुछ उसके इर्द-गिर्द ही घूम गया। आज वह 11 साल की है और वही मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा है। असल में, मेरी वापसी के पीछे भी रिहाना का हाथ है। वह कहती है, मम्मा, आप सबसे सुंदर और टैलेंटेड हैं, आपको फिर से काम करना चाहिए। उसकी यह बातें मुझे मोटिवेट करती हैं।
सवाल: फिल्मों से ब्रेक के दौरान आप और क्या कर रही थीं?
जवाब: मैं हमेशा व्यस्त रही। स्टार्टअप्स में इन्वेस्ट करती हूं, राजनीति में भी सक्रिय हूं –भाजपा ट्रांसपोर्ट सेल की नेशनल वाइस प्रेसिडेंट हूं। इसके अलावा AI और हीलिंग से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हूं। हां, एक्टिंग जरूर मिस करती हूं, लेकिन अब फिर से नए प्रोजेक्ट्स पर विचार कर रही हूं।
सवाल: आपको खल्लास गर्ल, कृष्णा कॉटेज की दिशा या डॉन के किरदारों से पहचानते हैं। किस नाम से पुकारा जाना आपको सबसे ज्यादा अच्छा लगता है?
जवाब: मुझे हर नाम अच्छा लगता है। क्योंकि हर किरदार के लिए मैंने मेहनत की है। लोग अगर किसी भी किरदार को आज भी याद करते हैं तो यही मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी है।