Baby Do Die Do Review: सस्पेंस, एक्शन और इमोशन का स्टाइलिश पैकेज, हुमा कुरैशी ने छोड़ी गहरी छाप

punjabkesari.in Friday, Jul 03, 2026 - 11:31 AM (IST)

फिल्म: बेबी डू डाई डू (Baby Do Die Do)
कलाकार: हुमा कुरैशी (Huma Qureshi), सिकंदर खेर (Sikandar Kher), चंकी पांडे (Chunky Panday), सीमा पाहवा (Seema Pahwa), विद्या मालवड़े (Vidya Malvade), हिमांशु मलिक (Himanshu Malik)
निर्देशक: नचिकेत सामंत (Nachiket Samant)
रेटिंग: 3.5*


Baby Do Die Do: कभी-कभी ऐसी फिल्में आती हैं जो अपने अलग अंदाज़ और अनोखी कहानी की वजह से लंबे समय तक याद रह जाती हैं। 'बेबी डू डाई डू' भी ऐसी ही एक डार्क थ्रिलर है, जो रहस्य, एक्शन, इमोशन और ब्लैक ह्यूमर का शानदार मिश्रण पेश करती है। हुमा कुरैशी और साकिब सलीम के होम प्रोडक्शन में बनी इस फिल्म का निर्देशन नचिकेत सामंत ने किया है। फिल्म आज 3 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। आईए जानते हैं कैसी है फिल्म बेबी डू डाई डू।

कहानी
फिल्म की कहानी जुड़वां बहनों बेबी कर्मारकर और दीदी कर्मारकर के इर्द-गिर्द घूमती है। बचपन में दोनों एक वीरान इमारत में पहुंच जाती हैं, जहां दीदी की बेरहमी से हत्या कर दी जाती है। इस घटना की इकलौती गवाह बेबी होती है, जो सुन और बोल नहीं सकती। वह सिर्फ इतना देख पाती है कि हत्यारे का एक कान नहीं है और वह नकली कान लगाकर अपनी पहचान छिपाता है।

बहन की हत्या के बाद बेबी का पूरा जीवन बदले की आग में गुजरता है। बड़े होने पर वह मुंबई के रियल एस्टेट माफिया के लिए कॉन्ट्रैक्ट किलर बन जाती है। बाहर की दुनिया के लिए वह एक प्रॉपर्टी डीलिंग फर्म में काम करती है, लेकिन असल में उसका बॉस पीएम जैन उर्फ 'पापा' (चंकी पांडे) उसे हत्या के मिशन सौंपता है। बेबी अपनी बंदूक हमेशा छाते में छिपाकर रखती है और एक-एक कर अपने टारगेट खत्म करती रहती है। लेकिन फिर बेबी की जिंदगी में आता है एक ऐसा मोड़ जो पूरी तरह उसकी जिंदगी बदल देता है। कहानी में और क्या अलग और खास है यह जानने के लिए आपको पूरी फिल्म देखनी होगी।

निर्देशन
नचिकेत सामंत ने इस मुश्किल और रिस्की विषय को बेहद स्टाइलिश अंदाज़ में पेश किया है। उन्होंने डार्क थ्रिलर के माहौल को बरकरार रखते हुए कहानी में ऐसा अनोखापन और हल्का-फुल्का कूल ह्यूमर जोड़ा है, जिससे फिल्म कभी बोझिल महसूस नहीं होती। तेज रफ्तार स्क्रीनप्ले, लगातार आने वाले ट्विस्ट और हाई-स्टेक सिचुएशन दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखते हैं। मुंबई का बारिश से भीगा हुआ माहौल, नोयर विजुअल टोन और स्टाइलिश प्रस्तुति फिल्म को अलग पहचान देते हैं। 

अभिनय
हुमा कुरैशी ने बेबी कर्मारकर के किरदार में पूरी ईमानदारी के साथ काम किया है। बिना संवाद बोले उन्होंने चेहरे के हाव-भाव और बॉडी लैंग्वेज के जरिए किरदार के दर्द, गुस्से और दृढ़ता को प्रभावशाली तरीके से पेश किया है। 

रचित सिंह ने अमनदीप सिद्धू के रूप में सादगी और गर्मजोशी से भरा अभिनय किया है। चंकी पांडे पीएम जैन के किरदार में सुखद सरप्राइज साबित होते हैं। एक प्रॉपर्टी डीलर के साथ-साथ गुप्त कॉन्ट्रैक्ट किलिंग नेटवर्क चलाने वाले उनके किरदार में अलग ही रंग देखने को मिलता है। वहीं सिकंदर खेर ने जफर कटकर के रूप में सबसे दमदार अभिनय किया है। 

संगीत और तकनीकी पक्ष
फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर कहानी के सस्पेंस और थ्रिल को प्रभावी बनाता है। मोहित चौहान की आवाज़ में फिल्म का रोमांटिक गीत कहानी के भावनात्मक पक्ष को खूबसूरती से उभारता है। सिनेमैटोग्राफी में बारिश से भीगी मुंबई और नोयर स्टाइल का शानदार इस्तेमाल किया गया है, जो फिल्म के मूड को और गहरा बनाता है।


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Content Editor

Mansi

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