10 साल के करियर में पहली बार बिना ऑडिशन मिला रोल : अंजलि आनंद
punjabkesari.in Sunday, Jul 26, 2026 - 11:36 AM (IST)
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। अंजलि आनंद इन दिनों फिल्म धमाल 4 को लेकर लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं। फिल्म में उनके किरदार को दर्शकों का खूब प्यार मिल रहा है। वहीं, एक्ट्रेस के डांस और कॉमिक टाइमिंग की भी काफी तारीफ हो रही है। धमाल 4 की सफलता के बाद अंजलि आनंद ने फिल्म के बारे में ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...
अंजलि आनंद
सवाल: कुछ फिल्मों की शूटिंग के दौरान ही एहसास हो जाता है कि यह फिल्म दर्शकों को पसंद आएगी। क्या ‘धमाल 4’ की शूटिंग के वक्त भी भरोसा था?
बिल्कुल। जब हम फिल्म की शूटिंग कर रहे थे तभी मुझे महसूस होने लगा था कि यह फिल्म जरूर चलेगी। मैं फिल्मों को एक दर्शक की तरह भी देखती हूं। अगर मुझे खुद किसी सीन को करते हुए और उसे देखते हुए मजा आ रहा है, तो मुझे लगता है कि दर्शकों को भी आएगा। शूटिंग के दौरान हम सभी को अंदाजा हो गया था कि लोगों को यह फिल्म पसंद आएगी और वे इसे खूब एंजॉय करेंगे।
सवाल: आपकी लगातार दो फिल्में 100 करोड़ क्लब में शामिल हो चुकी हैं। क्या अब आपको इसकी अहमियत महसूस हो रही है?
सच कहूं तो यह एहसास मुझे आप लोगों से बात करके हो रहा है। मैं खुद इन चीजों के बारे में ज्यादा सोचती नहीं हूं। मेरे लिए सबसे जरूरी काम करना है। मैं इस तरह की उपलब्धियों का दबाव अपने ऊपर नहीं लेना चाहती।
सवाल: धमाल 4 में आपका सिलेक्शन कैसे हुआ? क्या आपको ऑडिशन देना पड़ा था?
यह मेरे दस साल के करियर का पहला प्रोजेक्ट था, जिसके लिए मुझे ऑडिशन नहीं देना पड़ा। टीम ने मुझसे मुलाकात की और उन्हें लगा कि मैं इस किरदार के लिए बिल्कुल सही हूं। शुरुआत में मुझे बस एक चिंता थी कि मेरा किरदार सिर्फ हल्का-फुल्का न हो। मैं चाहती थी कि उसमें दम हो, ताकि मैं अपनी एक्टिंग का पूरा दायरा दिखा सकूं। जैसे-जैसे शूटिंग आगे बढ़ी, टीम को भी मेरी क्षमता का अंदाजा हुआ। उन्होंने मुझे काफी आजादी दी कि मैं इम्प्रोवाइज कर सकूं। धीरे-धीरे मेरा किरदार और मजबूत होता गया। बाद में उन्होंने मुझे दो गाने भी दिए क्योंकि उन्हें लगा कि मैं डांस भी अच्छे से कर सकती हूं। मेरे लिए यह सब बहुत खुशी और आभार की बात है कि मुझे इतना कुछ करने का मौका मिला।
सवाल: क्या आपने खुद कभी निर्माताओं से कहा कि मुझे भी एक गाना दीजिए?
नहीं, मैंने किसी से कुछ नहीं कहा। मैंने सिर्फ ऊपर वाले यानी यूनिवर्स से कहा था। बाकी प्रोड्यूसर्स ने निर्देशक इंदु जी से कहा कि गाने चाहिए और फिर उन्होंने मुझे मौका दे दिया। मुझे नहीं पता उनकी सोच क्या थी, लेकिन जो भी मिला, मैंने पूरे दिल से स्वीकार किया।
सवाल: क्या आपको लगता है कि सोशल मीडिया पर आपकी मौजूदगी ने भी इसमें मदद की?
उम्मीद तो यही है। मैं हमेशा खुद को तैयार रखती हूं क्योंकि मुझे नहीं पता अगला मौका कब और किस रूप में आएगा। एक अभिनेता का काम खुद को हर तरह के किरदार के लिए तैयार रखना है। मैं कभी यह नहीं कहना चाहती कि मुझे यह नहीं आता या मैं यह नहीं कर सकती। मैं हर अवसर के लिए पूरी तरह तैयार रहना चाहती हूं।
सवाल: ‘धमाल 4’ के सेट पर सबसे ज्यादा इम्प्रोवाइज कौन करता था?
अरशद वारसी सर हमेशा इम्प्रोवाइज करते हैं। वह मौके पर ही शानदार वन-लाइनर्स बोल देते हैं। फिल्म में जब मैं रितेश के ऊपर गिरती हूं और वह कहते हैं पचक गया ये, वह सब उन्होंने वहीं बनाया था। उनकी यही खासियत है कि दर्शक जो सोच भी नहीं रहे होते, वह वही बात बोल देते हैं। उनके साथ काम करना बहुत आसान और मजेदार है। सेट पर कभी तनाव नहीं रहता, हमेशा हंसी-मजाक और अच्छा माहौल बना रहता है।
सवाल: फिल्म की शूटिंग खत्म होने के बाद आज भी किसके साथ सबसे ज्यादा संपर्क बना हुआ है?
सबसे मजेदार बात यह है कि इस फिल्म की एक भी पार्टी नहीं हुई। अब उम्मीद है कि सफलता की पार्टी जरूर होगी। अगर होगी तो शायद मैं फिर गुलाबी साड़ी पहनूंगी। जहां तक दोस्ती की बात है, रितेश देशमुख के साथ आज भी मेरी बातचीत होती रहती है। फिल्म देखने के बाद उन्होंने मुझे फोन करके कहा कि मैंने बहुत अच्छा काम किया है। मैंने भी उन्हें यही कहा। इसके अलावा मैं इंदु जी से बात करती रहती हूं। अशोक जी भी हमेशा बहुत प्यार से मिलते हैं। उनके बेटे मेरे दोस्त हैं, इसलिए वह मेरे लिए परिवार जैसे हैं।
सवाल: बचपन से ही तय था कि एक्टिंग करनी है या फिर बाद में यह फैसला लिया?
मुझे पढ़ाई में कभी खास दिलचस्पी नहीं रही। मेरा पूरा ध्यान हमेशा एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज में रहता था। कभी बास्केटबॉल खेल रही हूं, कभी स्कूल के लिए नाटक लिख रही हूं, कभी उसे डायरेक्ट कर रही हूं या डांस कोरियोग्राफ कर रही हूं। मैं हमेशा क्लासरूम के बाहर किसी न किसी क्रिएटिव काम में लगी रहती थी। टीचर्स भी मुझे करने देते थे क्योंकि उनका काम आसान हो जाता था।
मैंने कभी शीशे के सामने खड़े होकर यह नहीं कहा कि मुझे हीरोइन बनना है, लेकिन मेरे अंदर हमेशा से एक परफॉर्मर था। मुझे हमेशा लगता था कि यही मेरा रास्ता है। यह एहसास मेरे अंदर बचपन से था।
सवाल: टीवी में पहला बड़ा मौका मिलना कितना मुश्किल था?
मेरे लिए यह सफर अपेक्षाकृत आसान रहा। मैं पहले वेडिंग और संगीत की कोरियोग्राफी करती थी और उसी से अपनी कमाई कर रही थी। मैंने बैरी जॉन एक्टिंग स्कूल से ट्रेनिंग पूरी की थी, लेकिन वहां से निकलते ही काम नहीं मिल जाता। इसलिए मैं वापस कोरियोग्राफी करने लगी क्योंकि जिंदगी भी चलानी थी। एक दिन मैं कैफे में बैठी थी, तभी निर्माता संदीप सिकंद ने मुझे देखा। वह मेरे पास आए और पहला सवाल यही पूछा कि, “क्या आप मेरी हीरोइन बनना चाहेंगी?”
ऐसा बहुत कम लोगों के साथ होता है। हालांकि उसके बाद भी मुझे तुरंत काम नहीं मिला। मुझे करीब आठ महीने तक अपनी एक्टिंग साबित करनी पड़ी। आखिर में मायने आपकी मेहनत और आपका हुनर ही रखता है। एक-दो मौके किसी वजह से मिल सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक टिकने के लिए सिर्फ आपका काम ही काम आता है।
सवाल: बन टिक्की के अलावा क्या कोई और प्रोजेक्ट पाइपलाइन में है?
‘बन टिक्की’ पूरी तरह तैयार है। उसके अलावा कुछ फिल्मों और वेब सीरीज को लेकर बातचीत चल रही है। डेट्स पर चर्चा हो रही है, लेकिन फिलहाल मैं उनके बारे में ज्यादा कुछ नहीं बता सकती। इतना जरूर कहूंगी कि फिल्में भी हैं और वेब शोज भी।
