देशभक्ति, संस्कृति और सुरक्षा का संगम: ‘बिहू अटैक’ में दिखेगी असम की असली तस्वीर

punjabkesari.in Wednesday, Jan 14, 2026 - 12:47 PM (IST)

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। प्रोड्यूसर प्रबीर कांता साहा की आने वाली फिल्म ‘बिहू अटैक’ एक सशक्त, संवेदनशील और सामाजिक रूप से प्रासंगिक कहानी को बड़े पर्दे पर लाने जा रही है। असम के सबसे बड़े और पवित्र त्योहार बिहू की पृष्ठभूमि में बनी यह फिल्म असम की ज़मीनी हकीकत, सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों को बेहद प्रभावशाली ढंग से दर्शाती है। यह कहानी देशप्रेम, मानवीय संवेदनाओं और रोमांचक घटनाक्रम का संतुलित मेल पेश करती है।

सिर्फ थ्रिलर नहीं, एक गहरा सामाजिक संदेश
‘बिहू अटैक’ को केवल एक थ्रिलर फिल्म कहना इसकी गहराई को कम आंकना होगा। यह फिल्म उस मजबूत रिश्ते को उजागर करती है, जो किसी क्षेत्र को उसके देश से जोड़ता है। उत्तर-पूर्व भारत में मौजूद सामाजिक और वैचारिक चुनौतियों को सामने रखते हुए, फिल्म यह स्पष्ट संदेश देती है कि शिक्षा, एकता और सामाजिक समावेशन ही उग्रवाद और हिंसा के खिलाफ सबसे सशक्त हथियार हैं।

असम की ज़मीनी सच्चाई को सामने लाती फिल्म
फिल्म में असम की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक ताने-बाने और वहां के लोगों के जज़्बातों को बेहद ईमानदारी से दिखाया गया है। बिहू जैसे पर्व को सिर्फ उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि एक पहचान और भावना के तौर पर पेश किया गया है, जो असम के लोगों को देश की मुख्यधारा से मजबूती से जोड़ता है।

दमदार स्टारकास्ट से सजी ‘बिहू अटैक’
‘बिहू अटैक’ में देव मेनारिया, डेज़ी शाह, अरबाज़ खान और राहुल देव अहम भूमिकाओं में नज़र आएंगे। इनके अलावा रज़ा मुराद, युक्ति कपूर, अमी मिसोबह (अमी नाज़मा सुल्ताना), हितेन तेजवानी, मीर सरवर, डिम्पू बरुआ, कालिंद्री दास, क्रॉसवेल तिमुंग, जीत रायदुत और अमित लेखवानी जैसे कलाकार भी फिल्म को अपनी दमदार मौजूदगी से मजबूती देते हैं।

राज कुंवर की कहानी, जो सोच बदलना चाहता है
फिल्म की कहानी राज कुंवर नाम के एक साहसी और कर्तव्यनिष्ठ कोर्ट मार्शल अधिकारी के इर्द-गिर्द घूमती है, जो असम से ताल्लुक रखता है। राज का मानना है कि बंदूक नहीं, बल्कि शिक्षा और समाज से जुड़ाव ही भटके हुए लोगों को सही राह दिखा सकता है। इसी सोच के साथ वह क्षेत्र में सक्रिय आतंकी संगठनों को मुख्यधारा में लाने की कोशिश करता है और स्थानीय समुदायों के साथ विश्वास की मजबूत डोर बनाता है।

निजी दर्द और देश की जिम्मेदारी के बीच संघर्ष
पत्नी के निधन के बाद अपनी छोटी बेटी दृति के साथ जीवन जी रहे राज कुंवर की दुनिया उस वक्त हिल जाती है, जब खुफिया एजेंसियों को बिहू उत्सव के दौरान एक बड़े आतंकी हमले की सूचना मिलती है। यह हमला देश के रक्षा मंत्री की असम यात्रा से जुड़ा होता है, जिससे हालात और भी गंभीर हो जाते हैं।

बिहू उत्सव के बीच मंडराता खतरा
बिहू जैसे उल्लास और एकता के पर्व के बीच आतंकी हमले की साज़िश फिल्म को जबरदस्त थ्रिल और इमोशनल गहराई देती है। राज कुंवर के सामने अब सिर्फ एक अधिकारी नहीं, बल्कि एक पिता और एक नागरिक के रूप में भी कठिन फैसले लेने की चुनौती होती है।

प्रोड्यूसर प्रबीर कांता साहा की भावनात्मक जुड़ाव
फिल्म को लेकर प्रोड्यूसर प्रबीर कांता साहा कहते हैं, 'बिहू अटैक मेरे दिल के बेहद करीब है। यह सिर्फ़ एक फिल्म नहीं, बल्कि असम की सच्चाई, उसकी संस्कृति और देश के प्रति लोगों के प्रेम का प्रतिबिंब है। इस कहानी के ज़रिये हम यह दिखाना चाहते हैं कि शिक्षा, एकता और इंसानियत डर और हिंसा से कहीं ज़्यादा ताकतवर हैं। यह फिल्म असम की आत्मा और हमारे वीर सुरक्षाबलों को समर्पित है।'

क्षेत्रीय कहानी, राष्ट्रीय भावना से जुड़ाव
मजबूत देशभक्ति भाव, सांस्कृतिक समृद्धि और असरदार कहानी के साथ ‘बिहू अटैक’ एक ऐसा सिनेमाई अनुभव बनने का वादा करती है, जो क्षेत्रीय कहानियों को राष्ट्रीय भावनाओं से जोड़ता है और दर्शकों को सोचने पर मजबूर करता है।

पीकेएस फिल्म प्रोडक्शन हाउस की प्रस्तुति
‘बिहू अटैक’ का निर्माण पीकेएस फिल्म प्रोडक्शन हाउस के बैनर तले किया गया है, जिसके निर्माता प्रबीर कांता साहा हैं। फिल्म का निर्देशन सुज़ाद इक़बाल खान ने किया है। यह फिल्म इस शुक्रवार बड़े पर्दे पर रिलीज़ होकर दर्शकों को एक सशक्त, भावनात्मक और देशभक्ति से भरा सिनेमाई अनुभव देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

 


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Content Editor

Reetu sharma

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