JNU ने 2018 के प्रदर्शन को लेकर आइशी घोष, अन्य छात्रों को नोटिस जारी किया

2021-06-15T13:09:21.49

एजुकेशन डेस्क: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ने जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष आइशी घोष और अन्य छात्रों को 2018 में किये गये उनके एक प्रदर्शन को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जेएनयू ने इस प्रदर्शन को ‘‘अनुशासनहीनता और कदाचार’’ बताया है। 

नोटिस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए घोष ने कहा कि कोविड-19 महामारी के चलते कई प्रशासनिक कार्यालयों के बंद होने के बावजूद विश्वविद्यालय के मुख्य प्रॉक्टर का कार्यालय छात्रों का भयादोहन करने के लिए नियमित रूप से कामकाज करता आ रहा है। घोष को नोटिस 11 जून को जारी कर कहा गया कि वह पांच दिसंबर को बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक में खलल डालने में संलिप्त पाई गई हैं।

विश्वविद्यालय के मुख्य प्रॉक्टर प्रोफेसर रजनीश कुमार मिश्रा ने इस घटनाक्रम की पुष्टि की है। यह पूछे जाने पर कि प्रदर्शन के करीब तीन साल बाद नोटिस क्यों जारी किया गया है, उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने (छात्रों ने) शुल्क वृद्धि के मुद्दे को लेकर लंबे समय तक विश्वविद्यालय घेराव किया था और फिर निरंतर व्यवधान डाला गया। 2020 में महामारी शुरू हुई। लेकिन हमने यह प्रक्रिया अब जाकर शुरू की है। ’’

नोटिस में कहा गया है कि इस तरह की गतिविधि खतरनाक प्रकृति की है। साथ ही, हिंसा की सभी गतिविधि और घेराव, धरना या विश्वविद्यालय के सामान्य अकदामिक एवं प्रशासिक कामकाज को बाधित करने वाली इस तरह की सभी गतिविधि या हिंसा को भड़काने वाली कोई भी गतिविधि विश्विवद्यालय के विधानों के अधिनियम 25 की श्रेणी में आती है।

नोटिस में घोष के प्रदर्शन को ‘‘अनुशासनहीनता और कदाचार ’’ का कृत्य बताते हुए इस बारे में स्पष्टीकरण मांगा गया है कि उनके खिलाफ ‘‘क्यों न अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए?’’ घोष को नोटिस का जवाब देने के लिए 21 जून तक का समय दिया गया है। घोष ने एक फेसबुक पोस्ट में कहा, ‘‘जेएनयू में कई प्रशासनिक कार्यालय महामारी का हवाला देते हुए कामकाज नहीं कर रहे है...परिसर में जल संकट जारी है, छात्रों का टीकाकरण नहीं हो रहा। लेकिन मुख्य प्रॉक्टर का कार्यालय छात्रों का भयादोहन करने और दंडित करने के लिए नियमित रूप से काम कर रहा। ’’


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Content Editor

rajesh kumar

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