गोत्सव द्वादशी पर क्यों पूजी जाती है गाय और बछड़े की जोड़ी? जानें इस परंपरा का धार्मिक महत्व

punjabkesari.in Monday, Nov 02, 2026 - 11:00 AM (IST)

Why Worship Cow And Calf Govatsa Dwadashi : सनातन धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है। धार्मिक मान्याओं के अनुसार, गौ माता में सभी देवी-देवताओं का वास होता है। यही वजह है कि विशेष त्योहारों और शुभ अवसरों पर गाय की पूजा और सेवा करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इन्हीं पावन पर्वों में एक है गोवत्स द्वादशी। इस दिन गाय के साथ उसके बछड़े की पूजा की जाती है। मान्यता है कि ऐसा करने से  परिवार में सुख-समृद्धि आती है और संतान को सुखी और स्वस्थ जीवन का आशीर्वाद मिलता है। गोवत्स द्वादशी का पर्व दीपावली से पहले मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं खासतौर पर गौमाता और बछड़े का पूजन करके अपने परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस दिन गाय और बछड़ेस की एक साथ पूजा करने की परंपरा क्यों शुरू हुई है? तो आइए जानते हैं इस पर्व से जुड़ी खास मान्यताओं के बारे में-

 

Why Worship Cow And Calf Govatsa Dwadashi

गोवत्स द्वादशी पर गाय और बछड़े की पूजा क्यों की जाती है?

हिंदू धर्म में गाय को ममता, दया, सेवा और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। गाय मनुष्य के जीवन में कई तरह से उपयोगी रही है। प्राचीन समय से ही खेती-किसानी और ग्रामीण जीवन में गाय का विशेष योगदान रहा है। इसी कारण गौमाता के प्रति आभार प्रकट करने के लिए उनकी पूजा की जाती है। गोवत्स द्वादशी पर गाय के साथ बछड़े को पूजने के पीछे मां और संतान के प्रेम का भाव भी जुड़ा हुआ है। जिस प्रकार एक मां अपने बच्चे की रक्षा और खुशहाली चाहती है, उसी तरह इस दिन महिलाएं गाय और बछड़े की पूजा करके अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गौमाता की श्रद्धापूर्वक सेवा करने से भगवान श्रीकृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है। भगवान श्रीकृष्ण का गायों और बछड़ों से विशेष लगाव था। इसी वजह से गौसेवा को भक्ति का एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।

Why Worship Cow And Calf Govatsa Dwadashi

गोवत्स द्वादशी का आध्यात्मिक संदेश

गोवत्स द्वादशी केवल गाय और बछड़े की पूजा करने का पर्व नहीं है, बल्कि यह हमें जीवों के प्रति प्रेम, करुणा और जिम्मेदारी का भाव रखने की सीख भी देता है। गाय और उसके बछड़े की एक साथ पूजा करना मां और संतान के अटूट रिश्ते का प्रतीक है। इस दिन गौसेवा करने और पशुओं के प्रति दया दिखाने का संकल्प लेना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सच्चे मन से की गई गौसेवा से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। यही इस पर्व का सबसे सुंदर संदेश है।

Why Worship Cow And Calf Govatsa Dwadashi

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Sarita Thapa

Related News