Janmashtami 2026 : माखन चुराने वाले कान्हा को क्यों भाता है माखन-मिश्री, जानें इस प्रिय भोग का रहस्य

punjabkesari.in Thursday, Sep 03, 2026 - 11:01 AM (IST)

Why Krishna loves Makhan : श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन त्योहार माखन-मिश्री के भोग के बिना अधूरा माना जाता है। भगवान कृष्ण को माखनचोर भी कहा जाता है, क्योंकि बचपन में वो गोपियों के मटकियों से चुराकर माखन खाते थे। हिंदू धर्म में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार पूरे देश में पूरे उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर, 2026 को पड़ रहा है। लेकिन कान्हा जी को माखन- मिश्री का भोग लगाने की परेपरा केवल स्वाद से जुड़ी नहीं हैं, बल्कि इसके पीछे गहराधार्मिक रहस्य छुपा हुआ है। 

Why Krishna loves Makhan

माखन-मिश्री का धार्मिक व आध्यात्मिक रहस्य
दूध से दही बनता है और फिर उसे मथने पर माखन निकलता है। माखन जितना कोमल होता है, ठीक उसी तरह इंसान का दिल भी छल-कपट से दूर और कोमल होना चाहिए। भगवान कृष्ण को यही निष्छल भाव और निस्वार्थ प्रेम प्रिय है। फीके माखन में जब मिश्री मिलाई जाती है, तो वह उसके हर कण में घुलमिल जाती है। यह इस बात का संदेश देती है कि इंसान को समाज में रहकर सभी के साथ प्रेम और मिठास घोलकर रहना चाहिए।

Why Krishna loves Makhan

कान्हा जी क्यों चुराते थे माखन?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, गोकुल में कंस के अत्याचार के कारण लोग सारा दूध, दही और मक्खन मथुरा भेज देते थे। गोकुल के बच्चे पोषण से वंचित रह जाते थे। बाल कृष्ण ने बच्चों को कुपोषण से बचाने और कंस के अत्याचार का विरोध करने के लिए माखन चोरी की यह लीला रची थी। वे चुराया हुआ माखन स्वयं भी खाते थे और अपने ग्वाल-बाल मित्रों में भी बांट देते थे।

आयुर्वेद और सेहत से जुड़ा पहलू
माखन और मिश्री का यह मेल केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी अत्यंत लाभकारी है। भाद्रपद में शरीर में पित्त दोष बढ़ता है। माखन-मिश्री का सेवन शरीर को ठंडक पहुंचाता है और तुरंत ऊर्जा देता है। शुद्ध गाय के दूध का मक्खन और मिश्री बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए बेहद गुणकारी माना गया है।

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Content Editor

Sarita Thapa

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