Vastu Tips : धार्मिक स्थल के पास घर बनाने से पहले वास्तु के इन 3 बातों का रखें खास ख्याल, घर में बनी रहेगी बरकत
punjabkesari.in Sunday, Apr 05, 2026 - 04:04 PM (IST)
Vastu Tips : धार्मिक स्थल जैसे मंदिर, मस्जिद या गुरुद्वारे के पास घर होना आध्यात्मिक रूप से बहुत शांतिदायक लगता है, लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार इसके कुछ कड़े नियम और सिद्धांत हैं। यदि आप किसी मंदिर के समीप निवास करते हैं या वहां घर बनाने की सोच रहे हैं, तो वास्तु की इन 3 विशेष बातों को नजरअंदाज करना आपके परिवार की तरक्की और सुख-शांति में बाधा डाल सकता है। तो आइए जानते हैं वास्तु के अनुसार, मंदिर के निकट घर बनाने के 3 प्रमुख सूत्र क्या है।

मंदिर की छाया का सिद्धांत
वास्तु शास्त्र का सबसे महत्वपूर्ण नियम ध्वज छाया और मंदिर छाया से जुड़ा है। माना जाता है कि मंदिर के शिखर या वहां लगे ध्वज की छाया कभी भी आपके घर पर नहीं पड़नी चाहिए। यदि मंदिर की छाया आपके घर पर सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच पड़ती है, तो यह घर के सदस्यों की प्रगति में रुकावट और मानसिक तनाव का कारण बन सकती है। इसलिए, घर और मंदिर के बीच इतनी दूरी अवश्य रखें कि छाया का स्पर्श न हो।
मुख्य द्वार की दिशा और मुख
मंदिर के ठीक सामने घर का मुख्य द्वार होना वास्तु की दृष्टि से द्वार वेध माना जाता है। आपके घर का मुख्य दरवाजा मंदिर के प्रवेश द्वार के बिल्कुल सामने नहीं होना चाहिए। मंदिर से निकलने वाली ऊर्जा अत्यंत तीव्र और शक्तिशाली होती है। यदि घर का द्वार सीधे मंदिर के सामने होगा, तो वह ऊर्जा सीधे घर में प्रवेश करेगी, जिसे सामान्य गृहस्थ सहन नहीं कर पाते। इससे परिवार में कलह या स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। हमेशा द्वार को थोड़ा दाएं या बाएं खिसकाकर बनाना शुभ होता है।
मंदिर की ऊंचाई और घर का स्तर
वास्तु के अनुसार, आपके घर की ऊंचाई कभी भी पास स्थित मंदिर के शिखर से अधिक नहीं होनी चाहिए। मंदिर को समाज में सर्वोच्च स्थान दिया गया है। यदि आपका घर मंदिर से ऊंचा होता है, तो यह वास्तु दोष उत्पन्न करता है जिससे संचित धन में कमी आने लगती है। यदि मंदिर आपके घर के एकदम सटा हुआ है, तो कोशिश करें कि वह दीवार आपके घर की मुख्य दीवार न हो। मंदिर की दीवार से सटकर Bedroom बनाना वैवाहिक जीवन में नीरसता ला सकता है।

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