Surdas Jayanti 2026 : सूरदास जयंती पर पढ़े उनके प्रसिद्ध दोहे और जानें महत्व

punjabkesari.in Monday, Apr 20, 2026 - 03:30 PM (IST)

Surdas Jayanti 2026 : हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर सूरदास जयंती मनाई जाती है। इस साल सूरदास जयंती 21 अप्रैल 2026, मंगलवार को मनाई जाएगी। सूरदास जी का जन्म रुनकता गांव में एक ब्राह्मण परिवार में 1478 में हुआ था। उनके पिता का नाम उनके पिता का नाम रामदास था। उनकी आंखों की रोशनी को लेकर लोगों ने कई मत बनाएं हुए हैं। एक मत के अनुसार, वो बचपन से ही अंधे थे और वहीं दूसरे मत के हिसाब से कहा जाता है कि वह जन्म से अंधे नहीं थे। लेकिन आंखों की रोशनी न होने के बावजूद भी वह बहुत प्रसद्धि कवि थे। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में अनेक पद और भजन लिखे, जो आज भी लोगों को आध्यात्मिक प्रेरणा देते हैं। तो आइए सूरदास जंयती पर जानते हैं उनके दोहे और महत्व के बारे में- 

Surdas Jayanti 2026

सूरदास जी के दोहे

 “मुखहिं बजावत बेनु धनि यह बृंदावन की रेनु।

नंदकिसोर चरावत गैयां मुखहिं बजावत बेनु।।

मनमोहन को ध्यान धरै जिय अति सुख पावत चैन।

चलत कहां मन बस पुरातन जहां कछु लेन न देनु।।

इहां रहहु जहं जूठन पावहु ब्रज बासनी के ऐनु।

सूरदास ह्यां की सरवरि नहिं कल्प बृच्छ सुरधेनु।।”

“मैं नहीं माखन खायो मैया। मैं नहिं माखन खायो।

ख्याल परै ये सखा सबै मिलि मेरैं मुख लपटायो।।

Surdas Jayanti 2026

देखि तुही छींके पर भाजन ऊंचे धरि लटकायो।

हौं जु कहत नान्हें कर अपने मैं कैसे करि पायो।।

मुख दधि पोंछि बुद्धि इक कीन्हीं दोना पीठि दुरायो।

डारि सांटि मुसुकाइ जशोदा स्यामहिं कंठ लगायो।।

बाल बिनोद मोद मन मोह्यो भक्ति प्राप दिखायो।

सूरदास जसुमति को यह सुख सिव बिरंचि नहिं पायो।।”

सूरदास जयंती का महत्व
हिंद धर्म में सूरदास जयंती का दिन बहुत खास माना जाता है। आंखों की रोशनी न होने के बावजूद भी उन्होनें भगवान कृष्ण को समर्पित भजन एवं गीतों की रचना की थी। वे कृष्ण जी के इतने परम भक्त थे कि उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रीकृष्ण के बाल रूप, उनकी लीलाओं और भक्ति की महिमा का अद्भुत वर्णन किया।

Surdas Jayanti 2026

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Content Editor

Sarita Thapa

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