Summer Charity: भीषण गर्मी में इन चीजों का दान बदल देगा आपका सोया भाग्य, पुण्य के साथ-साथ घर में आएगी सुख-समृद्धि
punjabkesari.in Saturday, Jun 13, 2026 - 11:36 AM (IST)
Summer Charity: सनातन धर्म में दान को सबसे बड़े पुण्य कर्मों में से एक माना गया है। मान्यताओं के अनुसार, मौसम के अनुकूल वस्तुओं का दान करने से न केवल जरूरतमंदों को राहत मिलती है, बल्कि दानकर्ता के जीवन से कई दोष दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का वास होता है। वर्तमान में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच कुछ विशेष वस्तुओं का दान करना शास्त्रों में सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। अगर आप भी इस मौसम के बीतने से पहले पुण्य फल पाना चाहते हैं, तो इन चीजों का दान अवश्य करें:

जल: भीषण गर्मी में जल दान का सर्वाधिक महत्व है। कहा जाता है जो पुण्य सब दानों से, सब तीर्थों के दर्शन से आदि से मिलता है। उसी पुण्य और फल की प्राप्ति केवल जल का दान करने से हो जाती है। प्यासे को पानी पिलाना। सड़क पर यात्रियों के लिए प्याऊ लगवाना या राहगीरों को छाछ, लस्सी, ठंडा पानी और शरबत पिलाना अक्षय पुण्य देता है।
पंखा: धूप से पीड़ित मजदूरों, ब्राह्मणों को हवा कर शीतलता प्रदान करना। हाथ पंखा, बिजली का पंखा, कूलर अथवा ए.सी का दान दानकर्ता को मानसिक शांति और शारीरिक कष्टों से मुक्ति प्रदान करता है।
अन्न: अन्न दान को महादान कहा गया है। गरीबों, संतों या जरूरतमंदों को अन्न का दान करने से पितृ दोष शांत होता है। घर में अन्न-धन की कमी नहीं रहती। भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
वस्त्र: जरूरतमंदों को चटाई और सूती या हल्के कपड़ों का दान करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जीवन में सुख-समृद्धि आती है। पुण्य में वृद्धि होती है।
फल और शर्बत: गर्मी का प्रकोप अधिक होने से फल और शर्बत आदि का दान करना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि इससे पितृ प्रसन्न होकर आशीर्वाद प्रदान करते हैं और दान देने वाले के सारे पाप कट जाते हैं।
गौ धृत: गाय के घी का दान करने वाले मनुष्य को अश्वमेघ यज्ञ का फल मिलता है तथा उसे विष्णुलोक में जगह मिलती है।
कपूर और चंदन: गर्मी के मौसम में कपूर और चंदन को शीतलता प्रदान करने वाले तत्व माना गया है। कपूर वातावरण को शुद्ध करता है तो वहीं चंदन शीतलता प्रदान करता है।

गर्मियों का यह मौसम समाप्त होने से पहले अपनी सामर्थ्य अनुसार इन चीजों का दान जरूर करें। याद रखें, आपका एक छोटा सा प्रयास किसी को बड़ी राहत दे सकता है और आपके जीवन में खुशियों के द्वार खोल सकता है।
यदि लोग गंगा के जल से अपनी प्यास बुझा लेते हैं तो जल कम नहीं हो जाता। इसी प्रकार दान देने से धन कम नहीं होता। अपनी आय का दसवां भाग दान दिया करें। दान सदा प्रसन्नतापूर्वक, शीघ्रतापूर्वक और बिना हिचकिचाहट के दिया करें। मृत्यु के समय तक दान टालते न रहें। प्रतिदिन दान देना चाहिए।
प्रार्थना तो प्रभु धाम के आधे मार्ग तक ले जाती है, उपवास प्रभु के परम धाम के द्वार तक, परंतु दान तो आपको भीतर तक ले जाकर ईश्वर के सम्मुख ही खड़ा कर देता है। दिल खोलकर दान करने से भगवान से मुलाकात का अवसर प्राप्त किया जा सकता है।
प्रत्येक सत्कर्म, भला कर्म दान है। प्यासे को जल पिलाना दान है। दुखी को प्रोत्साहन का एक शब्द कहना दान है। दान-हीन रोगी को औषधि देना दान है। मार्ग पर पड़े कांटे या कांच के टुकड़ों को हटाना दान है। दया भाव रखना, प्रेम भाव रखना भी दान है। अपकारी के अपकार को भूल जाना तथा क्षमा कर देना भी दान है। दुखी व्यक्ति को सांत्वना देना भी दान है।
धन के रूप में दान देना ही केवल दान नहीं है। दुखी लोगों के प्रति सहानुभूति रखना, उनके कल्याण के लिए प्रार्थना करना धन दान से भी बढ़ कर है।

