Sawan Putrada Ekadashi 2026 Vrat Katha: संतानहीनता के दर्द से मुक्ति दिलाता है श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत
punjabkesari.in Sunday, Aug 23, 2026 - 07:56 AM (IST)
Sawan Putrada Ekadashi 2026 Vrat Katha: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का बहुत बड़ा आध्यात्मिक महत्व माना गया है। इनमें से भी श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे 'श्रावण पुत्रदा एकादशी' कहा जाता है, अपना एक विशेष और अत्यंत कल्याणकारी स्थान रखती है। मान्यता है कि जो भी विवाहित जोड़ा संतान सुख से वंचित है या जिसके वंश की प्रगति रुक गई है, यदि वह इस दिन पूर्ण श्रद्धा और नियमों के साथ भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना करता है, तो उसे योग्य संतान की प्राप्ति होती है।
श्रावण पुत्रदा एकादशी का महत्व: धार्मिक दृष्टिकोण से, श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत केवल संतान प्राप्ति के लिए ही नहीं, बल्कि जीवन की समस्त बाधाओं और पापों के नाश के लिए भी रामबाण माना गया है। जो साधक इस दिन श्रद्धापूर्वक भगवान विष्णु की आराधना करते हैं, उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है और उनके घर में कभी सुख-समृद्धि की कमी नहीं होती।
Putrada Ekadashi Vrat Katha: प्राचीन काल में भद्रावती नगरी में सुकेतुमान नाम का राजा अपनी रानी शैव्या के साथ राज्य करता था। वह बड़ा धर्मात्मा राजा था और अपना अधिक समय जप, तप और धर्माचरण में व्यतीत करता था। राजा के द्वारा किया गया तर्पण पितर, देवता और ऋषि इसलिए नहीं लेते थे क्योंकि वह उन्हें ऊष्ण जान पड़ता था। इस सबका कारण राजा के पुत्र का न होना था। राजा हर समय इस बात से चिंतित रहता था कि पुत्र के बिना वह देव ऋण, पितृ ऋण और मनुष्य ऋण से मुक्ति कैसे प्राप्त कर सकता है ?
इसी चिंता से एक दिन राजा बड़ा उदास एवं निराश होकर घोड़े पर बैठकर अकेले ही जंगल में निकल गया। वहां भी पशु-पक्षियों की आवाजों और शोर के कारण राजा के अशांत मन को शान्ति नहीं मिली। अंत में राजा ने कमल पुष्पों से भरे एक सरोवर को देखा, वहां ऋषि-मुनि वेद मंत्रो का उच्चारण कर रहे थे। राजा ने सभी को प्रणाम किया तो विश्वदेव ऋषियों ने राजा की इच्छा पूछी। राजा ने उनसे पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद मांगा। ऋषियों ने राजा को पुत्रदा एकादशी का व्रत करने के लिए कहा।
राजा वापिस राज्य में आया और उसने रानी के साथ पुत्रदा एकादशी का व्रत बड़े भाव से किया। व्रत के प्रभाव से राजा को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, जिससे सभी प्रसन्न हुए और स्वर्ग के पितर भी संतुष्ट हो गए। शास्त्रों के अनुसार पुत्र प्राप्ति की कामना से व्रत करने वाले को पुत्र की प्राप्ति अवश्य होती है।

