Sawan Kanwar Yatra 2026 Dates: कांवड़ यात्रा की तारीखों का हुआ एलान, जानें कब होगा महादेव का जलाभिषेक और क्या हैं इस बार के नियम

punjabkesari.in Tuesday, Jun 09, 2026 - 07:58 AM (IST)

Sawan Kanwar Yatra 2026 Dates: सनातन धर्म में सावन के महीने और कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व है। साल 2026 में शिवभक्तों के लिए यह पावन अवसर जुलाई के अंत में शुरू होने जा रहा है। पंचांग के अनुसार, इस साल सावन माह की शुरुआत 30 जुलाई 2026 से होगी और इसी दिन से पवित्र कांवड़ यात्रा का भी आगाह हो जाएगा।

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महत्वपूर्ण तिथियां और जलाभिषेक का समय
भगवान शिव की भक्ति का यह महापर्व 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 (श्रावण पूर्णिमा) तक चलेगा। कांवड़िए हरिद्वार, गौमुख और गंगोत्री जैसे पावन तीर्थों से गंगा जल भरकर लाते हैं और लंबी पैदल यात्रा तय करते हैं। इस यात्रा का सबसे मुख्य पड़ाव 11 अगस्त 2026 को सावन शिवरात्रि के दिन होगा, जब भक्तजन गंगा जल से शिवलिंग का अभिषेक कर महादेव का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।

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कांवड़ वैसे तो भगवान शिव की पूजा करने का एक साधन है, तपस्या है, किन्तु कांवड़ के कई रूप हैं जैसेः 
सामान्य कांवड़ः
सामान्य कांवड़ को जमीन पर नहीं रखा जाता। सामान्य कांवड़ को ‘पैदल कांवड़’ भी बोलते हैं। सामान्य कांवड़ वाला कांवडिया जहां चाहे वहां विश्राम कर सकता है और विश्राम के दौरान अपनी कांवड को कांवड़ स्टैंड पर रख सकता है। 

खड़ी कांवडः खड़ी कांवड़ अपने नाम के जैसी है, ये कांवड खड़ी रहती है, इसे न तो जमीन पर रख सकते हैं और न ही कांवड स्टैंड पर इसलिए यदि  कांवड़ियों को विश्राम करना है तो उसे अपनी कांवड़ अपने सहयोगी को देनी होगी तथा जब तक कांवड़िया विश्राम करेगा तो उसका सहयोगी उसकी कांवड़ को लेकर खड़ा रहेगा और चलने के अंदाज में हिलता-डुलता रहेगा।
 
दांडी कांवड: दांडी कांवड सबसे कठिन होती है क्योंकि इसमें कांवड़िया गंगा जी से जल लेकर शिवमंदिर तक यात्रा दंड देते हुए करते हैं अर्थात अपने मार्ग की दूरी को अपने शरीर की लंबाई से लेट कर नापते हुए यात्रा पूरी करते हैं। इसमें 1 या 2 माह लग जाते हैं। 

डाक कांवड़ः डाक कांवड़ बिना विश्राम किये लगातार चलने वाली कांवड़ होती है। इसमें कांवड़िया अपनी दूरी तय करने के लिए बिना रूके 24 घंटे के लगभग शिव मंदिर तक पहुंचते हैं। इस दौरान शरीर से उत्सर्जन की क्रियाएं तक वर्जित होती हैं। 

झांकियों वाली कांवड़ः झांकियों वाली कांवड को 10-12 अथवा ज्यादा लोगों की एक टोली बनाकर, ट्रक, जीप अथवा किसी खुली गाड़ी में भगवान भोले नाथ का बड़ा चित्र लगाकर उस पर रोशनियां डालते हुए भगवान शिव को फूलों से सजा कर, तेज-तेज भजनों की ध्वनियों के साथ नाचते गाते हुए लाते हैं।
 
बाईक कांवड़ः बाईक कांवड़ वाले कांवड़िया अपनी बाईक को सजाकर गंगा जल बाईक अथवा कंधे पर लटका कर बाईक से गंगा जी से जल लेकर अपने घरों के पास बने मंदिरों में भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक करते हैं।
 
झूला कांवड़ः झूला कांवड़ झूलती रहती है इसको अगर किसी सहयोगी को दें तो वो सहयोगी इसको झूलाता रहेगा या कांवड स्टैंड पर रखे तब भी कांवड़ को झूलाना पड़ेगा, झूला कांवड़ को अकेले नहीं छोड़ा जा सकता।

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कांवड़ के नियम 
कोई भी कांवड़िया अथवा सहयोगी बिना स्नान के कांवड़ को स्पर्श नहीं कर सकता। 

कांवड़ लाने के दौरान तेल, साबुन, कंघी का प्रयोग निषेध है।

यात्रा के दौरान सभी कांवड़ियों को ‘भोला’ कह कर पुकारा जाता है। महिला को ‘भोली’ के नाम से सम्बोधित किया जाता है तथा बात-बात पर ‘बोल-बम’ का नारा लगाना चाहिये।
 
कांवड़ियों को किसी भी प्रकार का नशा नहीं करना चाहिए। मांस, मदिरा तथा तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए।

किसी भी पेड़-पौधे के नीचे अपनी कांवड़ को नहीं रखना चाहिए।
 
चमड़े से बनी किसी भी वस्तु का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

चलते हुए वाहन पर नहीं बैठना चाहिए। 

कांवड़ियों को चारपाई पर बैठना और लेटना नहीं चाहिए। 

कांवड़ को अपने सिर के ऊपर से लेकर जाना वर्जित है। 

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Content Writer

Niyati Bhandari

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