Sakat Chauth vrat katha 2026: संतान रक्षा के महाव्रत पर पढ़ें, सकट माता की चमत्कारी कथा
punjabkesari.in Monday, Jan 05, 2026 - 02:34 PM (IST)
Sakat Chauth vrat katha 2026: हिंदू पंचांग और शास्त्रों के अनुसार सकट चौथ मातृत्व, संतान सुख और संकट निवारण का अत्यंत प्रभावशाली व्रत माना गया है। वर्ष 2026 में सकट चौथ 6 जनवरी को मनाई जाएगी। यह व्रत विशेष रूप से माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और हर प्रकार के संकट से रक्षा के लिए करती हैं। मान्यता है कि इस दिन सकट माता (विघ्नहर्ता गणेश की माता) की कथा पढ़े बिना व्रत पूर्ण नहीं होता।
Sakat Chauth Vrat 2026: सकट चौथ क्यों मनाई जाती है? जानिए व्रत का महत्व, पूजा विधि और तिल दान का फल

सकट चौथ व्रत का शास्त्रीय महत्व
पुराणों में वर्णन है कि सकट माता संकटों को हरने वाली देवी हैं। यह व्रत कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को किया जाता है। चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण होता है। दूर्वा, तिल, गुड़, सुपारी और दीपक से माता की पूजा की जाती है। शास्त्र कहते हैं— “सकट पूजिता माता, पुत्र भय विनाशिनी”।

सकट चौथ व्रत कथा
प्राचीन काल में एक गांव में कुम्हार रहता था, जिसकी भट्टी आग के बावजूद पात्र नहीं पका पा रही थी। राजपुरोहित की गलत सलाह पर भट्टी को सिद्ध करने के लिए बाल बलि की कुप्रथा शुरू हो गई। एक दिन एक वृद्धा की बारी आई, जिसका केवल एक ही पुत्र था। वही दिन सकट चौथ का पावन पर्व था।
वह वृद्धा सकट माता की अनन्य भक्त थी। उसने अपने पुत्र को सकट की सुपारी और दूर्वा का बीड़ा देकर देवी का स्मरण करने को कहा। स्वयं पूरी रात माता की आराधना करती रही। सकट माता की कृपा से भट्टी एक ही रात में सिद्ध हो गई और न केवल वह बालक, बल्कि पूर्व में बलि दिए गए सभी बच्चे जीवित पाए गए।
इस चमत्कार से सकट माता की महिमा पूरे नगर में फैल गई और तब से यह व्रत संतान रक्षा के प्रतीक के रूप में मनाया जाने लगा।
सकट चौथ व्रत के फल
संतान को अकाल मृत्यु व रोगों से रक्षा, घर में सुख-शांति और समृद्धि, मातृत्व कष्टों से मुक्ति और गणेश कृपा और विघ्नों का नाश
सकट चौथ केवल एक व्रत नहीं, बल्कि मां और संतान के अटूट विश्वास का पर्व है। शास्त्रों के अनुसार श्रद्धा, कथा पाठ और नियमपूर्वक पूजा करने से सकट माता अवश्य कृपा करती हैं।

