जानें, किस तरह माला जाप करने से मिलता है उसका फल
punjabkesari.in Sunday, May 05, 2019 - 04:24 PM (IST)
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आज के समय में हर एक व्यक्ति को धर्म और कर्म दोनों को साथ में लेकर चलना पड़ता है। हमारे कर्मों के साथ-साथ इस संसार में कुछ प्राकृतिक शक्तियां भी निहित हैं, जिन्हें हम मंत्रों और पूजा के द्वारा प्राप्त करते हैं। कई बार ऐसा होता है कि व्यक्ति अपने जीवन में बहुत ही पूजा-पाठ करता है, लेकिन उसे उसका फल नहीं मिल पाता। शास्त्रों में इसके बारे में कहा गया है कि जो लोग सही ढंग से पूजा या मंत्रों का जाप नहीं करते तो उन्हें उसका उचित फल प्राप्त नहीं होता है और साथ ही कुछ न कुछ अनिष्ठ जरूर होता है। तो आइए जानते हैं मंत्र जाप करते समय हमें किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए।

हर व्यक्ति भगवान से किसी न किसी चीज़ के प्रार्थना करता है जैसे किसी को धन चाहिए तो किसी को सुख। तो इसके लिए उसे जो मंत्र मिलता है वह उसका जाप बिना कुछ सोचे करना शुरू कर देता है। लेकिन व्यक्ति को इस बात काध्यान हमेशा रखना चाहिए कि जो मंत्र गुरु द्वारा दिया गया हो केवल उसी का जाप करना चाहिए और किसी भी माला से कोई भी मंत्र न जपे वरना उसके परिणाम उलट हो होते हैं।

कई बार व्यक्ति को जो जाप माला पंसद आए वह वही खरीद लेता है और जाप करना शुरू कर देता है, जोकि बिल्कुल भी सही नहीं होता है। शास्त्रों में बताया गया है कि माला पर जाप करने से पहले उसकी पूजा होती है और फिर जाप होता है। आमतौर पर हर एक माला में 108 मनके ही होते हैं। एक बात का ध्यान हमेशा रखना चाहिए कि माला नीले या काले धागे में नहीं होनी चाहिए। जाप करने के लिए एक साफ आसन पर जोकि केवल लाल या सफ़ेद होना चाहिए और जप करते समय आपका मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। जाप करते समय माला के ऊपर सुमेरु को कभी क्रास नहीं करना चाहिए। सुमेरु के पास जाते ही दुबारा आपको वापिस होना चाहिए।
जाप करते समय हमेशा माला की संख्या निश्चित होनी चाहिए। आप पहले दिन जितनी भी संख्या में माला जाप करें, ध्यान रहें कि हर रोज़ उसी संख्या में जाप होना अनिवार्य हो जाता है। अगर आप रोज़ इसी संख्या में जाप नहीं करेंगे तो इससे आपको दोष लगता है और इसके साथ-साथ आपके गुरु को भी जिसने आपको माला जाप और मंत्र दिया होता है।

जब माला जाप कर लें, तो उसके बाद आप हाथ में जल और अक्षत लें और अपने इष्टदेव या अपने गुरुदेव का ध्यान कर मन ही मन संकल्प करें कि मैंने जो भी पूजा की है, यह आपको समर्पित है। इस भाव से जल और अक्षत रख दें तो आपका किया हुआ माला जाप और मंत्र जाप आपको उचित फल देता है।
