Raksha Bandhan story: पाताल लोक से शुरू हुआ भाई-बहन का सबसे पवित्र रिश्ता, मां लक्ष्मी ने असुर को क्यों बनाया अपना भाई?
punjabkesari.in Thursday, Aug 20, 2026 - 10:32 AM (IST)
Raksha Bandhan story: सनातन धर्म में रक्षाबंधन का त्योहार भाई और बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। साल 2026 में इस पावन पर्व को 28 अगस्त, शुक्रवार के दिन श्रद्धापूर्वक मनाया जाएगा। त्योहार के नजदीक आते ही लोगों के मन में अक्सर यह जिज्ञासा जाग उठती है कि आखिर इस पावन पर्व की शुरुआत ऐतिहासिक और पौराणिक रूप से कैसे हुई थी। आपको यह जानकर बेहद आश्चर्य होगा कि राखी बांधने की यह सुंदर परंपरा धरती से नहीं, बल्कि पाताल लोक से आरंभ हुई थी। आइए जानते हैं, श्रीमद्भागवत पुराण में वर्णित रक्षाबंधन की इस सबसे प्राचीन और हृदयस्पर्शी पौराणिक गाथा

देवी लक्ष्मी और राजा बलि की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार असुरों के दानवीर राजा बलि ने 100 यज्ञ पूरे करने का प्रण लिया था। यदि ये पूरे हो जाते तो वह तीनों लोकों का स्वामी बन जाता। इससे घबराकर इंद्र ने भगवान विष्णु से राजा बलि को यज्ञ पूरा करने से रोकने की प्रार्थना की।

भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया और ब्राह्मण वेश धारण कर राजा बलि के यहां जाकर भिक्षा में 3 पग भूमि में स्वर्ग तथा पृथ्वी को नापते हुए तीसरे पग के बदले में राजा बलि को पाताल लोक में बस जाने के लिए कहा। बलि ने भगवान को अपने अतिथि के रूप में साथ चलने को कहा जिससे वह मना नहीं कर सके।

जब लंबे समय तक विष्णु जी अपने धाम नहीं लौटे तो लक्ष्मी जी को चिंता होने लगी। तब नारद मुनी ने उन्हें राजा बलि को अपना भाई बनाने की सलाह दी और उनसे उपहार में विष्णु जी को मांगने को कहा। मां लक्ष्मी ने ऐसा ही किया और इस संबंध को प्रगाढ़ बनाते हुए उन्होंने राजा बलि की कलाई पर राखी या रक्षा सूत्र बांधा।

