Pushkar Shradh story: श्राद्ध के भोजन में साक्षात प्रकट हुए राजा दशरथ! जानिए पुष्कर से जुड़ा भगवान राम और माता सीता का यह अद्भुत प्रसंग

punjabkesari.in Tuesday, Sep 29, 2026 - 03:03 PM (IST)

Dashrath Shradh: धार्मिक एवं पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष में पितरों के प्रति श्रद्धा प्रकट करना अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। शास्त्रों में इस बात का ऐतिहासिक प्रमाण मिलता है कि स्वयं भगवान श्रीरामचंद्र जी ने भी वनवास काल के दौरान अपने पिता राजा दशरथ का श्राद्ध कर्म पूर्ण निष्ठा एवं विधि-विधान से किया था।

Ramayana story shradh: जब दशरथ जी आए श्राद्ध का भोजन खाने... - ramayana  story shradh-mobile

पुष्कर क्षेत्र में आयोजित हुआ था श्राद्ध कर्म
पौराणिक कथा के अनुसार, वनवास काल के दौरान भगवान श्रीरामचंद्र जी, माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ पुष्कर में ठहरे हुए थे। उसी समय राजा दशरथ के स्वर्गवास के पश्चात् श्राद्ध की तिथियां आईं। भगवान राम ने ऋषि-मुनियों और विद्वान ब्राह्मणों को श्राद्ध के लिए आमंत्रित किया। भाई लक्ष्मण जंगल से कंदमूल एकत्र करके लाए और माता सीता ने अत्यंत भाव से भोजन तैयार किया।

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अचानक झाड़ियों के पीछे क्यों चली गईं माता सीता?
जब आमंत्रित ब्राह्मण भोजन करने बैठे, तो भगवान राम और माता सीता उन्हें भोजन परोसने लगे परंतु भोजन परोसते समय अचानक माता सीता भयभीत होकर झाड़ियों में चली गईं। इसके बाद श्रीराम जी ने लक्ष्मण जी की सहायता से ब्राह्मणों को भोजन कराया और उन्हें आदरपूर्वक विदा किया। ब्राह्मणों के जाने के पश्चात् जब माता सीता बाहर आईं, तो भगवान राम ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए उनसे इस व्यवहार का कारण पूछा।

ससुर राजा दशरथ के साक्षात दर्शन और मर्यादा
माता सीता ने हाथ जोड़कर श्रीराम से कहा कि जिन्हें श्राद्ध के लिए आमंत्रित किया गया था, उन ब्राह्मणों के स्थान पर उन्हें अपने पूज्य ससुर राजा दशरथ जी साक्षात दिखाई दे रहे थे। माता सीता ने कहा कि अपने ससुर जी के सम्मुख वे बिना संकोच व लज्जा के कैसे आ सकती थीं, इसीलिए मर्यादा और शर्म के कारण वे झाड़ियों में छिप गई थीं।

श्राद्ध पक्ष में रखी जाने वाली मुख्य सावधानियां
शास्त्रों एवं इस कथा के संदर्भ में श्राद्ध कर्म के दौरान कुछ विशेष नियमों और सावधानियों का पालन करना आवश्यक बताया गया है:
संयम एवं नियम: श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को श्राद्ध पक्ष के दौरान पान खाने, तेल मालिश करने, स्त्री प्रसंग तथा अनावश्यक संग्रह से दूर रहना चाहिए।
ब्रह्मचर्य व सत्य का पालन: श्राद्ध के दिनों में श्राद्धकर्ता और श्राद्ध ग्रहण करने आए ब्राह्मण, दोनों को ही सत्य बोलने और ब्रह्मचर्य का पालन करने का नियम रखना चाहिए।
सीमित आमंत्रण: श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को 3 से अधिक ब्राह्मणों तथा अत्यधिक रिश्तेदारों को नहीं बुलाना चाहिए।
भोक्ता हेतु नियम: श्राद्ध का भोजन ग्रहण करने वाले ब्राह्मण (भोक्ता) को उस दिन पुनः भोजन करने और यात्रा करने से बचना चाहिए।
परिश्रम से बचाव: श्राद्ध का भोजन करने के उपरांत अत्यधिक शारीरिक परिश्रम और प्रतिग्रह (दान लेने) से बचना चाहिए।

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Content Writer

Niyati Bhandari

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