वास्तु गुरु कुलदीप सलूजा: आइये जानें, कैसा है नई संसद के 6 द्वारों का वास्तु

punjabkesari.in Tuesday, Sep 26, 2023 - 07:55 AM (IST)

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New Parliament Building: त्रिकोणाकार बने नए संसद भवन में 6 द्वार बनाये गये हैं। इन द्वारों के नाम हैं, गज द्वार, अश्व द्वार, गरुड़ द्वार, मकर द्वार, शार्दुला द्वार और हंसा द्वार। इन सभी द्वारों का नाम पौराणिक प्राणियों के नाम पर रखा गया है। नए संसद भवन के सभी द्वार पर पौराणिक जानवरों की प्रतिमाएं भी स्थापित की गई हैं, जिनका बड़ा आध्यात्मिक एवं पौराणिक महत्व है। शास्त्रों में यह सब हमारी संस्कृति और ज्ञान के प्रतीक हैं। यह सुख-शांति, समृद्धि के द्योतक भी हैं। भारतीय संस्कृति में उनके महत्व, उनकी सौंदर्य उपस्थिति, सकारात्मक गुणों और वास्तु शास्त्र के अध्ययन के आधार पर अभिभावक मूर्तियों के रूप में स्थापित की गई हैं।

नई संसद के आर्किटेक्ट श्री बिमल पटेल के अनुसार, नए संसद भवन में प्रवेश के लिए छः द्वार बनाये हैं, मध्य पूर्व का द्वार सांसदों के लिए, मध्य उत्तर और मध्य दक्षिण का द्वार पब्लिक के लिए, मध्य पश्चिम का द्वार स्पीकर और वाईस प्रेसिडेंड के लिए रखे गए हैं। वायव्य का द्वार प्राईम मिनिस्टर और प्रेसिडेंड के लिए तथा आग्नेय कोण का द्वार सेरीमोनियल इंट्री के लिए रहेगा।

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विश्व की सभी सभ्यताओं में धार्मिक प्रतीकों के प्रति बहुत आस्था है। आस्था अपनी जगह है, परन्तु वास्तुशास्त्र एक प्राचीन विज्ञान है। वास्तुशास्त्र के अनुसार, विभिन्न दिशाओं पर स्थापित इन द्वारों का प्रभाव इस प्रकार रहेगा-

गरुड़ द्वार ¼Garuda Dwar½ - यह संसद का पूर्वी प्रवेश द्वार है। गरुड़ भगवान विष्णु का वाहन हैं। ये गेट देश के लोगों और प्रशासकों की आकांक्षाओं का प्रतीक है। शास्त्रों में गरुड़ आशा, जीत की महिमा और सफलता का प्रतिनिधित्व करते हैं।
प्रभाव- वास्तुशास्त्र के अनुसार, इस द्वार का उपयोग करने वाले महत्वाकांक्षी होते हैं।

गज द्वार ¼Gaja Dwar½- यह द्वार उत्तर दिशा में है। गज अर्थात् हाथी। हाथी ज्ञान, उन्नति, धन, बुद्धि और स्मृति का प्रतिनिधित्व करता है।
प्रभाव- वास्तुशास्त्र के अनुसार, यहां द्वार होने पर यहां का प्रमुख बुद्धिमान, विनोदी स्वभाव का होता है।

अश्व द्वार ¼Ashwa Dwar½- दक्षिणी प्रवेश द्वार पर सतर्क और तैयार अश्व यानी घोड़ा है। अश्व धैर्य और शक्ति, ताकत और गति का प्रतीक है। शास्त्रों में इसे समृद्धि का प्रतीक माना गया है।
प्रभाव- वास्तुशास्त्र के अनुसार, यहां द्वार होने पर यहां का प्रमुख साहस प्रिय, चंचल, गुस्सैल तथा निडर स्वभाव वाला होता है।

मकर द्वार ¼Makara Dwar½- मकर द्वार पश्चिम दिशा में स्थित है। मकर एक पौराणिक जलीय जीव है। मकर विभिन्न जानवरों के शारीरिक अंगों को जोड़ता है, जो देश के लोगों के बीच विविधता में एकता का प्रतिनिधित्व करता है।
प्रभाव- वास्तुशास्त्र के अनुसार, यहां प्रवेशद्वार हो तो यहां का प्रमुख गंभीर स्वभाव वाला, विचारशील व सहनशील होता है। वह हर काम सावधानी से मन लगाकर करता है।

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हंस द्वार ¼Hamsa Dwar½- यह प्रवेश द्वार वायव्य कोण में स्थित है। शास्त्रों में हंस मां सरस्वती का वाहन है, जोकि शांति और विद्या का प्रतीक है।
प्रभाव- वास्तुशास्त्र के अनुसार, वायव्य कोण का द्वार दुःखदायी, कलहकारी, बैर-भाव, मुकदमेबाजी व बदनामी लाने वाला होता है।

शार्दूल द्वार ¼Shardula Dwar½ - शार्दूल द्वार आग्नेय कोण में स्थित है। शार्दूल एक अन्य पौराणिक जीव के रूप में जाना जाता है, जो सबसे शक्तिशाली, सभी जीवित प्राणियों में अग्रणी कहा जाता है।
प्रभाव- वास्तुशास्त्र के अनुसार, इस द्वार का उपयोग करने वालों के विचारों में मतभेद होने के कारण विवाद होता रहता है।

यह तय है कि इन सभी द्वारों का मिला-जुला प्रभाव हमें नई संसद में होने वाली गतिविधियों में हमेशा देखने को मिलता रहेगा।

वास्तु गुरु कुलदीप सलूजा
thenebula2001@gmail.com

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Content Writer

Niyati Bhandari

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