हर किसी को पढ़नी चाहिए यह कहानी, जो आलोचना और सुधार का फर्क समझाती है
punjabkesari.in Friday, Jun 05, 2026 - 08:00 AM (IST)
Motivational Story : एक प्रसिद्ध चित्रकार ने एक प्रदर्शनी में चित्र रखा और उसके नीचे लिख दिया, “जहां गलती हो, वहां निशान लगा दीजिए। ” चित्रकार को अपनी कला पर पूर्ण विश्वास था। उसने यह नोट इस उद्देश्य से लिखा था कि लोग चित्र को देखकर झूम उठेंगे और उसकी प्रशंसा में जरूर टिप्पणी लिखेंगे। जब अगले दिन चित्रकार चित्र को लेने पहुंचा तो वह यह देखकर हैरान रह गया कि उसका चित्र निशानों से भरा पड़ा था। यह देखकर वह बहुत निराश हो गया और चुपचाप चित्र उठाकर अपने घर चला गया।
उसके एक दोस्त ने निराशा का कारण पूछा तो चित्रकार ने दुखी मन से अपना चित्र दिखा दिया। चित्र देखकर वह बोला, “लोगों की तो आदत होती है अच्छे से अच्छे कार्य में भी दोष ढूंढ निकालना। जिन्होंने आपके चित्र को निशानों से भर दिया है वह केवल दोष ढूंढना जानते हैं, उन्हें सुधारना नहीं। अब आप दूसरा चित्र किसी और जगह रखकर यह लिख दीजिए कि कृप्या इस चित्र के दोष दूर कीजिए।”
चित्रकार ने ऐसा ही किया। अगले दिन जब वह चित्र देखने पहुंचा तो यह देखकर दंग रह गया कि सचमुच चित्र में एक निशान नहीं था। न ही किसी ने दोष ढूंढकर उसे दूर करने की कोशिश की थी, जबकि इस बार चित्रकार ने सचमुच चित्र में जानबुझकर गलती की थी।
यह देखकर वह प्रसन्न मन से लौट आया और दोस्त से बोला, “आप बिल्कुल ठीक कह रहे थे। लोग दोष ढूंढना तो जानते हैं किन्तु उसमें सुधार करना नहीं।”
दोस्त बोला, “बिल्कुल सही कहा आपने, आपका यह चित्र पहले वाले चित्र के मुकाबले कुछ भी नहीं है। दुनिया दोष निकालना तो जानती है लेकिन सुधार करना नहीं। बुराई पर चर्चा सब करते हैं, पर बुराई को दूर करना कोई नहीं चाहता। तभी तो दुनिया में इतनी बुराई है।” चित्रकार दोस्त की बात से सहमत हो गया।
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