Motivational Concept: ‘असम्भव’ को ‘सम्भव’ बनाया जा सकता है

punjabkesari.in Sunday, Apr 03, 2022 - 03:48 PM (IST)

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नादिया कोमानेसी बचपन से ही बहुत चुस्त और जोश से भरपूर थी। उसे उछल-कूद बहुत पसंद थी। उसकी रुचि को देखते हुए 6 साल की उम्र में ही उसका दाखिला जिमनास्टिक्स स्कूल में करा दिया गया। मात्र 8 साल की आयु में उसने अपने जीवन की पहली प्रतियोगिता रोमानिया नैशनल चैंपियनशिप में भाग लिया और वह 13वें स्थान पर रही।
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सन् 1971 में मात्र 10 वर्ष की आयु में उसने पहली अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लिया और अपने जीवन का पहला ऑलराऊंड खिताब जीतकर अपनी टीम को स्वर्ण पदक दिलाया। 13 वर्ष की आयु तक तो नादिया अनेक स्वर्ण पदक अपने नाम कर चुकी थी। हर खिलाड़ी की तरह नादिया भी चाहती थी कि वह ओलिम्पिक्स में पदक जीते।

वह बेसब्री से सन् 1976 में मॉन्ट्रियल ओलिम्पिक्स का इंतजार कर रही थी। इन खेलों में नादिया का इंतजार खत्म ही नहीं हुआ, बल्कि उसने एक ऐसा इतिहास रच दिया जो आज तक अविस्मरणीय है। इन खेलों के दौरान वह केवल 14 साल की थी और उसे वहां सात बार अधिकतम अंक यानी परफैक्ट टैन हासिल हुए। 

यहां नादिया ने तीन स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक जीता। वह मांट्रियल ओलिम्पिक्स की एक ऐसी नायिका बनकर सामने आई, जिसका रिकॉर्ड टूटना भी एक अविस्मरणीय घटना होगी।
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जब वह जिम्नास्टिक्स करती थी तो दर्शक दांतों तले उंगली दबा लेते थे। अधिकतर जिम्नास्ट, नादिया को जिम्नास्टिक्स का चमत्कार मानते थे। 1980 के मास्को ओलिम्पिक्स में पत्रकारों ने नादिया से जिम्नास्टिक्स में उसकी सफलता का राज पूछा तो उसने जवाब दिया कि हमेशा आसान जीवन के लिए प्रार्थना मत करो। एक मजबूत व्यक्ति होने के लिए प्रार्थना करो। तुम पाओगे कि वास्तव में मजबूत हो और असंभव को संभव कर सकते हो।


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Content Writer

Jyoti

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