प्रेरक प्रसंग: पढ़िए गुरु भक्ति की अद्भुत मिसाल

2020-10-18T16:52:41.2

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श्री लाल बहादुर शास्त्री केंद्रीय रेल मंत्री थे। काशी में उन्हें पंडित सम्पूर्णानंद तथा पंडित निष्कामेश्वर मिश्र के श्री चरणों में बैठकर शिक्षा प्राप्त करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। सन् 1963 में उनके गुरुदेव पंडित निष्कामेश्वर जी दिल्ली से रेल द्वारा काशी लौट रहे थे कि गजरौला (मुरादाबाद) रेलवे स्टेशन पर हृदय गति रुक जाने से अचानक उनका निधन हो गया।
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उनके साथ यात्रा कर रहे विख्यात गांधीवादी नेता अलगूराय शास्त्री ने तुरन्त गजरौला से दिल्ली फोन कर लाल बहादुर जी को यह दुखद सूचना दी। वे अपने तमाम कार्यक्रम स्थगित कर गजरौला पहुंचे। अपने जूते रेलवे प्लेटफार्म पर उतारे तथा नंगे पांव उस डिब्बे में चढ़े जिसमें उनके गुरुदेव का शव रखा हुआ था। रेल लखनऊ पहुंची तो दिवंगत गुरु जी के पुत्र राधेकृष्ण मिश्र रेल के डिब्बे में चढऩे लगे। लाल बहादुर जी ने कहा ‘‘कोई भी जूते पहनकर इस डिब्बे में न चढ़े। गुरु जी के शव के रहने के कारण यह डिब्बा मंदिर बन चुका है।’’ 
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शास्त्री जी नंगे पांव व नंगे सिर ही काशी तक शव के साथ गए। शास्त्री जी ने बाद में रेलवे अधिकारियों द्वारा शव को रखने के लिए बर्फ आदि पर खर्च की गई रकम अपनी जेब से अदा की। उनकी इस अनूठी गुरु भक्ति को देखकर काशी के बड़े-बड़े विद्वान हत्प्रभ रह गए।


Jyoti

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