वास्तु गुरु कुलदीप सलूजा: मुकेश अंबानी के 'एंटीलिया' से सीखें, आधुनिक लग्जरी और आयताकार वास्तु का सही तालमेल

punjabkesari.in Tuesday, Aug 25, 2026 - 12:07 PM (IST)

Vastu Tips for Modern Homes: दोस्तों! मुझे वास्तु परामर्श देते हुए 30 से अधिक वर्ष हो गए हैं। इस लंबे अनुभव के दौरान मैंने वास्तु, भवन निर्माण और लोगों के जीवन पर घर की संरचना के प्रभाव से जुड़ी अनेक बातें देखी और समझी हैं। उन्हीं अनुभवों के आधार पर कुछ महत्वपूर्ण बातें मैं आपसे साझा कर रहा हूं। इन बातों को समझने के बाद आप अपने विवेक से निर्णय लें कि आपके लिए केवल सुंदर और आधुनिक घर महत्वपूर्ण है या ऐसा घर, जिसमें सुंदरता के साथ सुख-शांति और सुविधा भी बनी रहे।

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वर्तमान में आधुनिक डिजाइनर घरों का बढ़ता चलन
आज के समय में भव्य और आधुनिक डिजाइनर घरों का चलन तेजी से बढ़ रहा है। लोग अपने घर को यूनिक, स्टाइलिश और आकर्षक बनाने के साथ-साथ उसमें सभी आधुनिक सुख-सुविधाएं भी चाहते हैं। निश्चित रूप से आधुनिक डिजाइनर घर देखने में बहुत सुंदर और प्रभावशाली लगते हैं। वास्तुकला की इस अंधी दौड़ में कई बार हम घर को सुंदर और आकर्षक तो बना लेते हैं, लेकिन उसकी उपयोगिता, सहजता और वास्तु के मूल सिद्धांतों की अनदेखी कर बैठते हैं। मेरा अनुभव है कि घर केवल बाहर से सुंदर दिखाई देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी संरचना ऐसी होनी चाहिए, जिसमें रहने वाले लोगों को शांति, स्वास्थ्य, पारिवारिक सुख और स्थिरता का अनुभव हो।

यदि घर की संरचना वास्तु के सिद्धांतों के अनुकूल नहीं है, तो वास्तु की दृष्टि से कुछ असंतुलन उत्पन्न हो सकते हैं। इसलिए घर बनाते समय केवल डिजाइन और दिखावे पर ध्यान देने के बजाय उसकी संरचना और दिशात्मक संतुलन पर भी ध्यान देना आवश्यक है।

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आधुनिक डिजाइनर घरों में वास्तुदोष के प्रमुख कारण
पारंपरिक और साधारण मकानों की तुलना में आधुनिक डिजाइनर घरों तथा फ्लैट्स में कई बार जटिल संरचनाओं के कारण वास्तु संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं-

अव्यवस्थित संरचना और कट-आउट: आधुनिक डिजाइन को आकर्षक बनाने के लिए कई बार घर के कोने काट दिए जाते हैं। मल्टीस्टोरी बिल्डिंग्स और फ्लैट्स में हवा तथा रोशनी के लिए कुछ हिस्से आगे-पीछे, तिरछे, गोल या असमान आकार में बनाए जाते हैं। ऐसी संरचना यदि वास्तु के मूल सिद्धांतों की अनदेखी करके बनाई जाए, तो घर के दिशात्मक संतुलन पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

दोषपूर्ण बेसमेंट: कई बार आवश्यकता न होने के बावजूद केवल ज्यादा जगह मिल जाये या पार्किंग की सुविधा के लिए बेसमेंट बना दिया जाता है। मेरे अनुभव में बड़ी संख्या में (95 परसेंट) बेसमेंट वास्तु के मूल सिद्धांतों को ध्यान में रखे बिना बनाए जाते हैं, जिसके कारण वहां रहने या उसका उपयोग करने वाले लोगों को विभिन्न प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। बेसमेंट की वास्तु विपरीत बनावट के कारण हिंदुस्तान के 35 परसेंट से ज्यादा प्राइम लोकेशन के माॅल खाली पड़े हैं या बंद हो गये हैं। हालांकि, यदि बेसमेंट वास्तु के अनुरूप और उचित स्थान पर बनाया गया हो, तो बेसमेंट होने से कोई समस्या नहीं आती है, बल्कि इससे बहुत तरक्की होती है।

अनियमित आकार: घर का आकार यदि अनियमित, तिरछा, कटे-बढ़े कोनों वाला या अत्यधिक जटिल हो, तो वास्तु की दृष्टि से असंतुलन उत्पन्न हो सकता है। ऐसे घरों में रहने वाले लोगों को मानसिक तनाव, अस्थिरता या आर्थिक परेशानियों का अनुभव होने की बात अक्सर सामने आती है।

थर्मल स्ट्रेस और वेंटिलेशन की समस्या: आधुनिक इमारतों में टाइल्स, ग्लास और कंक्रीट जैसी सतहों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है। ये सामग्री वातावरण की गर्मी को लंबे समय तक प्रभावित कर सकती हैं। इसके साथ यदि घर में पर्याप्त प्राकृतिक वेंटिलेशन न हो और एयर कंडीशनिंग का अत्यधिक उपयोग किया जाए, तो घर का आंतरिक वातावरण असुविधाजनक हो सकता है। विशेष रूप से ठंड के दिनों में जब ए.सी. बंद रहता है, तब यदि कमरे पूरी तरह बंद हों और ताजी हवा के आने-जाने की उचित व्यवस्था न हो, तो घुटन और असहजता महसूस हो सकती है।

इसलिए आधुनिक घरों में पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी, हवा और वेंटिलेशन का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है। विशेषकर बुजुर्गों और बच्चों के लिए घर का स्वस्थ और आरामदायक वातावरण अधिक महत्वपूर्ण होता है।

वास्तु संबंधी असंतुलन से जुड़ी समस्याएं
आधुनिक घरों में जटिल संरचना और वास्तु के सिद्धांतों की अनदेखी के कारण लोग विभिन्न प्रकार की समस्याओं का अनुभव करने की बात बताते हैं। इनमें प्रमुख हैं-

आर्थिक स्थितिः यदि घर की संरचना में ईशान कोण कट जाए, दब जाए या किसी प्रकार से असंतुलित हो जाए, तो वास्तुशास्त्र के अनुसार इसका आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव माना जाता है। परिवार के मुखिया और बड़े पुत्र की प्रगति में बाधाएं आने, बचत कम होने और आर्थिक दबाव बढ़ने जैसी स्थितियां देखने को मिलती हैं।

पारिवारिक कलह और आपसी विवाद:  घर का वातावरण परिवार के सदस्यों के व्यवहार और मानसिक स्थिति को प्रभावित करता है। वास्तु की दृष्टि से असंतुलित घरों के बारे में अक्सर यह अनुभव साझा किया जाता है कि परिवार में छोटी-छोटी बातों पर मतभेद, तनाव और आपसी विवाद और तलाक बढ़ने लगते हैं।

संतान से संबंधित समस्याएं: बच्चों का पढ़ाई में मन न लगना, अनुशासन की कमी, गलत संगति या व्यसनों की ओर आकर्षित होना जैसी समस्याएं कई परिवारों में देखने को मिलती हैं। वास्तु की मान्यताओं में घर की संरचना को भी इन परिस्थितियों से जोड़कर देखा जाता है। इसी प्रकार कुछ दंपतियों को संतान प्राप्ति से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसीलिए देखने में आता है कि आजकल आई.वी.एफ. सेंटरों का चलन तेजी से बढ़ रहा है।

स्वास्थ्य पर प्रभावः आधुनिक सुविधाओं से भरपूर घर होने के बावजूद यदि घर में पर्याप्त प्राकृतिक हवा, रोशनी, वेंटिलेशन और सहज आवागमन की व्यवस्था न हो, बनावट में वास्तुदोष हो तो रहने वालों को मानसिक तनाव और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए घर को केवल सुंदर और आधुनिक बनाने के बजाय स्वस्थ और आरामदायक बनाना भी उतना ही आवश्यक है।

साधारण आयताकार घरों का महत्व: इसके विपरीत, पुराने समय के साधारण मकानों की बनावट सामान्यतः सरल और आयताकार होती थी। उनमें अनावश्यक कट-आउट और जटिल संरचनाएं कम होती थीं। ऐसे घरों में वास्तु की मूल संरचना को संतुलित रखना अपेक्षाकृत आसान होता है। यही कारण है कि सरल, व्यवस्थित और उपयोगी घर आज भी व्यावहारिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं।
एक यथार्थवादी उदाहरण:  यदि केवल डिजाइनर और भव्य घर बनाने से ही सुख-समृद्धि प्राप्त होती, तो दुनिया के सबसे सफल और समृद्ध लोगों के घरों की संरचना भी अनियमित और अत्यधिक जटिल होनी चाहिए थी।  

उदाहरण के तौर पर मुकेश अंबानी का प्रसिद्ध निवास ‘एंटीलिया’ मुम्बई सबसे ज्यादा डिजाइनर होता। लेकिन मुकेश अंबानी का घर बाहर से भव्य होने के बावजूद बुनियादी तौर पर आयताकार बना है। पूर्व, पश्चिम और दक्षिण दिशा में बिल्डिंग सीधी है, कोई घटाव-बढ़ाव नहीं है। केवल उत्तर दिशा में फ्लोर जिस तरह बालकनी आगे पीछे होती हैं उसी तरह थोड़ा आगे और कहीं से पीछे हैं लेकिन वे भी वास्तु नियमों के अनुसार आयताकार ही हैं। जबकि अंदर से अत्याधुनिक सुविधाएं, शानदार इंटीरियर, रूफटॉप सुविधाएं और हेलिपैड जैसी व्यवस्थाएं हैं।

इससे यह समझने की आवश्यकता है कि आधुनिकता का अर्थ यह नहीं है कि घर की मूल संरचना को अनावश्यक रूप से जटिल बना दिया जाए। बाहर से घर कितना भी भव्य और आधुनिक बनाया जा सकता है, लेकिन अंदर से उसकी मूल संरचना वास्तु अनुकूल रखना अधिक महत्वपूर्ण है।

प्रभु की कृपा से मेरा जीवन भी सरल है और मेरा संयुक्त परिवार सुखद जीवन व्यतीत कर रहा है। मेरा घर, फैक्ट्रियां और अन्य संपत्ती भी मूल रूप से आयताकार संरचना में हैं।

वास्तु निर्माण से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण नियम: घर बनाते समय निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए-
उत्तर और पूर्व की दीवार एकदम सीधी होनी चाहिए जिससे ईशान कोण एकदम 90 डिग्री पर रहे। 
उत्तर ईशान और पूर्व ईशान जरूरत पड़ने पर बढ़ा तो सकते हैं लेकिन घटा बिल्कुल नहीं सकते। 
पूर्व आग्नेय तथा उत्तर वायव्य घटा सकते हैं, लेकिन इन्हें बढ़ा नहीं सकते।
दक्षिण आग्नेय और पश्चिम वायव्य कोण को घटा या बढ़ा सकते हैं,
नैऋत्य कोण बढ़ा नहीं सकते लेकिन घटा सकते हैं।

वास्तु नियमों को ध्यान में रखते हुए घर या फ्लैट्स में हवा, पानी और रोशनी के लिए जितने चाहें डक्ट/ओ.टी.एस. दिए जा सकते हैं।

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बुढ़ापे की चुनौतियां और यथार्थवादी दृष्टिकोण
भव्य और बड़े डिजाइनर घरों की चमक और सुविधा जीवन के एक निश्चित पड़ाव तक बहुत अच्छी लगती है। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ व्यक्ति की आवश्यकताएं बदल जाती हैं।

युवावस्थाः जब शरीर में ऊर्जा और स्वास्थ्य अच्छा होता है, तब बड़ा और शानदार घर स्टेटस सिंबल, सुविधा और आनंद का केंद्र लगता है। बड़े कमरे, बड़ी सीढ़ियां, कई मंजिलें और दूर-दूर बने कमरे भी आकर्षक लगते हैं।

बुढ़ापे की कठिनाइयां: उम्र बढ़ने के साथ इतने बड़े घर का रख-रखाव कठिन हो सकता है। सीढ़ियां चढ़ना, दूर बने कमरों तक जाना और बड़े घर में अकेले रहना शारीरिक तथा मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसलिए घर बनाते समय केवल आज की जरूरतों को नहीं, बल्कि आने वाले समय को भी ध्यान में रखना चाहिए।

शौचालय की सुगमताः एक बहुत महत्वपूर्ण बात है, बेडरूम और शौचालय के बीच की दूरी। जिस समय व्यक्ति स्वयं उठकर शौचालय जाने में असमर्थ होने लगता है, उस समय घर का अत्यधिक बड़ा और फैला हुआ होना परेशानी बन सकता है। इसलिए बेडरूम का आकार और उसकी योजना ऐसी होनी चाहिए कि बुढ़ापे या अस्वस्थता की स्थिति में शौचालय तक पहुंचना आसान रहे।

धन और बड़ी संपत्ति अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन जीवन के उस पड़ाव पर सबसे महत्वपूर्ण चीज सुविधा, स्वास्थ्य और अपनों का साथ होता है।

आधुनिकता और वास्तु का सही तालमेल: डिजाइनर मकान बनाए जा सकते हैं। आधुनिक सुविधाएं भी रखी जा सकती हैं। आवश्यकता केवल इस बात की है कि आधुनिक वास्तुकला और वास्तु के मूल सिद्धांतों के बीच उचित तालमेल बनाया जाए।

मुख्य ढांचाः घर के बाहरी हिस्से में आप शानदार फसाड और मनचाहा आधुनिक डिजाइन दे सकते हैं, लेकिन घर की मूल आंतरिक संरचना को यथासंभव आयताकार या वर्गाकार रखना बेहतर है।

ढलान और स्तरः छत और फर्श के ढलान तथा विभिन्न स्तरों की योजना बनाते समय वास्तु के सिद्धांतों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। सामान्यतः समतल या ईशान की ओर नीचाई और दक्षिण-पश्चिम की ओर ऊंचाई रखने की बात वास्तु में कही जाती है।

कमरे और कोनेः आयताकार या वर्गाकार लेआउट में घर के कोनों को व्यवस्थित रखना आसान होता है।

फ्लैट खरीदते समय विशेष सावधानी- बिल्डर द्वारा बताई गई लग्जरी फ्लैट की एमेनिटीज, जैसे जिम, स्विमिंग पूल, क्लब हाउस, रूफ गार्डन, लिफ्ट और होम थिएटर, इत्यादि देखने से पहले फ्लैट की मूल संरचना और उसकी दिशात्मक स्थिति को समझना चाहिए। क्योंकि फ्लैट खरीदने के बाद उसमें मौजूद वास्तु संबंधी संरचनात्मक समस्याओं को सुधारना कई बार बहुत कठिन, महंगा या व्यावहारिक रूप से असंभव हो जाता है। फ्लैट खरीदते समय केवल इंटीरियर, फर्निशिंग और सुविधाओं को देखकर निर्णय न लें बल्कि पहले यह देखें कि फ्लैट की मूल संरचना वास्तु अनुकूल है या नहीं।

निष्कर्ष: घर में आधुनिक सुविधाएं अवश्य रखें। जिम, होम थिएटर, स्विमिंग पूल, जकूजी, लिफ्ट, रूफ गार्डन, गजेबो और अन्य आधुनिक सुविधाएं। जो घर को आरामदायक और आनंददायक बना सकती हैं लेकिन इन सुविधाओं के साथ घर की मूल संरचना, उपयोगिता, प्राकृतिक हवा-रोशनी और वास्तु के मूल सिद्धांतों का भी ध्यान रखना चाहिए। घर केवल दिखने में सुंदर नहीं होना चाहिए, बल्कि उसमें रहने वाला व्यक्ति जीवन के हर पड़ाव पर सहज, सुरक्षित और सुखी महसूस करे, यही एक अच्छे घर की वास्तविक सफलता है।

आधुनिक डिजाइन और वास्तु एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। आवश्यकता केवल सही संतुलन की है। बाहर से घर कितना भी आधुनिक और भव्य हो सकता है, लेकिन उसकी मूल संरचना जितनी सरल, व्यवस्थित, संतुलित और वास्तुअनुकूल होगी, घर को लंबे समय तक उपयोगी और सुखद बनाए रखना उतना ही आसान होगा। इसलिए घर बनाते समय केवल यह न सोचें कि “मेरा घर कितना सुंदर दिखेगा”, बल्कि यह भी सोचें कि “इस घर में मेरा और मेरे परिवार का जीवन कितना सुखद रहेगा।”

वास्तु गुरु कुलदीप सलूजा
thenebula2001@gmail.com

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Content Writer

Niyati Bhandari

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