महाभारत का सबसे बड़ा रहस्य, जानें कर्ण को मिले 3 श्राप कैसे बने उनकी वीरगति का कारण
punjabkesari.in Monday, Aug 31, 2026 - 01:16 PM (IST)
Mahabharata Secrets : कर्ण महान योद्धा होने के साथ-साथ महान दानवीर भी था। महाभारत के अनुसार उन्हें 3 श्राप मिले थे, जो उनके वीरगति को प्राप्त होने का कारण बने। एक बार कर्ण से भूलवश एक ब्राह्मण की गाय का बछड़ा मारा गया, तो ब्राह्मण ने उन्हें श्राप दिया कि जिस तरह तुमने अनाथ समझकर मेरी गाय के बछड़े को मारा है, एक दिन तुम भी अनाथों की तरह जीवन के खास युद्ध के दौरान मारे जाओगे। कर्ण ने बहुत क्षमा मांगी, लेकिन ब्राह्मण ने उन्हें क्षमा नहीं किया।
एक बार एक बच्ची का घी धरती पर गिर गया तो वह रोने लगी। कर्ण ने कहा कि वह उसे और घी लाकर देगा लेकिन वह कहने लगी कि मेरी मां सौतेली है, यदि उसे पता चल गया तो वह मुझे मारेगी, इसलिए मुझे यही घी चाहिए। कर्ण ने बच्ची से कहा कि तुम रोओ मत, मैं तुम्हें यही घी दे दूंगा।
कर्ण ने मिट्टी को इकट्टा करके जैसे ही निचोड़ा, उसमें से एक महिला के रोने की आवाज आई। उसने कर्ण से कहा, ‘‘मैं धरती माता हूं, तुम्हारे इस तरह करने से हमें बहुत कष्ट हुआ है।’’ क्रोधित होकर धरती मां ने कर्ण को श्राप दिया कि जिस दिन तुम जीवन का महत्वपूर्ण युद्ध लड़ रहे होगे, उस दिन तुम्हारे रथ का पहिया धरती में धंस जाएगा और तुम युद्ध हार जाओगे।
कर्ण ने स्वयं को ब्राह्मण बताकर (झूठ बोलकर) परशुराम जी से युद्ध-विद्या हासिल की थी। एक दिन परशुराम जी कर्ण की जांघ पर सिर रखकर सो गए। कुछ समय बाद कर्ण की जांघ को एक कीड़े ने काटना शुरू कर दिया। गुरु जी की नींद खराब न हो, इसलिए कर्ण ने सारा दर्द सह लिया। जब परशुराम जी की नींद खुली तो उन्होंने खून देखा। वह समझ गए कि कर्ण ब्राह्मण नहीं है।
परशुराम जी ने कर्ण से उसकी जाति पूछी, तो उसने बताया कि मैं ब्राह्मण नहीं, सूत (सारथी) पुत्र हूं। यह सुनकर परशुराम को क्रोध आ गया और उन्होंने कहा, ‘‘तुमने अपने गुरु से पहचान छिपाकर युद्ध-विद्या हासिल की है, इसलिए मैं तुम्हें श्राप देता हूं कि जब तुम अपने जीवन का अहम युद्ध लड़ोगे, उस दिन यह सारी विद्या भूल जाओगे।’’ अंत में ये तीनों श्राप कर्ण-अर्जुन के युद्ध के दौरान पूरे हुए और वह कर्ण वीरगति को प्राप्त हो गया।
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