Maha Shivratri 2026 : महाशिवरात्रि पर जानें 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम और महिमा, मिलेगा अनंत पुण्य फल
punjabkesari.in Sunday, Feb 15, 2026 - 12:28 PM (IST)
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Maha Shivratri 2026: महाशिवरात्रि का पर्व शिव और शक्ति के मिलन का उत्सव है। वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जा रही है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव करोड़ों सूर्यों के समान तेज वाले ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे।
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग Somnath Temple
गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में वेरावल के निकट स्थित सोमनाथ ज्योतिर्लिंग को सबसे पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार चंद्रदेव ने यहां भगवान शिव की आराधना कर उनके आशीर्वाद से श्राप से मुक्ति पाई थी। राजा दक्ष के श्राप से उनकी कांति क्षीण हो गई थी, जिसे शिव कृपा से पुनः प्राप्त किया। चंद्र के नाम ‘सोम’ से ही इस मंदिर का नाम सोमनाथ पड़ा। इतिहास में इस मंदिर को कई बार आक्रमणों का सामना करना पड़ा लेकिन हर बार इसका पुनर्निर्माण हुआ।

मल्लिकार्जुन मंदिर Mallikarjuna Temple
आंध्र प्रदेश के श्रीशैल पर्वत पर स्थित यह दूसरा ज्योतिर्लिंग कृष्णा नदी के तट पर विराजमान है। यहां भगवान शिव और माता पार्वती एक साथ ज्योति रूप में पूजित हैं। मान्यता है कि इस पावन स्थल के दर्शन से अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य फल मिलता है।

महाकालेश्वर Mahakaleshwar Jyotirlinga
मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर तीसरा ज्योतिर्लिंग है। इसकी विशेषता यह है कि यह दक्षिणमुखी है। यहां प्रतिदिन प्रातःकाल भस्म आरती होती है, जो अत्यंत प्रसिद्ध है। समीप स्थित हरसिद्धि मंदिर भी एक प्रमुख शक्तिपीठ है।

ओंकारेश्वर मंदिर Omkareshwar Temple
नर्मदा नदी के बीच स्थित मंधाता द्वीप पर बना ओंकारेश्वर चौथा ज्योतिर्लिंग है। कहा जाता है कि यह स्थान ऊपर से देखने पर ‘ॐ’ के आकार का प्रतीत होता है।

केदारनाथ Kedarnath Temple
उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में स्थित केदारनाथ पांचवां ज्योतिर्लिंग है और चारधाम में भी शामिल है। समुद्र तल से लगभग 3,581 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर सर्दियों में बर्फबारी के कारण बंद रहता है। मान्यता है कि महाभारत काल में भगवान शिव ने यहां पांडवों को बैल रूप में दर्शन दिए थे। आदि शंकराचार्य ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था।

भीमाशंकर Bhimashankar Temple
महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित भीमाशंकर छठा ज्योतिर्लिंग है। इसे मोटेश्वर महादेव भी कहा जाता है। कथा के अनुसार राक्षस भीम का संहार करने के बाद भगवान शिव यहां ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए।

काशी विश्वनाथ Kashi Vishwanath Temple
वाराणसी में स्थित काशी विश्वनाथ सातवां ज्योतिर्लिंग है। यह गंगा तट पर स्थित है और मोक्षदायिनी नगरी काशी की पहचान है। कहा जाता है कि यहां एक बार दर्शन और गंगा स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। महाशिवरात्रि पर यहां भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है।

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग Trimbakeshwar Temple
नासिक के ब्रह्मगिरि पर्वत पर स्थित त्र्यंबकेश्वर आठवां ज्योतिर्लिंग है। यहां ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों की संयुक्त पूजा होती है। ऋषि गौतम की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव यहां ज्योति रूप में प्रकट हुए थे।

वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग Baidyanath Temple
वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग से जुड़ी कथा रावण की तपस्या से संबंधित है। भगवान शिव से वरदान प्राप्त कर रावण शिवलिंग को लंका ले जाना चाहता था लेकिन मार्ग में उसे भूमि पर रख देने से वह वहीं स्थापित हो गया। तब से यह स्थान वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजित है।

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग Nageshwar Jyotirlinga
द्वारका के समीप स्थित यह ज्योतिर्लिंग नागों के देवता के रूप में पूजा जाता है। यह समस्त पापों का नाश करने वाला है।

रामेश्वरम Ramanathaswamy Temple
भगवान श्री राम ने लंका विजय से पहले यहाँ स्वयं पार्थिव शिवलिंग की स्थापना की थी। यह उत्तर और दक्षिण भारत की एकता का प्रतीक है।
घृष्णेश्वर Grishneshwar Temple
महाराष्ट्र के औरंगाबाद के निकट स्थित घृष्णेश्वर द्वादश ज्योतिर्लिंगों में अंतिम है। इसे घुश्मेश्वर भी कहा जाता है। प्रसिद्ध एलोरा गुफाएं इसके पास ही स्थित हैं। मंदिर का पुनर्निर्माण देवी अहिल्याबाई होल्कर ने कराया था।

