June Horoscope 2026: साल 2026 का सबसे बड़ा गोचर, शनि-राहु को छोड़कर सभी बड़े ग्रह बदल रहे हैं राशि, 12 राशियों का भविष्यफल

punjabkesari.in Saturday, May 30, 2026 - 06:51 AM (IST)

June Horoscope 2026: जून का महीना ग्रहों की चाल के लिहाज से बहुत अहम रहने वाला है। 2 जून को इस वर्ष का सबसे बड़ा गोचर होगा और देव गुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में  गोचर करेंगे। इसके बाद 8 जून को शुक्र और 22 जून को बुध भी कर्क राशि में आ जाएंगे यानि जल तत्व की इस राशि में गुरु, बुध और शुक्र का त्रिग्रही योग रहेगा लिहाजा दुनिया भर में जल तत्व से संबंधित मुद्दे जून में भारी रहेंगे। इसी बीच सूर्य 15 जून को मिथुन राशि में आएंगे जबकि मंगल का गोचर 21 जून को वृषभ राशि में होगा। यानि शनि, राहु-केतु को छोड़ कर सभी 6 ग्रह जून में राशि बदलेंगे और इसका सभी लग्नों के जातकों पर व्यापक प्रभाव देखने को मिलेगा।

मेष
मेष लग्न के जातकों का जून में चौथा भाव सक्रिय रहने के कारण घर-परिवार, सुख-सुविधा और मानसिक शांति पर ध्यान केंद्रित करेगा।  भूमि, संपत्ति और वाहन खरीदने के लिए अच्छा समय है। 15 जून के बाद सूर्य का तीसरे भाव में राहु की दृष्टि के अधीन आना झूठे वादे, जल्दबाजी में फैसले, संतान संबंधी तनाव और निवेश या सट्टेबाज़ी में गलत निर्णय का कारण बन सकता है। 21 जून से मंगल का दूसरे भाव में गोचर वाणी में आक्रामकता, पारिवारिक तनाव और आवेगपूर्ण आर्थिक निर्णय ला सकता है।

वृषभ
वृषभ लग्न के जातकों के लिए जून में तीसरा भाव पहले गुरु, शुक्र और बाद में बुध द्वारा सक्रिय होने से संचार, नेटवर्किंग, यात्रा और कौशल विकास को बढ़ावा मिलेगा लेकिन सोच और निर्णय अधिक भावनात्मक हो सकते हैं।15 जून के बाद सूर्य का दूसरे भाव में  गोचर आर्थिक निर्णयों, वाणी और पारिवारिक मामलों में भ्रम पैदा कर सकता है तथा मानसिक शांति और घरेलू सुख में कमी ला सकता है। 21 जून से मंगल का लग्न में गोचर बेचैनी, आक्रामकता और आवेगपूर्ण व्यवहार बढ़ा सकता है।

मिथुन
मिथुन लग्न के जातकों के लिए जून में दूसरा भाव पहले गुरु, शुक्र और बाद में बुध द्वारा सक्रिय होने के कारण आय, बचत, परिवार और वाणी पर ध्यान केंद्रित रहेगा लेकिन आर्थिक निर्णय भावनात्मक हो सकते हैं। 15 जून को सूर्य लग्न में प्रवेश करेगा और राहु की दृष्टि के कारण आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता और जीवन दिशा में भ्रम पैदा हो सकता है लिहाजा इन मामलों में सावधान रहें । 21 जून से मंगल का बारहवें भाव में गोचर खर्च, छिपा तनाव, नींद की समस्या और अचानक आर्थिक नुकसान बढ़ा सकता है।

कर्क
कर्क लग्न के लिए जून में पहले गुरु, शुक्र और बाद में बुध के लग्न में आने से व्यक्तित्व, स्वास्थ्य, आत्म-विकास और जीवन दिशा पर विशेष प्रभाव पड़ेगा। गुरु और शुक्र आत्मविश्वास और अवसरों को बढ़ाएंगे तथा सप्तम भाव पर शुभ दृष्टि के कारण विवाह और साझेदारी के लिए 15 जून के बाद अच्छा समय रहेगा। 21 जून से मंगल का ग्यारहवें भाव में गोचर लाभ, नेटवर्क विस्तार और इच्छाओं की पूर्ति कर सकता है, लेकिन मित्रों और प्रोफेशनल नेटवर्क में विवाद भी संभव हैं लिहाजा यहां सावधानी जरुरी है ।

सिंह
सिंह लग्न के जातकों के लिए जून में गुरु, शुक्र और बाद में बुध का बाहरवें भाव को सक्रिय करना खर्च, एकांत, विदेशी संबंध, हीलिंग और आंतरिक परिवर्तन पर ध्यान केंद्रित करवाएगा।15 जून के बाद सूर्य ग्यारहवें भाव में राहु की दृष्टि के अधीन जाएगा, जिससे मित्रता, नेटवर्किंग और लाभ में भ्रम की स्थिति बन सकती है, साथ ही स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता होगी। 21 जून से मंगल का दशम भाव में गोचर करियर में  प्रगति देगा लेकिन यदि धैर्य से काम न लिया जाए तो विवाद भी उत्पन्न हो सकते हैं।

कन्या
कन्या लग्न के जातकों के लिए जून में कुंडली का ग्याहरवां भाव पहले गुरु और शुक्र और बाद में बुध के द्वारा सक्रिय होने से लाभ, आय, नेटवर्किंग और इच्छाओं की पूर्ति पर ध्यान केंद्रित होगा। यह समय आर्थिक वृद्धि और मित्रों या सामाजिक समूहों से सहयोग के अवसर प्रदान करेगा। 15 जून के बाद सूर्य के दशम भाव में गोचर से करियर में गतिविधि और पहचान तो मिलेगी लेकिन पेशेवर अस्थिरता भी आ सकती है। 21 जून से मंगल का नवम भाव में गोचर विचारधाराओं में मतभेद उत्पन्न कर सकता है।

तुला
तुला लग्न के जातकों के लिए जून में कुंडली का दसवां भाव पहले गुरु, शुक्र और बाद में बुध के प्रभाव से सक्रिय रहने से पेशेवर वृद्धि, पहचान और प्रसिद्धि के अवसर मिलेंगे। 15 जून के बाद नवम भाव में सूर्य विश्वास, मार्गदर्शन, लंबी यात्राओं और निर्णय क्षमता में भ्रम पैदा कर सकता है। 21 जून से मंगल का अष्टम भाव में गोचर अचानक परिवर्तन, छिपा तनाव, संयुक्त वित्तीय मामलों या संबंधों में तीव्रता ला सकता है, जिसके लिए सावधानी से संभालना आवश्यक होगा।

वृश्चिक
वृश्चिक लग्न के जातकों के लिए जून में पहले गुरु, शुक्र और बाद में बुध नवम भाव को सक्रिय करेंगे। जिससे भाग्य, उच्च शिक्षा, यात्रा और विश्वास प्रणाली पर ध्यान केंद्रित होगा। 15 जून के बाद सूर्य के अष्टम भाव में राहु की दृष्टि के अधीन आने से अचानक परिवर्तन, छिपे हुए मामलों और भावनात्मक उतार-चढ़ाव की स्थिति बन सकती है।  21 जून से मंगल का सप्तम भाव में गोचर साझेदारी में तीव्रता, संबंधों में विवाद या आक्रामक व्यवहार ला सकता है लिहाजा रिलेशनशिप में सावधान रहें।

धनु
धनु लग्न के जातकों के लिए जून में पहले गुरु, शुक्र और बाद में बुध के माध्यम से अष्टम भाव सक्रिय होगी, जिससे अचानक परिवर्तन के साथ-साथ आंतरिक बदलाव, ससुराल पक्ष से सहयोग, पैतृक संपत्ति से लाभ और अचानक आर्थिक लाभ के अवसर बन सकते हैं। 15 जून के बाद सातवें भाव से सूर्य का गोचर साझेदारी, व्यापारिक मामलों और संबंधों में भ्रम पैदा कर  सकता है। 21 जून से मंगल का छठे भाव में गोचर प्रतिस्पर्धियों पर विजय पाने, चुनौतियों का सामना करने की शक्ति देगा।

मकर
मकर लग्न के जातकों के लिए जून में पहले गुरु, शुक्र और बाद में बुध के माध्यम से कुंडली का सप्तम भाव सक्रिय रहने से विवाह, साझेदारी, व्यापारिक सहयोग और सार्वजनिक संबंधों पर ध्यान केंद्रित होगा। 15 जून के बाद छठे भाव में सूर्य का गोचर कार्यस्थल पर चुनौतियां, विवाद और स्वास्थ्य संबंधी  परेशानियां पैदा कर सकता है । 21 जून से मंगल का पांचवें भाव में गोचर प्रेम जीवन में तीव्रता, निवेश में आवेगपूर्ण निर्णय या संतान संबंधी तनाव ला सकता है, इसलिए धैर्य से कार्य करना आवश्यक होगा।

कुंभ
कुंभ लग्न के जातकों के लिए जून में पहले गुरु और शुक्र और बाद में बुध के गोचर के द्वारा कुंडली का छठा भाव सक्रिय रहेगा। जिससे कार्यस्थल, स्वास्थ्य, जिम्मेदारियां और दैनिक जीवन पर ध्यान केंद्रित होगा। तीनों ग्रहों की दृष्टि बाहरवें भाव पर रहने के कारण विदेश यात्रा की संभावना भी दिखाई देती है। 15 जून के बाद पांचवें भाव में सूर्य के गोचर से  प्रेम संबंध, निर्णय क्षमता और संतान संबंधी मामलों में भ्रम पैदा कर सकता है। 21 जून से मंगल का चौथे भाव में गोचर पारिवारिक विवाद ला सकता है।

मीन
मीन लगन के जातकों के लिए जून में पहले गुरु, शुक्र और बाद में बुध के प्रभाव से पांचवां भाव सक्रिय होने से यह महीना रोमांस और रचनात्मक विकास के अवसर देगा, साथ ही संतान से जुड़ी शुभ खबर, शेयर बाजार से लाभ दे सकता है। 15 जून के बाद चौथे भाव में सूर्य का गोचर घरेलू मामलों, संपत्ति संबंधी निर्णयों में भ्रम पैदा कर सकता है। 21 जून से मंगल का तीसरे भाव में गोचर साहस को बढ़ाएगा लेकिन जल्दबाजी में बोलना या भाई-बहनों तथा करीबी लोगों से विवाद भी ला सकता है।

-एस्ट्रो वास्तु एक्सपर्ट गौरी जैन

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

Niyati Bhandari

Related News