Jallianwala Bagh: जो शहीद हुए हैं उनकी याद करो कुर्बानी

punjabkesari.in Tuesday, Apr 13, 2021 - 12:42 PM (IST)

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Jallianwala Bagh: अमृतसर स्थित जलियांवाला बाग के ठीक ऊपर एक विमान लगातार चक्कर काट रहा था। शायद यह संकेत था सी.आई.डी. के लोगों के लिए कि वे बाग से हट जाएं। उपस्थित लोगों में घबराहट और बेचैनी की एक हल्की सी लहर दौड़ गई लेकिन तभी स्टेज से जो घोषणा हुई उससे उनमें उत्साह भर गया।

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Jallianwala Bagh massacre: इस अवसर पर गोपी नाथ ने कविता पढ़ी ‘अफसरे आला ने हमको दी हैं धमकियां’। इससे पहले लगभग 10 वक्ता बोल चुके थे। सभी के भाषणों में रौलेट एक्ट की कड़ी निंदा की गई थी।

Why did Jallianwala Bagh massacre happen: इस सभा में पारित पहला प्रस्ताव रौलेट एक्ट के विरुद्ध था और दूसरे में 10 अप्रैल को शहर में शहीद होने वालों के परिवारों से संवेदना जताई गई थी। श्री दुर्गा दास तीसरा प्रस्ताव पेश कर ही रहे थे कि जनरल डायर ने 50 सैनिकों की फोर्स के साथ बाग की संकरी गली से दाखिल होकर 25 सैनिकों को दाईं व 25 सैनिकों को बाईं ओर पोजिशन लेने को कह कर पलक झपकते ही गोली चलाने का हुक्म दे दिया।
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What happened at Jallianwala Bagh in 1919: बिना किसी चेतावनी के गोलियों की बौछार होने लगी तथा निहत्थे निर्दोष लोग जान बचाने के लिए बाग की ऊंची दीवार फांदने की कोशिश करने लगे या बाग में स्थित कुएं में कूद गए।

What were the effects of the Jallianwala Bagh massacre on 13 April 1919: इस कांड में सैंकड़ों लोग शहीद और एक हजार से अधिक घायल हुए। गोलीबारी के बाद आहिस्ता-आहिस्ता अंधेरा छाने लगा, दूर-दूर तक कुछ भी दिखाई नहीं देता था, चारों ओर लाशों के ढेर थे...दर्द से कराहते घायलों का चीत्कार गूंज रहा था। इन महान शहीदों की कुर्बानी ने स्वतंत्रता संग्राम में एक नए जोश और उत्साह का संचार किया।
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Where did Jallianwala Bagh massacre happen: उनकी याद में ही जलियांवाला बाग समारक का निर्माण किया गया है। इस समारक को एक नया रूप दिया गया है लेकिन कोरोना काल में सरकारी पाबंदियों के चलते इसका उद्घाटन समारोह स्थगित कर दिया गया है।

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Content Writer

Niyati Bhandari

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