Hanuman ji life lessons: हनुमान जी से लें अनमोल सीख और जागृत करें अपनी असली शक्ति

punjabkesari.in Tuesday, Apr 28, 2026 - 01:31 PM (IST)

Hanuman ji life lessons: हाल ही में सम्पूर्ण देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई हनुमान जयंती एक बार फिर हमें इस बात का स्मरण कराती है कि हनुमान जी केवल एक पर्व पर याद करने योग्य देवता नहीं, बल्कि एक ऐसे चरित्र हैं जिनके आदर्श हर समय और हर युग में प्रासंगिक रहते हैं। तिथि भले ही बीत गई हो, परन्तु उनके जीवन से मिलने वाली प्रेरणाएं कभी अप्रासंगिक नहीं होतीं।

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यह एक निर्विवाद तथ्य है कि भारत के लोगों के मन में हनुमान जी का चरित्र उनकी ईश्वर-भक्ति, ईश्वर-सेवा और ईश्वर के प्रति वफादारी के कारण बहुत ही प्रसिद्ध है और इसीलिए यहां के अधिकतर घरों में उनकी मूर्ति प्रतिदिन पूजी जाती है और देश के कोने-कोने में भी उनके अनगिनत मंदिर बने हुए हैं।

परंतु यह भी उतना ही सत्य है कि केवल मंदिरों की संख्या बढ़ाने से समाज में हनुमान जी जैसे चरित्र नहीं बनते, उसके लिए उनके आदर्शों को समझना और उन्हें व्यवहार में लाना आवश्यक होता है।

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जन-जन के दिलों में स्थान पाने वाले हनुमान जी की पूजा-अर्चना करना, उनके प्रति हमारी श्रद्धा का एक पहलू है लेकिन उनके चारित्रिक गुणों से प्रेरणा लेना व उनके गुणों को जीवन में आत्मसात करना सर्वथा दूसरा पहलू है। अत: यदि हम खुद को हनुमान जी का सच्चा भक्त मानते हैं, तो हमें ऐसे महान चरित्र के चारित्रिक गुणों के प्रकाश से स्वयं को प्रकाशित करने का प्रयास करना चाहिए।


चैत्र पूर्णिमा के दिन जन्मे हनुमान जी के यूं तो अनेक नाम हैं परन्तु सर्वाधिक प्रचलित ‘हनुमान’ शब्द का अर्थ है - ऐसा व्यक्ति जो मान का हनन करने वाला अर्थात् ‘मैं-पन’ का हनन करने वाला हो। दूसरे शब्दों में कहें तो हनुमान जी वह चेतना है जो अहंकार को समाप्त करके कर्तापन को ईश्वर के चरणों में समर्पित कर देती है।

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पौराणिक कथाकारों के अनुसार ज्ञानसूर्य परमात्मा के ज्ञान, गुण, शक्तियों को अपनी बुद्धि में समाहित करने वाले हनुमान जी अनेक आध्यात्मिक शक्तियों से सुसंपन्न रहे लेकिन अपनी किसी भूल के कारण उन्हें यह शाप मिला कि समय आने पर वह अपनी शक्तियों को भूल जाएंगे और किसी के द्वारा याद दिलाए जाने पर वे शक्तियां जागृत हो उठेंगी।

यह प्रसंग हमें यह भी संकेत देता है कि मनुष्य भी अपनी वास्तविक क्षमताओं को भूल जाता है और फिर उसे किसी सद्गुरु, श्रेष्ठ संग या प्रेरणादायी विचार की आवश्यकता होती है जो उसे उसकी असली शक्ति का बोध करा सके।

अब यह तो हम सब भलीभांति जानते ही हैं कि शाप देने का कार्य कोई श्रेष्ठ व्यक्ति तो कर नहीं सकता, क्यों? क्योंकि शाप या बद्दुआ देने वाली तो माया है अर्थात् पांच विकार। तो इसका अर्थ यह हुआ कि कलियुग के अंत में जब हम सभी आत्माएं माया द्वारा शापित होकर मूर्च्छित हो जाती हैं और अपनी समस्त शक्तियां खो देती हैं, तब सर्वशक्तिमान परमात्मा हमें ज्ञान संजीवनी द्वारा फिर से सुरजीत करते हैं और माया के शाप से हमें सदा के लिए मुक्त कर देते हैं जिसके फलस्वरूप हम अपनी सर्व आध्यात्मिक शक्तियों को पुन: प्राप्त कर लेते हैं।

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कहते हैं कि इष्ट का उज्ज्वल चरित्र ही साधकों के जीवन को इत्र समान खुशबूदार और गुणवान बनाता है। जिस प्रकार संगति का प्रभाव मनुष्य के व्यक्तित्व को गढ़ता है, उसी प्रकार जिस आदर्श को हम अपने जीवन का केंद्र बनाते हैं, वैसा ही हमारा चरित्र भी बनने लगता है।

आत्मा अमर है और उसके द्वारा किए जाने वाले महान चरित्र भी चिरंजीव ही रहते हैं। अत: हमें यह महसूस करना चाहिए कि वर्तमान समय वही युग परिवर्तन की वेला है, जब सर्वशक्तिमान परमात्मा, माया रूपी रावण के चंगुल में फंसी आत्मा रूपी सीताओं की खोज में धरती पर अवतरित हो चुके हैं।

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आज की भाषा में यदि इसे समझें तो यह समय मानवता को भय, भ्रम और भौतिकता की अति से बाहर निकालकर फिर से मूल्यों की ओर लौटाने का समय है। ऐसे समय में हनुमान जी की तरह त्याग, तपस्या और सेवा को जीवन में धारण करके ईश्वरीय सेवा में मददगार बनने वाली आत्माओं का भगवान आह्वान कर रहे हैं।

यह आह्वान किसी विशेष वर्ग के लिए नहीं बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए है जो अपने जीवन को केवल स्वयं तक सीमित न रखकर समाज के कल्याण से जोड़ना चाहता है।

संसार की आत्माएं तो हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नवनिधि की पूर्ति की कामना हेतु स्वार्थवश याद करती हैं परन्तु वर्तमान समय की मांग यह है कि हम समय की नाजुकता को पहचान कर हनुमान जी से याचना करने की बजाय उन जैसे गुणों को धारण करके अनेक याचक आत्माओं की कामना पूर्ति करें और श्री हनुमान जी के गुणों की रोशनी से अपने जीवन-पथ को आलोकित करें, उनके समान ईश्वर प्रेम में रम जाएं और उनके समान ईश्वर समर्पित होकर ईश्वर समान बन जाए।

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Content Writer

Niyati Bhandari

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