महात्मा बुद्ध की ये सीख बदल सकती है आपका जीवन

2019-12-07T10:02:16.317

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
मां अपने बेटे के बारे में कहती है, ''बेटे की उम्र ढल रही है, रिश्ते भी आ रहे हैं लेकिन शादी की चर्चा पर वह खफा हो जाता है, एक नहीं सुनता। ऐसा कहते-कहते उसकी आंखें भर आती हैं। दिन पलटे, शादी हो गई। बहू घर आने के हफ्ते बाद मां उसी तरह फिर रोने लगी। रोते हुए बोली, ''जब देखो बहू जुबान लड़ाती है, खाने-पहनने का ढंग नहीं, किसी का अदब नहीं। ऐसी बहू के आने से हमारी तो किस्मत फूट गई।
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इसके जैसा ही महात्मा बुद्ध के मठ में आए एक नए शिष्य की असंतुष्टि का प्रसंग है। दूसरे ही दिन शिष्य ने मठ में परोसे गए भोजन पर आपत्ति जताई। बुद्ध ने शिकायत सुन कर उसे इशारे से मुद्दे को नजरअंदाज करने की सलाह दी। तीसरे दिन उसका दुखड़ा था कि बिस्तर आरामदायक नहीं है, नींद नहीं आती। चौथे दिन कमरे में साथी के व्यवहार पर खेद जताया। बुद्ध ने कहा, ''4 दिनों में 6 शिकायतें! यहां रहना तुम्हारे बस का नहीं, अपनी राह देख लो।
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मित्र, रिश्तेदार सहकर्मियों में कई ऐसे लोग मिलेंगे जिन्हें पत्नी-पति, संतान, भाई-बहन, माता-पिता हर व्यक्ति से कुछ न कुछ शिकायत रहती है। दरअसल शिकायती मुद्रा में रहना एक लत है। अंत:करण में बवंडर हो तो बाह्य परिस्थितियों, व्यक्तियों और उनके आचरण से खीझ होगी। इसके विपरीत यदि सामने वाले के प्रति सहानुभूति होगी, उसकी बेहतरी का भाव होगा तो मन क्षुब्ध नहीं रहेगा, चित संयत रहेगा। जिसकी रुचि अपने कार्य साधते रहने और परहित में है वह शिकायतें नहीं करेगा, दूसरों में खोट नहीं तलाशेगा। वह जानता है कि कठिनाइयां, चुनौतियां और दुष्कर परिस्थितियां जीवन के अभिन्न अंग हैं। परिपूर्ण परिस्थितियां नहीं मिलेंगी और प्रत्येक मनुष्य में गुण-अवगुण रहते हैं, जिन्हें स्वीकारते हुए हमें कत्र्तव्यनिष्ठ रहना है। 


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