Garud Puran : संयोग नहीं, पिछले जन्मों का फल हैं बेटियां ! गरुड़ पुराण में छिपा है इनके जन्म का गहरा रहस्य
punjabkesari.in Monday, Jan 19, 2026 - 03:35 PM (IST)
Garud Puran : हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथों में से एक, गरुड़ पुराण न केवल मृत्यु के बाद की स्थितियों का वर्णन करता है, बल्कि जीवन के रहस्यों और कर्मों के फल पर भी गहरा प्रकाश डालता है। अक्सर समाज में बेटियों के जन्म को लेकर जिज्ञासा रहती है, लेकिन गरुड़ पुराण के अनुसार, किसी घर में बेटी का जन्म महज एक 'इत्तेफाक' नहीं, बल्कि उस परिवार के पिछले जन्मों के श्रेष्ठ कर्मों का प्रतिफल होता है। तो आइए जानते हैं बेटियों के जन्म से जुड़े दिव्य रहस्य के बारे में-
क्या है बेटियों के जन्म का रहस्य ?
गरुड़ पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति अपने पूर्व जन्मों में सेवा, परोपकार और संयम का पालन करता है, उसे ईश्वरीय पुरस्कार के रूप में कन्या रत्न की प्राप्ति होती है। शास्त्र कहते हैं कि जिस कुल या परिवार में बेटियों का जन्म होता है, वह कुल अत्यंत भाग्यशाली माना जाता है क्योंकि बेटियां साक्षात देवी लक्ष्मी का स्वरूप होती हैं।
माता-पिता के पुण्यों का फल
गरुड़ पुराण के अनुसार, पितरों की संतुष्टि और कुल के उद्धार के लिए बेटी का होना अनिवार्य माना गया है। बेटियां अपने पिता और माता के प्रति सबसे अधिक समर्पित होती हैं। ऐसा माना जाता है कि जो माता-पिता कन्यादान जैसा महादान करते हैं, उनके लिए स्वर्ग के द्वार खुल जाते हैं। यह सौभाग्य केवल उन्हें मिलता है जिनके घर बेटियां होती हैं।
पुत्र और पुत्री के कर्मों का अंतर
गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु पक्षीराज गरुड़ को समझाते हैं कि संतान का होना पूरी तरह से जीव के संचित कर्मों पर निर्भर करता है। जहां पुत्र को कुल का दीपक माना जाता है, वहीं पुत्री को 'दो कुलों का गौरव' कहा गया है। वह अपने मायके और ससुराल, दोनों पक्षों के संस्कारों और मान-मर्यादा को संजोती है।
समाज के लिए एक बड़ा संदेश
आज के दौर में जब समाज में लिंग भेद की बातें होती हैं, गरुड़ पुराण का यह ज्ञान एक नई दिशा देता है। यह ग्रंथ स्पष्ट करता है कि बेटियां बोझ नहीं, बल्कि ईश्वरीय वरदान हैं। उनके आने से घर में सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। जिस घर में बेटियों का अनादर होता है, वहां से सुख-शांति चली जाती है।
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