Dussehra weapon worship: दशहरे की सुबह घर के आंगन में करें यह विशेष पूजन, साल भर बनी रहेगी सुख-समृद्धि!

punjabkesari.in Friday, Oct 16, 2026 - 09:55 AM (IST)

Vijayadashami Shastra Puja: दशहरा अथवा विजयादशमी का पर्व भगवान श्रीराम की विजय के रूप में मनाया जाए या मां दुर्गा की आराधना के रूप में, दोनों ही रूपों में यह मूल रूप से शक्ति-पूजा और शस्त्र पूजन की पावन तिथि है। यह पर्व हर्ष, उल्लास और विजय का संदेश देता है। श्रद्धालु माता दुर्गा की कृपा प्राप्त करने के लिए नौ दिनों तक नवरात्रि का व्रत रखते हैं और मां दुर्गा के नौ रूपों का पूजन करते हैं। इसके पश्चात दशमी तिथि को दशहरा मनाया जाता है। इस अवसर पर स्थान-स्थान पर बड़े-बड़े मेलों का आयोजन होता है और रामलीला (रामकथा) का मंचन किया जाता है। दसवें दिन रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन कर अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की जीत मनाई जाती है।

Shastra Puja
Mythological History of the Worship of Arms and the Expedition to War अस्त्र-शस्त्र पूजन और रण-यात्रा का पौराणिक इतिहास
शास्त्रों के अनुसार, दशहरा वर्ष की तीन सबसे शुभ तिथियों (अबूझ मुहूर्त) में से एक माना गया है। अन्य दो अत्यंत शुभ तिथियां चैत्र शुक्ल प्रतिपदा और कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा हैं। इस दिन को इतना शुभ माना जाता है कि लोग किसी भी नए कार्य का शुभारंभ विजयादशमी के दिन ही करते हैं। दशहरे के दिन विशेष रूप से अस्त्र-शस्त्रों का पूजन किया जाता है। प्राचीन काल में राजा-महाराजा इस शुभ तिथि पर विजय की कामना करते हुए अपने शस्त्रों का पूजन करते थे और युद्ध अभियान (रण-यात्रा) के लिए प्रस्थान करते थे।

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Dussehra Vijayadashami puja vidhi दशहरा और अस्त्र पूजन की वैदिक विधि
वैदिक हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार, दशहरे के दिन भगवान श्रीराम के साथ उनके भाइयों लक्ष्मण जी, भरत जी और शत्रुघ्न जी का भी पूजन करने का विधान है।

मंडलाकार पिंड का निर्माण: दशहरे की सुबह घर के आंगन में गोबर से चार गोल (मंडलाकार बर्तन जैसे) पिंड बनाएं। इन्हें भगवान श्रीराम और उनके तीनों भाइयों की प्रतीक छवि माना जाता है।

धान और चांदी का स्थापन: गोबर से बने इन चारों बर्तनों में भीगा हुआ धान और चांदी रखकर उन्हें स्वच्छ वस्त्र से ढक दें।

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गंध और पुष्प से पूजन: इसके बाद गंध, पुष्प, अक्षत और द्रव्य आदि अर्पित करके विधिवत पूजा करें।

ब्राह्मण भोजन एवं व्रत पारण: पूजा संपन्न होने के बाद ब्राह्मणों को श्रद्धापूर्वक भोजन कराएं और उसके बाद ही स्वयं भोजन ग्रहण करें।

धार्मिक मान्यता: ऐसा माना जाता है कि इस वैदिक विधि से विजयादशमी का पूजन करने से मनुष्य वर्ष भर सुखी, समृद्ध और रोगमुक्त रहता है।

Shastra Puja

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Content Writer

Niyati Bhandari

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