Diwali 2020: इन राज्यों में लक्ष्मी नहीं, इनकी होती है पूजा, जानें क्यों?

2020-11-12T16:08:47.877

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
दिवाली पर इन राज्यों में लक्ष्मी नहीं, क्यों होती है काली माता की पूजासनातन धर्म के प्रत्येक त्यौहार के साथ कोई न कोई देवी-देवता का संबंध बताया जाता है। तो वहीं कुछ दिन पर्व ऐसे भी होते हैं जिनसे एक से अन्य देवी-देवता का संबंध होता है। इन्हीं में से एक है दिवाली का पर्व, जिसे लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। अगर बात करें उत्तर भारत की तो इस दिन लगभग यहां हर कोई देवी लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करता है, क्योंकि ज्योतिष मान्यता है कि इस दिन इनकी पूजा से धन धान्य में वृद्धि होती है साथ ही साथ घर की सुख-समृद्धि बढ़ती है। मगर क्या आप जानते हैं कुछ ऐसी भी जगहें हैं जहां इस दिन देवी लक्ष्मी नहीं बल्कि महाकाली की पूजा की जाने की पंरपरा है। जी हां, बताया जाता पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, उड़िसा और पूर्वोत्तर राज्यों में दिवाली के 5 दिनी उत्सव के दौरान कालिका पूजा का प्रचलन है। तो वहीं कई जगहों पर नरक चतुर्दशी के दिन तो कुछ स्थलों पर दीपावली के दिन कालिका पूजा का प्रचलन है। मगर इस परंपरा के पीछे का रहस्य क्या है, इससे संबंधित पौराणिक कथा क्या है इस बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। तो आइए जानते हैं क्यों इस दिन पश्चिम बंगाल में देवी लक्ष्मी की नहीं बल्कि महाकाली की पूजा होती है। 
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इसलिए होते है देवी काली की पूजा- 
सनातन धर्म के शास्त्रों में वर्णित कथाओं के मुताबिक जब प्राचीन समय में समस्त राक्षसों का वध करने के बाद भी महाकाली का क्रोध शांत नहीं हुआ, तब भगवान शिव उनके क्रोध को शांत करने के लिए उनके चरणों में लेट गए थे। भगवान शिव के शरीर के स्पर्श मात्र से महाकाली का क्रोध शांत हो गया था। ऐसी मान्यताएं प्रचलित हैं इसी के चलते देश के कुछ राज्यों में देवी के शांत रूप लक्ष्मी की तो जबकि कुछ स्थानों पर इनकी रौद्र रूप काली की पूजा का प्रचलने है।

कुछ धार्मिक किंवदंतियां ये भी हैं कि इस दिन ही देवी काली का जन्म हुआ था, जो इनके इस दिन पूजा करने के तमाम कारणों में से माना जाता है। बताया जाता है अधिकतर तौर पर पश्चिम बंगाल के ही राज्यों में इनकी पूजा की जाती हैं। इन्हीं राज्यों में माता सती के ज्यादातर शक्तिपीठ भई स्थित है। जिस कारण इन राज्यों का मूल धर्म शाक्त ही है। 
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काली पूजा का महत्व- 
कथाओं के अनुसार इस दिन देवी दुर्गा ने ही दुष्टों और पापियों का संहार करने के लिए महाकाली का अवतार लिया था। ऐसा कहा जाता है कि मां काली के पूजन से जातक को अपने जीवन के सभी दुखों से छुटकारा मिल जाता है। इतना ही नहीं जिस व्यक्ति के कुंडली में राहू और केतु अशुभ हों, तो उनकी दशा-दिशा मज़बूत होती है। इसके अतिरिक्ति महाकाली की पूजा तंत्र साधना के लिए भी अधिक लाभकारी होती है। 
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ऐसे करें काली पूजा- 
ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि देवी काली की पूजा दो तरीकों से की जाती है, एक सामान्य रूप से तो एक तंत्र साधना। साधारण होने वाली पूजा करने में आसान होती है जिस कारण इसे कोई भी कर सकता होता है। इसके लिए महाकाली को विशेष रूप से 108 गुड़हल के फूल, 108 बेलपत्र एवं माला, 108 मिट्टी के दीपक और 108 दुर्वा चढ़ाएं। साथ ही मौसमी फल, मिठाई, खिचड़ी, खीर, तली हुई सब्जी तथा अन्य व्यंजनों का भी भोग माता को चढ़ाया जाता है। पूजा की इस विधि में सुबह से उपवास रखकर रात्रि में भोग, होम-हवन व पुष्पांजलि आदि का समावेश भी होता है।


Jyoti

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