अगर चाहते हैं जीवन में मान-सम्मान तो कभी न करें अभिमान

11/19/2019 12:32:37 PM

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
आज के समय कोई भी अपनी लाइफ में खुश नहीं है। हर कोई किसी न किसी बात को लेकर चिंता में रहता है। ऐसे में अगर कोई इंसान चाणक्य द्वारा बताई गई नीति को अपने जीवन में उतार लेता है तो उसका जीवन सुधर सकता है। यानि कि उसके जीवन में आने वाली मुसीबतों का वे डटकर सामना कर सकता है। आचार्य द्वारा बनाई नीतियों में ऐसी बहुत सी नीतियां शामिल हैं जिसमें ये बताया गया है कि हर इंसान को हर जगह पर किस तरह से रहना चाहिए।  
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श्लोक
यस्मिन देशे न सम्मानो न वृत्तिर्न च बांधव:। 
न च विद्यागमोऽप्यस्ति वासस्तत्र न कारयेत्।।
चाणक्य नीति के इस श्लोक के अनुसार, जिस स्थान पर मान-सम्मान न हो, रोजगार न हो, रिश्तेदार न हो, शिक्षा न हो, सबसे बड़ी बात ये है कि वहां के लोगों में कोई गुण न हो, उस स्थान पर घर नहीं बनाना चाहिए। ऐसे स्थान को तुरंत छोड़कर दूसरे स्थान पर चले जाना चाहिए।

सम्मान
कहते हैं कि जिस स्थान पर व्यक्ति को सम्मान न मिले वहां से उसे हट जाना चाहिए। क्योंकि ऐसी जगह उसके लिए कभी फलती नहीं है। 

रोजगार 
चाणक्य नीति के अनुसार, स्थान कितनी भी सुंदर क्यों न हो, अगर वहां रोजगार का कोई साधन न हो तो उस स्थान को तुरंत छोड़ देना चाहिए। 
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रिश्तेदार 
आपका कोई रिश्तेदार या कोई दोस्त भी न रहता हो उस स्थान का तुरंत त्याग कर देना चाहिए। ऐसे स्थान पर कभी नहीं रहना चाहिए। 

शिक्षा 
चाणक्य के अनुसार जिस जगह पढ़ाई-लिखाई को कम महत्व मिलता हो, शिक्षा के साधनों की कमी हो, उस जगह पर कभी भी नहीं रहना चाहिए और ऐसे स्थान को तुरंत छोड़ देना चाहिए। 

गुण 
जहां के लोगों में गुणों का अभाव हो, सीखने के लिए कुछ न हो, वैसे स्थान पर भूलकर भी नहीं रहना चाहिए। वैसे स्थान को छोड़ने में ही भलाई है।


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