New Year के शुरू होने से पहले पल्ले बांध लें ये बातें, सफल चूमेगी कदम

punjabkesari.in Friday, Dec 24, 2021 - 05:11 PM (IST)

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
कुछ ही दिनों में नए साल यानि 2022 का आगाज़ होने वाला है। हर कोई इसकी तैयारियों में जुटा हुआ है। प्रत्येक व्यक्ति की नए साल को लेकर एक ही कामना होती है कि नए साल साकारात्मकता से शुरू हो और उस पूरे साल में किसी तरह की कोई परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके लिए लोग कई तरह के प्रयास करते हैं। परंतु क्या आप जानते हैं कि चाणक्य नीति भी नए साल को अच्छा बनाने में सहायक साबित होती है। आप लोगों में से लगभग लोग जानते हैं कि नए साल के मौके पर संकल्प लेते हैं और अपने जीवन में बदलाव करते हैं। परंतु आचार्य चाणक्य का मानना था कि अगर चाणक्य नीतियों को अपने जीवन में अपना लिया जाए तो नए साल को अच्छा करने के लिए तरह तरह के संकल्प लेने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती है। तो चलिए नए साल के शुरू होने से पहले जानते हैं आचार्य चाणक्य के नीति शास्त्र में वर्णित ऐसी नीतियां जिनको अपनाने से व्यक्ति अपना नया साल बेहतर बना सकता है। 

तो जैसे कि सब जानते हैं कि नया साल आने वाला है, बहुत से लोग होंगे जिनका 2021 वर्ष अच्छा नहीं गुजरा होगा। ऐसे में 2022 को अच्छा व सफल बनाने की इच्छा हर किसी को होगी। तो आपको बता दें इसमें आपके लिए उदास होने की गुंजाइिश नहीं है। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि आत्मविश्वास से ही बड़ी से बड़ी जंग को जीता जा सकता है। लक्ष्य की प्राप्ति में आत्मविश्वास का अहम योगदान होता है,  इसलिए कभी भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। जो लोग हिम्मत हार जाते हैं, वे कभी इतिहास नहीं लिखते। 

यहां जानें आने वाले नए साल को सफलता में कैसे बदला जा सकता है- 

आचार्य चाणक्य ने अपने नीति सूत्र में बताया है कि समय सबसे मूल्यवान होता है। इसलिए इस बेमतलब कभी खराब नहीं करना चाहिए। बल्कि हर पल कुछ नया करना का जुनून अपने भीतर रखना चाहिए। सफलता में समय का विशेष महत्व होता है। जो व्यक्ति अपने जीवन में समय की कद्र करता है, उसके अनुसार चलता है, वह जीवन में बहुत कम असफल प्राप्त करता है। 
 
चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को हमेशा निंदा से दूर रहना चाहिए। न ही किसी की निंदा करनी चाहिए, न ही किसी की निंदा सुननी चाहिए। निंदा हर प्रकार से व्यक्ति के जीवन की सफलता में बाधक बनती है। तो वहीं यें जातक के मन में नकारात्मकता के भाव को पैदा करती है। जिससे व्यक्ति के भीतर मानसिक तनाव और क्रोध अधिक बढ़ता है। निंदा कई प्रकार के अवगुणों को बढ़ावा देती है, इसलिए नए साल पर इससे दूर रहने का प्रयास करें। 

आखिर में चाणक्य कहते हैं कि धन का व्यय बहुत सोच समझ कर करना चाहिए। धन बुरे वक्त में काम आता है। संकट आने पर जब सभी लोग साथ छोड़कर चले जाते हैं तब धन ही सच्चे मित्र की भूमिका निभाता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि नए साल पर धन को लेकर गंभीर रहें और जितना हो सके धन की बचत करें। 

 


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Content Writer

Jyoti

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