Chanakya Niti: इन दो चीजों से डरने वाले लोग सफलता का मुंह नहीं देख पाते
punjabkesari.in Sunday, Aug 24, 2025 - 07:00 AM (IST)

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Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य, जिन्हें कौटिल्य या विष्णुगुप्त के नाम से भी जाना जाता है, न केवल एक महान अर्थशास्त्री और राजनीतिज्ञ थे, बल्कि एक गहरे चिंतक और जीवन के वास्तविक ज्ञाता भी थे। उनकी बताई गई चाणक्य नीति आज भी लाखों लोगों के जीवन में मार्गदर्शन का कार्य करती है। चाणक्य का मानना था कि अगर व्यक्ति कुछ मूलभूत बातों को समझ ले और उनका पालन करे, तो वह किसी भी परिस्थिति में सफल हो सकता है। चाणक्य नीति के अनुसार, जीवन में दो ऐसी चीजें हैं जिनसे डरने वाला व्यक्ति कभी सफलता प्राप्त नहीं कर सकता। आइए जानते हैं वे कौन-सी दो चीजें हैं और क्यों उनसे डरना आत्म-विकास और सफलता के मार्ग में सबसे बड़ी रुकावट है।
आलोचना से डरना
चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति आलोचना से डरता है, वह कभी बड़ा नहीं बन सकता। आलोचना, चाहे वह सही हो या गलत, एक ऐसा आईना है जो हमें अपनी कमियों को समझने का अवसर देता है। कई बार लोग आलोचना से बचने के लिए अपने विचार व्यक्त नहीं करते, निर्णय लेने से डरते हैं या फिर किसी बड़े लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाने से कतराते हैं। लेकिन यह डर उन्हें वहीं का वहीं रोक देता है। याद रखिए, जो लोग ऊंचा सोचते हैं और बड़ी सफलता की ओर बढ़ते हैं, उन्हें आलोचनाएं झेलनी ही पड़ती हैं। दुनिया हर उस व्यक्ति की आलोचना करती है जो भीड़ से हटकर चलता है। इसलिए आलोचना को डर की तरह नहीं, बल्कि सुधार के अवसर की तरह लें।
असफलता से डरना
चाणक्य के अनुसार, जो व्यक्ति असफलता के डर से प्रयास करना छोड़ देता है, वह जीवन में कभी आगे नहीं बढ़ सकता। असफलता जीवन का एक हिस्सा है, यह सफलता की राह का एक जरूरी पड़ाव है। जो असफलता से घबराकर कोशिश ही नहीं करता, वह अपने अंदर की अपार संभावनाओं को खो देता है।असफलता से डरने की बजाय उससे सीखना चाहिए। हर बार गिरने के बाद जो व्यक्ति उठकर फिर से चलना शुरू करता है, वही सच्चा विजेता होता है। चाणक्य कहते हैं कि सफल वही होता है जो हर बार गिरने के बाद दोबारा खड़ा होने की हिम्मत रखता है।