Blood Moon 2026: भारत में कब और कहां दिखेगा साल का पहला ब्लड मून, जानिए ज्योतिषीय महत्व और राशियों पर असर
punjabkesari.in Thursday, Feb 05, 2026 - 09:38 AM (IST)
Blood Moon 2026: साल 2026 की शुरुआत खगोल प्रेमियों और ज्योतिष में रुचि रखने वालों के लिए एक बेहद खास खगोलीय घटना के साथ होने जा रही है। 3 मार्च 2026 को साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा, जो ‘ब्लड मून’ के रूप में दिखाई देगा। इस दौरान चंद्रमा लालिमा लिए नजर आएगा। यह दुर्लभ नजारा भारत के कई हिस्सों में देखा जा सकेगा।
ब्लड मून न सिर्फ वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है, बल्कि ज्योतिष में भी इसे विशेष ऊर्जा और परिवर्तन का संकेत माना जाता है। आइए जानते हैं ब्लड मून क्या होता है, भारत में इसे कब और कहां देखा जा सकेगा और किन राशियों पर इसका प्रभाव पड़ेगा।

क्या होता है ब्लड मून?
ब्लड मून एक विशेष खगोलीय घटना है, जो पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान दिखाई देती है। जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में होते हैं और पृथ्वी इनके बीच आ जाती है, तब पृथ्वी की छाया पूरी तरह चंद्रमा पर पड़ती है।
इस स्थिति में चंद्रमा पूरी तरह अंधकारमय नहीं होता, बल्कि लाल, तांबे या गहरे नारंगी रंग में चमकने लगता है। ऐसा पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरने वाली सूर्य किरणों के कारण होता है। नीली रोशनी बिखर जाती है, जबकि लाल रंग की किरणें चंद्रमा तक पहुंचती हैं, जिससे वह लाल दिखाई देता है। इसी वजह से इसे ब्लड मून कहा जाता है।
भारत में कब दिखाई देगा ब्लड मून 2026?
खगोलीय गणनाओं के अनुसार, साल 2026 का पहला ब्लड मून 3 मार्च 2026 को दिखाई देगा। इस चंद्र ग्रहण की प्रक्रिया 2 मार्च की देर रात से शुरू होकर 3 मार्च की शाम तक चलेगी।
भारतीय मानक समय (IST) के अनुसार:
ग्रहण की शुरुआत: दोपहर 3:22 बजे
ग्रहण का समापन: शाम 6:47 बजे

भारत में कहां-कहां दिखेगा ब्लड मून का नजारा?
इस बार ब्लड मून का दृश्य भारत के अधिकांश हिस्सों में देखा जा सकेगा। पूर्वोत्तर भारत में यह दृश्य सबसे ज्यादा स्पष्ट रहेगा। असम, मणिपुर, नागालैंड, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, गुवाहाटी, आइजोल, ईटानगर और कोलकाता जैसे शहरों में चंद्रमा का लाल रंग अधिक समय तक नजर आने की संभावना है।
दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, जयपुर और लखनऊ जैसे बड़े शहरों में चंद्र ग्रहण का आंशिक चरण देखा जा सकेगा।
ब्लड मून देखने का सही तरीका
ब्लड मून को देखने के लिए किसी विशेष सुरक्षा उपकरण की आवश्यकता नहीं होती। इसे नग्न आंखों से सुरक्षित रूप से देखा जा सकता है। हालांकि, दूरबीन या टेलीस्कोप की मदद से चंद्रमा की लाल आभा और सतह के विवरण अधिक स्पष्ट दिखाई देते हैं।
बेहतर अनुभव के लिए कम रोशनी वाली खुली जगह चुनें। ऊंची इमारतों और प्रदूषण से दूर रहें।
चंद्र ग्रहण का ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन, भावनाओं और मानसिक स्थिति का कारक माना जाता है। चंद्र ग्रहण के दौरान भावनात्मक अस्थिरता, मानसिक उलझन और अंतर्मन में चल रहे द्वंद्व उभर सकते हैं।
ब्लड मून की लाल आभा को तीव्र ऊर्जा, परिवर्तन और छिपे हुए सच के उजागर होने का प्रतीक माना जाता है। इसे आत्ममंथन और पुराने अध्यायों के समापन का समय भी कहा जाता है।
इन राशियों पर पड़ेगा ज्यादा असर
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, यह ब्लड मून मुख्य रूप से जल और अग्नि तत्व की राशियों को प्रभावित कर सकता है।
कर्क, वृश्चिक और मीन:
भावनात्मक उतार-चढ़ाव, मानसिक संवेदनशीलता बढ़ सकती है।
मेष और सिंह:
अचानक फैसले, टकराव या आक्रामक प्रतिक्रिया की संभावना।
कन्या और मकर:
आत्मविश्लेषण, आत्मचिंतन और जीवन की दिशा पर पुनर्विचार का समय।

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
