Bhojshala Dhar Updates: भोजशाला विवाद पर हिंदू पक्ष ने कहा, मंदिर ढहाए जाने के बाद भी भक्तों को वहां उपासना का अधिकार
punjabkesari.in Thursday, Apr 09, 2026 - 08:27 AM (IST)
इंदौर (प.स.): मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में धार के भोजशाला विवाद के मुकद्दमे में हिंदू पक्ष ने बुधवार को दलील दी कि कोई मंदिर ध्वस्त किए जाने के बाद भी वह जगह मंदिर ही रहती है और अपना धार्मिक और कानूनी स्वरूप बरकरार रखती है जिससे भक्तों को उस स्थान पर उपासना का अधिकार मिलता है। भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष 11वीं सदी के इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह विवादित परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ए.एस.आई.) द्वारा संरक्षित है।
हाईकोर्ट की इंदौर पीठ इस परिसर के धार्मिक स्वरूप के विवाद को लेकर दायर 4 याचिकाओं और एक रिट अपील पर 6 अप्रैल से नियमित सुनवाई कर रही है। सुनवाई के तीसरे दिन याचिकाकर्त्ताओं में शामिल संगठन ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ के वकील विष्णु शंकर जैन ने न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी के सामने अपनी विस्तृत दलीलें पेश करना जारी रखा।
जैन ने खंडपीठ के सामने अपने केंद्रीय तर्क को दोहराया कि ‘ऐतिहासिक रिकॉर्ड और वैज्ञानिक सबूतों’ के मुताबिक भोजशाला का सरस्वती मंदिर विवादित परिसर पर (मस्जिद के मुकाबले) पहले से मौजूद था, इसलिए वहां केवल हिंदुओं को उपासना का अधिकार दिया जाना चाहिए।
हिंदू पक्ष के वकील ने दावा किया कि धार के परमार राजवंश के राजा भोज द्वारा वर्ष 1034 में बनाया गया यह मंदिर मध्यकालीन भारत के शासक अलाउद्दीन खिलजी के हुक्म पर 1305 में ढहाया गया था।
