Basant Panchami : क्यों वसंत पंचमी से शुरू कराई जाती है बच्चे की पढ़ाई? जानें इसके पीछे का गहरा रहस्य
punjabkesari.in Thursday, Jan 22, 2026 - 04:22 PM (IST)
Basant Panchami 2026 : भारत के हर घर में वसंत पंचमी का दिन खुशियों और ज्ञान की नई लहर लेकर आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दिन को बच्चों की शिक्षा की शुरुआत यानी 'विद्यारंभ संस्कार' के लिए सबसे उत्तम क्यों माना जाता है? इस समय प्रकृति भी अपना पुराना चोला त्यागकर नया रूप लेती है, जो एक नए और ताजे मानसिक अध्याय की शुरुआत के लिए सबसे अनुकूल समय है। तो आइए जानते हैं कि विद्यारंभ क्या है, इसे कैसे करें और इसके पीछे का गहरा महत्व के बारे में-

सबसे पहले समझते हैं कि विद्यारंभ आखिर है क्या ?
हिंदू धर्म के संस्कारों में से एक है 'विद्यारंभ संस्कार'। इसका सरल अर्थ है- 'विद्या का आरंभ'। यह वह समय होता है जब एक बच्चा औपचारिक रूप से शिक्षा की दुनिया में पहला कदम रखता है। इसे 'अक्षर अभ्यास' या 'अक्षरारंभ' भी कहा जाता है। यह संस्कार बच्चे के कोमल मन में यह बात गहराई से बैठा देता है कि शिक्षा केवल एक जरूरत नहीं, बल्कि जीवन की सबसे पवित्र साधना है।
'विद्यारंभ संस्कार' के लिए वसंत पंचमी को ही क्यों चुना गया है ?
शास्त्रों के अनुसार, इसी दिन ज्ञान, कला और संगीत की देवी माँ सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। इसीलिए इसे उनका जन्मोत्सव मानकर पूजा जाता है। पूजा के दौरान देवी सरस्वती जी के मंत्रों का उच्चारण वातावरण में एक ऐसी सकारात्मक ऊर्जा पैदा करता है, जो बच्चे की एकाग्रता और बुद्धि को तेज करती है। साथ ही, यह 'अबूझ मुहूर्त' है, जिसमें ब्रह्मांड की शक्तियां स्वयं नए कार्यों को आशीर्वाद देती हैं।

विद्यारंभ संस्कार घर पर करने के लिए नियम
सबसे पहले बच्चे को पीले वस्त्र पहनाएं। पीला रंग ऊर्जा, उत्साह और शुद्धता का प्रतीक है।
इसके बाद मां सरस्वती के सामने घी का दीपक जलाएं और उनकी प्रिय वस्तुएं जैसे सफेद फूल और पीली मिठाई अर्पित करें।
इस दिन बच्चे की केवल स्लेट ही नहीं, बल्कि उसकी पहली कलम और किताब की भी पूजा की जाती है। इसके बाद बच्चे की उंगली पकड़कर केसर की स्याही से या सूखे चावलों पर 'ॐ' या 'श्री' लिखवाएं। यह उसके जीवन के बौद्धिक सफर की औपचारिक घोषणा है।
विद्यारंभ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक बच्चे को संस्कारित बनाने की प्रक्रिया है। आज का यह छोटा सा अनुष्ठान भविष्य में एक सभ्य, विद्वान और अनुशासित व्यक्तित्व की मजबूत नींव रखने का काम करता है। इस वसंत पंचमी, अपने बच्चों को ज्ञान के इस महाकुंभ से जरूर जोड़ें।

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