रामलला के दरबार के साथ अब 250 करोड़ खर्च पर निखारे जाएंगे 8 प्राचीन मंदिर, हर मोड़ पर होगी दिव्यता के दर्शन

punjabkesari.in Monday, Feb 16, 2026 - 10:50 AM (IST)

Ayodhya Ram Mandir : अयोध्या केवल एक मंदिर का शहर नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आस्था का जीवंत केंद्र है। प्रभु श्री रामलला के अपने भव्य महल में विराजमान होने के बाद, अब उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या के अन्य प्राचीन और पौराणिक स्थलों को उनके वास्तविक गौरव में वापस लाने का बीड़ा उठाया है। इसी क्रम में, 250 करोड़ रुपये की एक महत्वाकांक्षी योजना के तहत अयोध्या के 8 अत्यंत प्राचीन मंदिरों के कायाकल्प और सौंदर्यीकरण की तैयारी शुरू हो गई है।

क्या है मास्टर प्लान ?
सरकार का लक्ष्य है कि अयोध्या आने वाला हर श्रद्धालु केवल मुख्य मंदिर तक सीमित न रहे, बल्कि वह पूरी अयोध्या में त्रेतायुगीन दिव्यता का अनुभव कर सके। सदियों पुराने इन मंदिरों के मूल स्वरूप को बिना छेड़े, उनके ढांचे को मजबूती दी जाएगी और नक्काशी को उभारा जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए सुगम रास्ते, लाइटिंग, पेयजल, और बैठने की उत्तम व्यवस्था की जाएगी। कई स्थानों पर आधुनिक तकनीक के जरिए इन मंदिरों के इतिहास और प्रभु राम से उनके संबंध की गाथा सुनाई जाएगी।

किन 8 स्थलों का होगा कायाकल्प ?
यद्यपि अयोध्या में हजारों मंदिर हैं, लेकिन पहले चरण में उन 8 स्थलों को चुना गया है जिनका पौराणिक महत्व अत्यधिक है। इनमें शामिल हो सकते हैं।

सूर्य कुंड: जिसका धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व बहुत गहरा है।

गुप्तार घाट क्षेत्र के मंदिर: जहां प्रभु राम ने जल समाधि ली थी।

हनुमान गढ़ी के समीपवर्ती प्राचीन मठ।

कनक भवन के आसपास के ऐतिहासिक स्थल।

निवेश और रोजगार की नई राहें
250 करोड़ रुपये का यह निवेश केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, इसके दूरगामी परिणाम होंगे।

पर्यटन में उछाल: जब 8 अलग-अलग दिशाओं में सुंदर और भव्य मंदिर होंगे, तो पर्यटक अयोध्या में अधिक समय बिताएंगे।

स्थानीय रोजगार: मंदिरों के आसपास बुनियादी ढांचा सुधरने से स्थानीय दुकानदारों, गाइडों और हस्तशिल्पियों के व्यापार में जबरदस्त वृद्धि होगी।

विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा: अयोध्या को एक Global Religious Hub के रूप में स्थापित करने में यह योजना मील का पत्थर साबित होगी।

विरासत और आधुनिकता का संगम
इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें आधुनिक सुविधाओं के साथ-साथ पौराणिक वास्तुकला का पूरा ध्यान रखा जाएगा। पत्थर की नक्काशी, पारंपरिक रंगों का प्रयोग और आसपास का वातावरण ऐसा तैयार किया जाएगा कि भक्तों को यह अनुभव हो कि वे वास्तव में 'राम राज्य' की गलियों में विचरण कर रहे हैं।

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Content Editor

Sarita Thapa

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