Adhik Maas Amavasya 2026: सोमवती अमावस्या का महासंयोग, सुबह उठते ही करें इस एक चीज का दान, होंगे आपके वारे-न्यारे
punjabkesari.in Saturday, Jun 06, 2026 - 10:02 AM (IST)
Adhik Maas Amavasya 2026: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का अपना एक विशेष महत्व है लेकिन जब यह अमावस्या 'अधिक मास' में आती है, तो इसका आध्यात्मिक फल कई गुना बढ़ जाता है। साल 2026 में ज्येष्ठ अधिक मास की अमावस्या बेहद खास होने वाली है क्योंकि इस दिन सोमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग बन रहा है। ज्योतिषियों के अनुसार, यह दिन पितरों को प्रसन्न करने और जीवन से दरिद्रता दूर करने के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

कब है अधिक मास अमावस्या? जानें सही तारीख और शुभ मुहूर्त
पंचांग गणना के अनुसार, अधिक मास की अमावस्या तिथि का प्रारंभ 14 जून 2026 को दोपहर 12 बजकर 19 मिनट पर होगा। इसका समापन अगले दिन 15 जून 2026 को सुबह 8 बजकर 23 मिनट पर होगा। उदया तिथि की मान्यता के कारण अमावस्या का मुख्य पर्व 15 जून, सोमवार को मनाया जाएगा। सोमवार को होने के कारण ही इसे सोमवती अमावस्या कहा जाएगा, जो दान-पुण्य के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है।

सोमवती अमावस्या शुभ मुहूर्त (15 जून 2026):
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 03:33 से 04:14 तक।
अमृत सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 04:55 से शाम 07:08 तक।
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:20 से दोपहर 12:15 तक।
अमृत सिद्धि योग में बन रहा है पुण्य का महासंगम
इस बार की अमावस्या इसलिए भी खास है क्योंकि इस दिन मिथुन संक्रांति भी मनाई जाएगी। साथ ही पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग का प्रभाव रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन शुभ योगों में किया गया जप, तप और दान सीधे भगवान विष्णु और पितरों तक पहुंचता है।

सुबह उठते ही करें इस एक चीज का दान होंगे आपके वारे-न्यारे
जल दान
अधिक मास की इस अमावस्या पर जल दान का सबसे बड़ा महत्व बताया गया है। कहा जाता है जो पुण्य सब दानों से, सब तीर्थों के दर्शन से आदि से मिलता है। उसी पुण्य की प्राप्ति केवल जल का दान करने से हो जाती है। जो व्यक्ति सड़क पर यात्रियों के लिए प्याऊ लगवाता है, वह विष्णुलोक में प्रतिष्ठित हो जाता है। कहा जाता है कि प्याऊ देवताओं, पितरों और ऋषि-मुनियों को अत्यंत प्रिय है।

इसके अलावा इस दिन निम्नलिखित वस्तुओं का दान भी अत्यंत फलदायी है:
पंखा दान करना
मान्यता है की धूप में परिश्रम कर रहे मजदूर, राहगीर अथवा ब्राह्मण को पंखे से हवा अथवा शीतलता प्रदान करने वाला व्यक्ति निष्पाप होकर भगवान का पार्षद बनता है। जो राह में थके हुए श्रेष्ठ द्विज को अगर वस्त्र से भी हवा करता है, वह भगवान विष्णु का सामिप्य प्राप्त कर लेता है।
अन्न दान
ग्रंथ कहते हैं कि अन्नदान मनुष्यों को शीघ्र ही पुण्य प्रदान करने वाला होता है, इसलिए संसार में अन्न के समान दूसरा कोई दान नहीं है। इसलिए कहा जाता है कि दोपहर में आए हुए किसी ब्राह्मण मेहमान को या किसी अन्य भूखे जीव को अगर भोजन करवाया जाए तो उसको अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है।
पादुका एवं चटाई
धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि जो व्यक्ति विष्णु प्रिय वैशाख मास में किसी ज़रूरतमंद व्यक्ति को पादुका या जूते-चप्पल दान करता है वह यमदूतों से पीछा छुड़वा कर भगवान श्री हरि के लोक में जाता है।
शास्त्र कहते हैं कि निद्रा से दुःख का नाश होता है, निद्रा से थकावट दूर होती है इसलिए जो मनुष्य अमावस्या पर तिनके या खजूर आदि के पत्तों से बनी हुई चटाई दान करता है, उसके सारे दुखों का नाश हो जाता है और परलोक में उत्तम गति पाता है।
वस्त्र, फल, घी और शर्बत
मान्यताओं के अनुसार कपड़ों का दान इसी जन्म में सब सुखों से संपन्नता प्रदान करवाता है। इस समय पर गर्मी का प्रकोप अधिक होता है इसलिए इस माह में फल और शर्बत आदि का दान करना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि इससे पितृ प्रसन्न होकर आशीर्वाद प्रदान करते हैं और दान देने वाले के सारे पाप कट जाते हैं। इसके अलावा इस दौरान घी का दान करने वाले मनुष्य को अश्वमेघ यज्ञ का फल मिलता है तथा उसे विष्णुलोक में जगह मिलती है।
पितरों की शांति के लिए करें ये उपाय
ज्येष्ठ अधिक मास अमावस्या का दिन पितृ पूजा के लिए समर्पित है। सोमवती अमावस्या का आना सोने पर सुहागा है। पितरों की कृपा और पितृ दोष से मुक्ति के लिए ये दिन खास है। सुबह तर्पण करें, शाम में पीपल परिक्रमा और दीपदान करें।

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