8th day of Shardiya Navratri 2026: कैसे काली से महागौरी बनीं देवी पार्वती? पढ़ें पौराणिक रहस्य और स्टेप-बाय-स्टेप पूजा विधि
punjabkesari.in Saturday, Oct 17, 2026 - 12:16 PM (IST)
8th day of Shardiya Navratri 2026: हिंदू धर्म में नवरात्रि को सबसे पवित्र दिनों में गिना जाता है। नवरात्रि में नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। इन नौ रूपों में अष्टमी तिथि मां महागौरी को समर्पित होती है। मां महागौरी भगवान शिव की अर्धांगिनी हैं और इस दिन उनकी पूजा करने से व्यक्ति को सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

मां महागौरी का दिव्य स्वरूप
मां दुर्गा की आठवीं शक्ति महागौरी का वर्ण अत्यंत गौर और उज्ज्वल है। उनकी कांति शंख, चंद्रमा और कुंद के फूल के समान मानी गई है। इनके सभी वस्त्र और आभूषण श्वेत रंग के होते हैं, जो शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक हैं। इनकी आयु आठ वर्ष की मानी जाती है, जिससे इन्हें बाल रूप में भी पूजा जाता है।
वृषभ वाहन और चार भुजाओं का महत्व
मां महागौरी वृषभ (बैल) पर सवार रहती हैं। इनकी चार भुजाएं हैं। ऊपरी दाहिने हाथ में अभय मुद्रा, जो भय का नाश करती है। नीचे के दाहिने हाथ में त्रिशूल, जो दुष्ट शक्तियों के विनाश का प्रतीक है। ऊपर के बाएं हाथ में डमरू और नीचे के बाएं हाथ में वर मुद्रा होती है, जो भक्तों को वरदान प्रदान करती है। इनकी मुद्रा अत्यंत शांत और करुणामयी है।

मां महागौरी के नाम की पौराणिक कथा
पार्वती रूप में देवी ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी इस तप की महिमा का वर्णन किया है।
“जन्म कोटि लगि रैगर हमारी, बरउं संभु न त रहउ कुंआरी।”
इस कठिन तपस्या के कारण उनका शरीर काला पड़ गया था। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने गंगा जल से उनके शरीर को पवित्र किया, जिससे उनका स्वरूप अत्यंत गौर और कांतिमय हो गया। इसी कारण उन्हें ‘महागौरी’ कहा गया।

अन्नपूर्णा स्वरूप और कन्या पूजन का महत्व
मां महागौरी को अन्नपूर्णा का स्वरूप भी माना जाता है। अष्टमी तिथि पर कन्या पूजन का विशेष विधान है, जिसमें छोटी कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनका पूजन और भोजन कराया जाता है। यह परंपरा देवी के प्रति श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है।
पूजा से प्राप्त होने वाले फल
मां महागौरी की उपासना से साधक के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। उपासक को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन के सभी दुख, कष्ट एवं बाधाएं दूर हो जाती हैं। उनकी कृपा से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं और जीवन में सुख-शांति तथा समृद्धि का वास होता है।
मां महागौरी का प्रिय भोग
नवरात्रि के नौ दिनों में मां के अलग-अलग स्वरूप को अलग-अलग भोग लगाया जाता है। नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी को नारियल से बनी मिठाइयों का भोग लगाया जाता है। उन्हें नारियल बर्फी या लड्डू का भोग लगाया जाता है। इसके साथ ही हलवा और काले चने का भोग लगाना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। अष्टमी के दिन कन्या पूजन करके भोजन और उपहार देने की परंपरा भी है।

मां महागौरी की पूजा विधि
अष्टमी तिथि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद साफ और सफेद रंग के वस्त्र धारण करें। मां महागौरी की प्रतिमा को गंगा जल से शुद्ध करें। मां को सफेद रंग के वस्त्र पहनाएं। इसके बाद मां को सफेद फूल अर्पित करें। कुमकुम से तिलक करें। मां महागौरी के मंत्रों का जाप करें। मां को नारियर से बनी मिठाई, हलवे और काले चने का भोग लगाएं। इसके पश्चात अंत में मां महागौरी की आरती उतारें।
मां को प्रसन्न करने के लिए इस मंत्र का जप करें
श्वेते वृषेसमारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥
या देवी सर्वभूतेषु मां महागौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
महागौरी की व्रत कथा
दुर्गा अष्टमी व्रत कथा के अनुसार देवी सती ने पार्वती रूप में भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। एक बार भगवान भोलेनाथ ने पार्वती जी को देखकर कुछ कह दिया। जिससे देवी का मन आहत हो गया और पार्वती जी तपस्या में लीन हो गईं। इस प्रकार वर्षों तक कठोर तपस्या करने के बाद जब पार्वती नहीं आईं तो उनको खोजते हुए भगवान शिव उनके पास पहुंचे। वहां पहुंचकर मां पार्वती को देखकर भगवान शिव आश्चर्यचकित रह गए। पार्वती जी का रंग अत्यंत ओझ पूर्ण था, उनकी छटा चांदनी के समान श्वेत, कुंध के फूल के समान धवल दिखाई पड़ रही थी, उनके वस्त्र और आभूषण से प्रसन्न हो कर भगवान शिव ने देवी उमा को गौर वर्ण का वरदान दिया।
यूपी रत्न विभूषित, ज्योतिषाचार्य
महंत पं. सुधांशु तिवारी
मुख्य प्रवक्ता व टीवी पैनलिस्ट
संपर्क सूत्र - 9005804317, 7054594317
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