4th day of Shardiya Navratri 2026: देवी कूष्मांडा की मंद मुस्कान से हुआ ब्रह्मांड का सृजन, जानें अष्टभुजा मां की पूजा विधि
punjabkesari.in Tuesday, Oct 13, 2026 - 12:45 PM (IST)
Shardiya Navratri 2026 Day 4: सनातन धर्म में शारदीय नवरात्रि का चौथा दिन शक्ति साधना का अत्यंत पावन पर्व माना जाता है। यह दिन ब्रह्मांड की आद्यशक्ति, ऊर्जा और सृजन की देवी मां कूष्मांडा को समर्पित है। पौराणिक मान्यता है कि जब संपूर्ण सृष्टि अंधकार में डूबी हुई थी, तब देवी की एक मंद मुस्कान ने पूरे ब्रह्मांड में प्रकाश का संचार किया। अष्टभुजाधारी देवी कूष्मांडा की आराधना से साधक को आयु, यश, बल और उत्तम आरोग्य की प्राप्ति होती है। यदि आप भी अपने घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास चाहते हैं, तो जानिए चौथे दिन की पूजन विधि, देवी का प्रिय भोग, शुभ रंग और सिद्ध मंत्र।

आज शारदीय नवरात्रि का चौथा दिन है। आज मां दुर्गा के चौथे स्वरूप कुष्माण्डा की पूजा की जाती है। सनातन धर्म में नवरात्रि पर शक्ति की साधना का बहुत अधिक महत्व होता है। आज के दिन मां कूष्मांडा की पूजा अर्चना की जाती है। हिंदू मान्यता के अनुसार, दुर्गा मां के इस रूप की आराधना करने से देवी आशीष प्रदान करती हैं और सभी दुखों का नाश होता है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां कूष्माण्डा की मुस्कान की एक झलक ने पूरे ब्रह्मांड का निर्माण किया। इन्हें अष्टभुजा देवी के रूप में भी जाना जाता है।
मां कुष्मांडा की पूजा विधि
नवरात्रि के चौथे दिन, सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और फिर पूजा की तैयारी करें। मां कुष्मांडा के व्रत का संकल्प लें। सबसे पहले गंगा जल से पूजा के स्थान को पवित्र करें और फिर लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं। उस पर मां की प्रतिमा स्थापित करें और मां कुष्मांडा का ध्यान करें। पूजा में पीले वस्त्र, फूल, फल, मिठाई, धूप, दीप, नैवेद्य और अक्षत अर्पित करें। सारी सामग्री अर्पित करने के बाद मां की आरती करें और भोग लगाएं। अंत में क्षमा याचना करें और ध्यान लगाकर दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा
चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। मां कूष्मांडा को ऊर्जा और सृजनशक्ति का स्वरूप माना जाता है। मान्यता है कि उनकी पूजा से घर में सुख-समृद्धि, खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

ऐसा है मां कूष्मांडा का स्वरूप
कूष्मांडा माता को अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। वह सिंह पर सवार हैं। मां कूष्मांडा आठ भुजाओं वाली हैं और अपने हाथों में कमंडल, धनुष-बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र और गदा धारण करती हैं। माना जाता है कि देवी की पूजा करने से आयु, यश, बल और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
पूजन मंत्र
''ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥''
"या देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥"
देवी का प्रिय भोग
मां कूष्मांडा को मालपुआ व पेठा बहुत प्रिय है। माना जाता है कि इस भोग को अर्पित करने से मां प्रसन्न होती हैं और भक्तों को आरोग्य का आशीर्वाद देती हैं।

माता कुष्मांडा का प्रिय रंग
माता कुष्मांडा को हरा रंग अतिप्रिय है, इसलिए भक्तों को नवरात्रि के चौथे दिन हरे रंग के कपड़े पहनने चाहिए। इस दिन हरे रंग के कपड़े और अन्न का दान करने से भी माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
माता कुष्मांडा की कथा
धार्मिक ग्रंथों में वर्णित माता कुष्मांडा की कथा के अनुसार, त्रिदेवों ने जब सृष्टि की रचना शुरू की तो उस समय ब्रह्मांड अंधकार से भरा था। चारों ओर अंधेरा और सन्नाटा था। तब त्रिदेवों ने मां दुर्गा से सहायता ली और माता दुर्गा के कुष्मांडा स्वरूप ने ब्रह्मांड की रचना की। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कुष्मांडा के मुख मंडल पर बनी मुस्कान ने पूरे ब्रह्मांड में ऊजाला फैला दिया। माना जाता है कि माता कुष्मांडा एक मात्र देवी हैं जो सूर्य लोक में निवास करती हैं।
यूपी रत्न विभूषित, ज्योतिषाचार्य
महंत पं. सुधांशु तिवारी
मुख्य प्रवक्ता व टीवी पैनलिस्ट
संपर्क सूत्र - 9005804317, 7054594317

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