हो जाएं सावधान! पुरुषों में फैल रहे ये 3 तरह के कैंसर, ऑन्कोलॉजिस्ट ने गिनाए कारण
punjabkesari.in Wednesday, Feb 04, 2026 - 06:00 PM (IST)
नेशनल डेस्क : कैंसर… एक ऐसी बीमारी, जिसका नाम सुनते ही इंसान सहम जाता है। शरीर में कोशिकाएं लगातार बनती और नष्ट होती रहती हैं, लेकिन जब यह प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाता है और कोशिकाएं अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगती हैं, तो वे गांठ बना लेती हैं। यही स्थिति कैंसर कहलाती है। आज यह बीमारी किसी एक वर्ग या उम्र तक सीमित नहीं रही। बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग—कोई भी इसकी चपेट में आ सकता है।
ताजा आंकड़े देश की राजधानी दिल्ली को लेकर गंभीर चिंता खड़ी कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल JAMA Network Open में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, दिल्ली में कैंसर के मामलों की रफ्तार देश के अन्य महानगरों की तुलना में कहीं तेज है। खास तौर पर पुरुषों में कैंसर की दर के मामले में दिल्ली अब सभी मेट्रो शहरों में शीर्ष पर पहुंच गई है।
क्या कहती है स्टडी?
20 अगस्त 2025 को प्रकाशित इस अध्ययन में 2015 से 2019 के बीच भारत में कैंसर के मामलों और उससे होने वाली मौतों का विश्लेषण किया गया। इसके लिए देशभर की 43 कैंसर रजिस्ट्रियों के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया, जो भारत की करीब 18 फीसदी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह डेटा राष्ट्रीय कैंसर रोग सूचना केंद्र (NCDIR), टाटा मेमोरियल सेंटर और तमिलनाडु कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम जैसी संस्थाओं ने इकट्ठा किया।
रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में देश में करीब 7.8 लाख नए कैंसर मरीज सामने आए, जबकि 2.6 लाख लोगों की मौत इस बीमारी के कारण हुई। भारत में औसतन हर दस में से एक व्यक्ति को जीवनकाल में कभी न कभी कैंसर होने का खतरा है। कुछ राज्यों में यह जोखिम और भी ज्यादा पाया गया, जैसे मिजोरम में पुरुषों के लिए यह 21 प्रतिशत से अधिक दर्ज किया गया।
दिल्ली में स्थिति सबसे गंभीर क्यों?
मेट्रो शहरों की तुलना करने पर दिल्ली में कैंसर की दर सबसे ज्यादा पाई गई। आंकड़ों के मुताबिक, राजधानी में प्रति एक लाख पुरुषों पर करीब 147 कैंसर मरीज दर्ज किए गए, जो अन्य महानगरों से कहीं अधिक हैं। दिल्ली सीके बिड़ला हॉस्पिटल में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. मनदीप सिंह मल्होत्रा का कहना है कि यह बढ़ोतरी केवल बेहतर रिपोर्टिंग या रिकॉर्डिंग की वजह से नहीं है।
उनके मुताबिक, “दिल्ली में वास्तव में कैंसर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। यह ट्रेंड बेहद चिंताजनक है।”
बढ़ते कैंसर के पीछे क्या हैं वजहें?
विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली में कैंसर के मामलों में उछाल के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं।
- वायु प्रदूषण: राजधानी की हवा में लंबे समय से PM2.5 जैसे सूक्ष्म कण खतरनाक स्तर पर बने हुए हैं, जो सीधे फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं और लंग्स कैंसर के खतरे को बढ़ाते हैं।
- तंबाकू और धूम्रपान: सिगरेट, बीड़ी, गुटखा और अन्य तंबाकू उत्पाद मुंह और फेफड़ों के कैंसर का बड़ा कारण हैं।
- खराब लाइफस्टाइल: शारीरिक गतिविधि की कमी, मोटापा और जंक फूड का बढ़ता चलन शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करता है।
- पर्यावरणीय प्रदूषण: मिट्टी, धूल और भारी धातुओं के संपर्क में लंबे समय तक रहना भी कैंसर के जोखिम को बढ़ा रहा है।
दिल्ली के पुरुषों में कौन से कैंसर सबसे आम?
डॉक्टरों के मुताबिक, राजधानी के पुरुषों में तीन प्रकार के कैंसर सबसे ज्यादा सामने आ रहे हैं-
- फेफड़ों का कैंसर, जो प्रदूषण और धूम्रपान से जुड़ा है
- मुंह का कैंसर, जिसकी मुख्य वजह तंबाकू और गुटखा है
- प्रोस्टेट कैंसर, जो बढ़ती उम्र और बदलती जीवनशैली से जुड़ा माना जाता है
युवाओं में बढ़ता खतरा क्यों?
सबसे चिंता की बात यह है कि कैंसर अब युवाओं को भी तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है। डॉ. मल्होत्रा बताते हैं कि युवाओं में कैंसर अक्सर देर से पकड़ में आता है, जब बीमारी एडवांस स्टेज में पहुंच चुकी होती है। इसके अलावा कम उम्र से ही प्रदूषण, खराब खान-पान और फास्ट फूड की आदतें शरीर में कैंसर कोशिकाओं के पनपने के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर देती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते जीवनशैली में सुधार, नियमित जांच और प्रदूषण नियंत्रण पर गंभीर कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में राजधानी के लिए यह संकट और गहरा हो सकता है।
