युवाओं को निगल रही ये बीमारी! इस राज्य में हर तीसरे व्यक्ति की उम्र 44 वर्ष से कम, 20 साल में हुई लाखों लोगों की मौत
punjabkesari.in Saturday, Jan 31, 2026 - 11:07 AM (IST)
Cancer Deaths : देश की राजधानी दिल्ली से कैंसर को लेकर एक बेहद डरावनी और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। दिल्ली सरकार के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक कैंसर अब केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गई है। पिछले दो दशकों (20 साल) में दिल्ली में कैंसर से जान गंवाने वाला हर तीसरा व्यक्ति 44 वर्ष से कम उम्र का था। यह आंकड़ा बताता है कि कामकाजी युवा आबादी इस जानलेवा बीमारी की चपेट में तेजी से आ रही है।
मौत के आंकड़ों ने बढ़ाई धड़कनें
बीते 20 वर्षों में दिल्ली में कुल 1.1 लाख लोगों की मौत कैंसर से हुई। आंकड़ों का विश्लेषण करें तो खतरे की गंभीरता समझ आती है। 2005 में कैंसर से होने वाली मौतें जहां 2,000 के करीब थीं वहीं 2024 में यह बढ़कर 7,400 तक पहुंच गई हैं। दिल्ली में कैंसर से होने वाली मौतों की दर (7%) जनसंख्या वृद्धि दर से तीन गुना ज्यादा है। कुल मौतों में से लगभग 93,000 मौतें अस्पतालों में दर्ज की गईं जो दर्शाता है कि लोग इलाज के लिए पूरी तरह अस्पतालों पर निर्भर हैं।
युवाओं और बच्चों पर मंडराता खतरा
कैंसर का सबसे डरावना पहलू युवाओं और बच्चों में इसका बढ़ता ग्राफ है:
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बच्चे (14 साल से कम): कुल मौतों में करीब 8% हिस्सेदारी बच्चों की रही। पिछले 20 साल में 7,298 बच्चों ने दम तोड़ा।
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युवा (15-24 साल): इस आयु वर्ग में 5,415 युवाओं की मौत दर्ज की गई।
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सबसे प्रभावित: 45 से 64 वर्ष की उम्र के लोग सबसे ज्यादा (41%) प्रभावित रहे।
पुरुषों और महिलाओं में कौन सा कैंसर सबसे घातक?
जेंडर के आधार पर देखें तो पुरुषों में मृत्यु दर महिलाओं की तुलना में अधिक रही।
| जेंडर | कुल मौतें (अस्पतालों में) | प्रमुख कैंसर |
| पुरुष | ~55,300 | रेस्पिरेटरी (फेफड़े), प्रोस्टेट और ओरल (तंबाकू) |
| महिलाएं | ~37,600 | ब्रेस्ट कैंसर, ओवेरियन और सर्वाइकल कैंसर |
प्रदूषण और इलाज की कमी: एक्सपर्ट की राय
दिल्ली एम्स के डॉ. अभिषेक शंकर के अनुसार कैंसर बढ़ने के दो मुख्य कारण हैं:
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वायु प्रदूषण: दिल्ली की जहरीली हवा फेफड़ों के साथ-साथ ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को भी बढ़ा रही है।
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इलाज में असमानता: प्राइवेट अस्पताल बहुत महंगे हैं और सरकारी अस्पतालों में मरीजों का भारी दबाव है। इस कारण कई बार मरीज को सही समय पर कीमोथेरेपी या रेडिएशन नहीं मिल पाता।
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खतरनाक प्रवृत्ति: युवाओं में कैंसर न केवल बढ़ रहा है बल्कि यह ज्यादा 'एग्रेसिव' (तेजी से फैलने वाला) होता जा रहा है।
