‘हनुमान अंश’ की निर्माता अनुप्रिया नागर ने कहा- शान्तनु शुक्ला पिलर की तरह साथ खड़े रहे, वह मेरे बड़े भाई जैसे हैं

punjabkesari.in Saturday, Sep 12, 2026 - 02:34 PM (IST)

नई दिल्ली: फिल्म बनाना सिर्फ पर्दे पर कहानी दिखाने का नाम नहीं है। इसके पीछे लंबे समय की मेहनत, संघर्ष, भरोसे और ऐसे लोगों का साथ होता है, जो मुश्किल वक्त में बिना किसी स्वार्थ के मजबूती से खड़े रहते हैं। ‘हनुमान अंश’ की निर्माता अनुप्रिया नागर के फिल्मी सफर में भी एक ऐसा ही नाम खास बनकर सामने आया है। अनुप्रिया ने अपनी जर्नी को याद करते हुए आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज के अंतरराष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शान्तनु शुक्ला का विशेष तौर पर जिक्र किया। 

अनुप्रिया के मुताबिक, शान्तनु शुक्ला उनके लिए सिर्फ एक सहयोगी नहीं रहे, बल्कि उन्होंने पूरी फिल्मी यात्रा में एक मजबूत पिलर और बड़े भाई की भूमिका निभाई। जब भी सफर में मुश्किलें आईं, उन्होंने अनुप्रिया का हौसला बढ़ाया और उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी। 

‘हनुमान अंश’ की सफलता का श्रेय शान्तनु शुक्ला को दिया 

अनुप्रिया ने बताया कि शान्तनु शुक्ला के प्रयासों की वजह से उन्हें देश के कई बड़े साधु-संतों का आशीर्वाद लेने का अवसर मिला। उनका मानना है कि संतों का यही आशीर्वाद ‘हनुमान अंश’ की यात्रा में बेहद महत्वपूर्ण रहा है और इसी वजह से फिल्म को दर्शकों का प्यार मिल रहा है। अनुप्रिया के लिए संत समाज से मिला स्नेह, सम्मान और आशीर्वाद किसी भी व्यावसायिक उपलब्धि से कहीं अधिक मायने रखता है। उन्होंने बताया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र और कृष्ण जन्मभूमि न्यास से जुड़े संतों एवं पदाधिकारियों की ओर से मिला सम्मान उनके जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है। 

गोविंद देव गिरी महाराज ने कहा- ‘भारत की बेटी’ 

अनुप्रिया ने परम पूज्य गोविन्द देव गिरी महाराज से मिले स्नेह और आशीर्वाद को भी याद किया। उन्होंने बताया कि महाराज द्वारा उन्हें दिया गया एक संबोधन आज भी उनके दिल के बेहद करीब है। अनुप्रिया ने कहा, “गोविन्द गिरी महाराज ने मुझे ‘भारत की बेटी’ कहा। इससे बढ़कर मेरे लिए कोई सम्मान नहीं हो सकता।” उनके मुताबिक, संत के मुख से निकले ये शब्द उनके लिए सिर्फ सम्मान नहीं थे, बल्कि उनमें आशीर्वाद, अपनापन और आत्मीयता भी थी। यही वजह है कि वह इस पल को अपनी फिल्मी यात्रा के बेहद खास अनुभवों में गिनती हैं। 

कैलाशानंद गिरी जी महाराज के दर्शन को बताया भगवान शिव के दर्शन जैसा 

आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज से पहली मुलाकात को याद करते हुए अनुप्रिया ने इसे अपने जीवन का बेहद आध्यात्मिक अनुभव बताया। उन्होंने कहा, “मुझे लगा जैसे नीम करौली बाबा ने ही मुझे उनके पास भेजा है। उनके दर्शन कर ऐसा लगा मानो भगवान शिव के साक्षात दर्शन हो गए हों।” अनुप्रिया ने इस दौरान महाराज के जीवन पर फिल्म बनाने की इच्छा भी जाहिर की थी। हालांकि, उनके मुताबिक, महाराज ने कहा कि देश में ऐसे कई महान संत हैं, जिनके जीवन पर फिल्म बनाई जा सकती है और फिलहाल उन्हीं पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने स्वयं साधना में लीन रहने की इच्छा व्यक्त की। अनुप्रिया के अनुसार, महाराज का यह जवाब उनके व्यक्तित्व की गहराई और साधना के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाता है। प्रसिद्धि से दूर रहकर आध्यात्मिक साधना को प्राथमिकता देना उनके संत जीवन की विशेष पहचान है। 

‘हनुमान अंश’ के बाद भी संतों से जुड़ाव कायम 

अनुप्रिया का मानना है कि जीवन का वास्तविक सुख साधु-संतों के सान्निध्य में मिलता है। यही वजह है कि ‘हनुमान अंश’ के प्रदर्शन के बाद भी उनका संत समाज से जुड़ाव लगातार बना हुआ है। वह संतों के सान्निध्य में समय बिताकर उनके जीवन, विचारों और अनुभवों को समझने का प्रयास कर रही हैं। अनुप्रिया के लिए ‘हनुमान अंश’ महज एक फिल्म की सफलता नहीं है। यह उनके लिए संतों के आशीर्वाद, आध्यात्मिक अनुभव और अपनी सनातन जड़ों से जुड़ने की यात्रा भी बन चुकी है। इस पूरे सफर में शान्तनु शुक्ला का साथ उनके लिए एक मजबूत सपोर्ट सिस्टम रहा है, जिसे वह आज भी बड़े भाई और मजबूत स्तंभ के रूप में याद करती हैं।


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Ramanjot

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