Why Stock Market Crash: मोदी की अपील-ट्रंप के बयान के बाद बाजार में हाहाकार, निवेशकों के 11 लाख करोड़ स्वाहा, जानें गिरावट के कारण
punjabkesari.in Tuesday, May 12, 2026 - 04:19 PM (IST)
Why Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन भारी गिरावट देखने को मिली, जिससे निवेशकों को बड़ा झटका लगा और लगभग 11 लाख करोड़ रुपये की वैल्यू वॉशआउट हो गई। इस गिरावट के पीछे कई ग्लोबल और घरेलू कारण बताए जा रहे हैं। इंटरनेशनल लेवल पर ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से हाल ही में ईंधन बचत और सोना न खरीदने की सलाह का भी बाजार पर असर देखा गया। वहीं, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा यह बयान कि युद्धविराम कमजोर स्थिति में है और हालात कभी भी बिगड़ सकते हैं, ने भी वैश्विक अनिश्चितता को और बढ़ा दिया। इन सभी कारणों के चलते बाजार में लगातार दबाव बना हुआ है और निवेशकों में घबराहट का माहौल देखा जा रहा है।
आज 12 मई का शेयर बाजार का हाल
-सेंसेक्स करीब 1456 अंक (1.92%) गिरकर 74,559 पर बंद हुआ
-निफ्टी में 436 अंक (1.83%) की गिरावट, स्तर 23,380 रहा
-निफ्टी बैंक में भी करीब 884 अंकों की गिरावट दर्ज हुई
-मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी कमजोरी देखने को मिली
इन सेक्टर्स का बुरा हाल
-निफ्टी IT सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, करीब 3.5%–3.7% तक गिरा।
-मेटल, ऑयल एंड गैस और PSU बैंक को छोड़कर लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में रहे।
-IT सेक्टर में Adani Ports, TCS, Tech Mahindra और HCL Technologies जैसे बड़े शेयरों में तेज गिरावट देखी गई।
निवेशकों को भारी नुकसान
एक न्यूज चैनल की खबर के अनुसार, इस गिरावट के चलते निवेशकों की संपत्ति में लगभग 11 लाख करोड़ रुपये की कमी आई। BSE का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 467 लाख करोड़ रुपये से घटकर 456 लाख करोड़ रुपये पर आ गया।
गिरावट के बड़े कारण
-IT सेक्टर पर दबाव: IT सेक्टर में करीब 3.7% की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट की एक वजह यह भी रही कि वैश्विक स्तर पर AI Sectors में तेजी से बदलाव हो रहा है। Open AI से जुड़ी एक बड़ी घोषणा में कंपनियों के लिए AI Technology विकसित और लागू करने हेतु भारी निवेश की बात सामने आई, जिससे निवेशकों में चिंता बढ़ी।
-कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत में करीब 2.45% की बढ़ोतरी होकर यह 106.75 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। तेल की कीमत बढ़ने से भारत जैसे आयात-निर्भर देश में महंगाई बढ़ने की आशंका रहती है। इससे कंपनियों की लागत भी बढ़ती है, जिसका सीधा असर उनके मुनाफे पर पड़ता है।
-वैश्विक तनाव का असर: ईरान और अमेरिका के तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद हालात और अनिश्चित हो गए, जिसमें उन्होंने कहा कि युद्धविराम कमजोर स्थिति में है और स्थिति कभी भी बिगड़ सकती है। एक्सपर्ट का मानना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य बाधित होता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है।
