देश के 2030 तक 7,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में प्रौद्योगिकी क्षेत्र महत्वपूर्ण: नैसकॉम
punjabkesari.in Thursday, Apr 03, 2025 - 04:27 PM (IST)

बिजनेस डेस्कः प्रौद्योगिकी कंपनियों के शीर्ष संगठन नैसकॉम ने कहा है कि भारत 2030 तक 7,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर आगे बढ़ रह है। इसमें प्रौद्योगिकी क्षेत्र सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 1,000 अरब डॉलर का योगदान देकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है, जिससे घरेलू और वैश्विक दोनों समस्याओं का समाधान करने वाले नवोन्मेष को बढ़ावा मिलेगा।
नैसकॉम के अध्यक्ष राजेश नांबियार ने भारत के भविष्य को आकार देने में प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तकनीकी क्षेत्र को विशेष रूप से अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से नवोन्मेष में अगुवा होना होगा। यह स्वास्थ्य सेवा और वित्तीय सेवाओं जैसे विभिन्न क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव लाने में सहायक होगा। उन्होंने स्टार्टअप महाकुंभ के उद्घाटन के दौरान कहा कि 2047 तक विकसित भारत बनने का देश का दृष्टिकोण न केवल आर्थिक वृद्धि से बल्कि प्रौद्योगिकी नवोन्मेष से भी आकार लेगा।
नांबियार ने कहा, ‘‘भारत के लिए 7,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की महत्वाकांक्षा को प्राप्त करने के लिए, मुझे लगता है कि अकेले प्रौद्योगिकी क्षेत्र को सकल घरेलू उत्पाद के संदर्भ में लगभग 1,000 अरब डॉलर का योगदान करना होगा। इससे नवोन्मेष को बढ़ावा मिलेगा, जो न केवल भारत की समस्या बल्कि वैश्विक समस्याओं को भी हल करेगा।'' उन्होंने वैश्विक स्टार्टअप परिदृश्य में भारत की मजबूत स्थिति का जिक्र किया, जिसके साथ देश अब दुनिया भर में तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र बन गया है। नैसकॉम के अध्यक्ष ने कहा कि भारत का स्टार्टअप आधार मजबूत है। देश में लगभग 35,000 स्टार्टअप इकाइयां हैं।
देश ने पिछले साल वैश्विक स्तर पर दूसरी सबसे बड़ी संख्या में यूनिकॉर्न (एक अरब डॉलर से अधिक मूल्यांकन वाले स्टार्टअप) जोड़े। प्रौद्योगिकी क्षेत्र ने 2024 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 283 अरब डॉलर का महत्वपूर्ण योगदान दिया, जो कुल जीडीपी का लगभग 7.3 प्रतिशत है। नांबियार ने प्रौद्योगिकी संप्रभुता को राष्ट्र के लिए अनिवार्य बताते हुए कहा कि भारत को प्रौद्योगिकी के उपयोगकर्ता से परिवर्तनकारी प्रौद्योगिकी बनाने वाला बनने की जरूरत है। इसमें पेटेंट में अग्रणी होना, वैश्विक मानकों को आकार देना और वैश्विक प्रगति को आगे बढ़ाने वाली बौद्धिक संपदा का स्वामित्व शामिल है।
अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी इस परिवर्तन का आधार होगर, जो लोगों की सबसे कठिन समस्याओं का समाधान कर भारत को वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करने में सक्षम बनाएगी। तीन से पांच अप्रैल को यहां आयोजित स्टार्टअप महाकुंभ में 50 से अधिक देशों के स्टार्टअप, निवेशक और उद्योग प्रमुख शामिल हो रहे हैं।